पश्चिम बंगाल: तृणमूल सदस्य कोलेंद्रनाथ मंडी का भाजपा में शामिल होना चुनावी माहौल में महत्वपूर्ण बदलाव
सारांश
Key Takeaways
- कोलेंद्रनाथ मंडी का भाजपा में शामिल होना पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की संभावना है।
- उनकी साहित्यिक पहचान और सामाजिक सक्रियता भाजपा के लिए फायदेमंद हो सकती है।
- यह कदम आदिवासी समुदाय के लिए एक नई दिशा दिखाता है।
कोलकाता, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पुरुलिया जिला परिषद के तृणमूल सदस्य कोलेंद्रनाथ मंडी ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा की।
उन्होंने कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और पुरुलिया सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो की उपस्थिति में औपचारिक रूप से पार्टी में प्रवेश किया।
संताली साहित्य के प्रसिद्ध लेखक, कोलेंद्रनाथ 1978 से कविता, लघु कथाएँ, नाटक और निबंध लिखने में सक्रिय हैं। इसके साथ ही, वे संताली भाषाविज्ञान में अनुसंधान भी कर रहे हैं।
कोलेंद्रनाथ कई वर्षों से डायन-प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैला रहे हैं।
2023 के पंचायत चुनावों में, उन्होंने तृणमूल के टिकट पर पुरुलिया जिले के बांदवान ब्लॉक से जिला परिषद के लिए चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
गुरुवार को कोलेंद्र ने बताया कि उनकी साहित्यिक रचनाएँ सिधो-कान्हो-बिरशा विश्वविद्यालय और झारग्राम साधु रामचंद्र मुर्मु विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल हैं। उन्हें पिछले फरवरी में ममता बनर्जी सरकार द्वारा प्रतिष्ठित बंग भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कोलेंद्रनाथ के भाजपा में शामिल होने के बाद, सांसद ज्योतिर्मय महतो ने कहा कि वे जंगलमहल क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण नेता हैं और आदिवासी भाषा एवं संस्कृति की सशक्त आवाज हैं।
महतो ने यह भी कहा कि मंडी का भाजपा में शामिल होना जंगलमहल के आदिवासी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है, जो स्वदेशी जनसंख्या के लिए एक नई दिशा दिखाता है।
महतो ने आरोप लगाया कि तृणमूल शासन के तहत आदिवासी समुदाय विकास की कमी और अभाव का शिकार हो रहा है।
भाजपा के नेता ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार द्वारा देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का अपमान किए जाने से लोग नाराज हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस भावना का आगामी विधानसभा चुनावों पर गहरा असर पड़ेगा।