क्या कोलकाता में आई-पीएसी कार्यालय और प्रतीक जैन के घर पर ईडी का छापा पड़ा?

Click to start listening
क्या कोलकाता में आई-पीएसी कार्यालय और प्रतीक जैन के घर पर ईडी का छापा पड़ा?

सारांश

कोलकाता में ईडी द्वारा आई-पीएसी कार्यालय और प्रतीक जैन के निवास पर छापेमारी की गई, जिसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वहां पहुंचीं। यह कार्रवाई राजनीतिक हलचल के बीच हुई है और इसकी जड़ें कोल स्मगलिंग मामले से जुड़ी हैं। इस छापेमारी ने चुनावी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Key Takeaways

  • ईडी की छापेमारी ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
  • ममता बनर्जी का छापेमारी स्थल पर जाना महत्वपूर्ण है।
  • आई-पीएसी की भूमिका चुनावी राजनीति में प्रमुख रही है।
  • कोल स्मगलिंग मामले की जांच आगे बढ़ रही है।
  • राजनीतिक स्थिति में अस्थिरता की संभावना है।

कोलकाता, ८ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आई-पीएसी (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के साल्टलेक सेक्टर-वी स्थित कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के निवास पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सीधे जैन के घर पहुंचीं। कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा भी वहां मौजूद थे।

आई-पीएसी एक सलाहकार कंपनी है, जो २०१९ से तृणमूल कांग्रेस के लिए कार्य कर रही है। ईडी की एक विशेष टीम दिल्ली से कोलकाता आई और इस कार्रवाई को अंजाम दिया। ईडी अधिकारियों ने प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित निवास पर भी तलाशी ली। प्रतीक जैन आई-पीएसी के सह-संस्थापक और वर्तमान निदेशक हैं।

ईडी सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी दिल्ली में दर्ज एक पुराने कोल स्मगलिंग मामले से संबंधित है। इस मामले में आई-पीएसी का नाम कई लेन-देन में सामने आया है। इसी मामले की जांच के सिलसिले में ईडी की दूसरी टीम ने उत्तरी कोलकाता के पोस्टा क्षेत्र में एक व्यवसायी के घर भी छापा मारा।

इस कार्रवाई में केंद्रीय बलों की भी सहायता ली गई। अचानक हुए इस छापे ने आई-पीएसी की पूरी टीम को चौंका दिया। इस समय टीम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त थी। छापेमारी सुबह-सुबह शुरू हुई, जब कार्यालय में केवल कुछ कर्मचारी नाइट शिफ्ट में कार्यरत थे। आई-पीएसी का कार्यालय सेक्टर-वी की ११वीं मंजिल पर स्थित है और केंद्रीय बलों ने इस मंजिल को पूरी तरह सील कर दिया, जिससे कोई अंदर या बाहर नहीं जा सका।

जैसे-जैसे दिन बीतता गया, कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी अपने-अपने घरों से वीडियो कॉल के जरिए मीटिंग करने लगे। अलग-अलग जिलों में मौजूद आई-पीएसी के सदस्यों के साथ भी मीटिंग आयोजित की गई।

आई-पीएसी की स्थापना प्रशांत किशोर ने २०१४ लोकसभा चुनाव से पहले की थी। २०१९ के लोकसभा चुनाव के बाद से यह कंपनी तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार के लिए कार्य कर रही है। आई-पीएसी ने २०२१ विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की बड़ी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और २०२४ के लोकसभा चुनाव में भी सक्रिय रही।

प्रशांत किशोर के आई-पीएसी छोड़कर पूर्णकालिक राजनीति में जाने के बाद संगठन की अगुवाई अब तीन निदेशक कर रहे हैं: प्रतीक जैन, विनेश चंदेल और ऋषि राज सिंह। प्रतीक जैन पार्टी और संगठन के बीच मुख्य संपर्क व्यक्ति हैं।

इस बात का ध्यान रखने योग्य है कि तृणमूल कांग्रेस के ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी और डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी से भी पिछले कुछ वर्षों में केंद्रीय एजेंसियों ईडी और सीबीआई ने कोल स्मगलिंग मामले में कई बार पूछताछ की है। छापेमारी ऐसे समय में हुई है, जब राज्य विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर है।

प्रतीक जैन को राज्य की राजनीति और प्रशासन में काफी प्रभावशाली माना जाता है। उन्होंने कई मौकों पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से नबन्ना में मुलाकात की है। चुनाव से पहले आई-पीएसी, पार्टी और सरकार के बीच सेतु का काम भी करता रहा, जहां विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पार्टी और प्रशासन के बीच समन्वय बनाता था। आई-पीएसी टीम अभिषेक बनर्जी के कार्यालय के करीब कार्य करती रही और विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Point of View

NationPress
09/01/2026

Frequently Asked Questions

ईडी की छापेमारी का मुख्य कारण क्या था?
ईडी की छापेमारी का मुख्य कारण दिल्ली में दर्ज कोल स्मगलिंग मामले से जुड़ा है।
आई-पीएसी क्या है?
आई-पीएसी एक कंसल्टिंग फर्म है जो तृणमूल कांग्रेस के लिए कार्य कर रही है।
क्या ममता बनर्जी ने छापेमारी के बाद संवाद किया?
जी हां, ममता बनर्जी ने छापेमारी के बाद प्रतीक जैन के घर पर जाकर स्थिति का जायजा लिया।
प्रतीक जैन का राजनीतिक महत्व क्या है?
प्रतीक जैन को राज्य की राजनीति में प्रभावशाली माना जाता है और वे पार्टी और संगठन के बीच संपर्क का कार्य करते हैं।
इस घटना का चुनावों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस घटना ने चुनावी तैयारियों में अनिश्चितता पैदा कर दी है और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
Nation Press