क्या केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक की?
सारांश
Key Takeaways
- कृषि योजनाओं की समीक्षा में प्रगति पर चर्चा हुई।
- किसानों के लिए बजट का सही उपयोग आवश्यक है।
- उड़द की खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया गया।
- धनराशि का समय पर उपयोग कृषि विकास में सहायक है।
- केंद्र सरकार द्वारा योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को नई दिल्ली के कृषि भवन में गुजरात और पंजाब के कृषि मंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, कृषोन्नति योजना सहित अन्य प्रमुख केंद्रीय कृषि योजनाओं के तहत राज्यों में हो रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना था। इस दौरान योजनाओं के राज्यवार क्रियान्वयन, भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, लंबित प्रस्तावों तथा बजट उपयोग की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
शिवराज सिंह चौहान ने दोनों राज्यों को निर्देशित किया कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत जारी की गई धनराशि का समयबद्ध, पारदर्शी एवं नियमों के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों द्वारा धनराशि का प्रभावी एवं समय पर उपयोग किया जाएगा, उन्हें आगामी बजट में पर्याप्त एवं निर्बाध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रांश के ब्याज की निर्धारित राशि का समय पर जमा करना अनिवार्य है। इसमें किसी प्रकार की देरी से योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न होती है और इसका प्रतिकूल प्रभाव अगली किस्त की स्वीकृति पर भी पड़ सकता है।
बैठक के दौरान चौहान ने गुजरात में दलहन एवं तिलहन की उत्पादन क्षमता, किसानों की भागीदारी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की स्थिति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से उड़द की खरीद को और अधिक गति देने तथा किसानों तक खरीद प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने पर जोर दिया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा, आय में वृद्धि तथा कृषि क्षेत्र के समग्र विकास की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए आवंटित बजट का प्रभावी, योजनाबद्ध एवं परिणामोन्मुखी उपयोग अत्यंत आवश्यक है। समय पर एवं उचित वित्तीय उपयोग से ही योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का सही आकलन किया जा सकता है, जिसके आधार पर केंद्र सरकार द्वारा अगली किस्त समय पर जारी की जा सकेगी।