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क्या केटीआर ने कपास किसानों की समस्याओं पर केंद्र और तेलंगाना सरकार पर ‘अनदेखी’ का आरोप लगाया?

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क्या केटीआर ने कपास किसानों की समस्याओं पर केंद्र और तेलंगाना सरकार पर ‘अनदेखी’ का आरोप लगाया?

सारांश

हैदराबाद में केटीआर ने कपास और सोयाबीन किसानों से मिलकर उनकी समस्याओं का जायजा लिया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, किसानों की निराशा को उजागर किया है। क्या ये आरोप सही हैं? पढ़ें पूरी कहानी।

मुख्य बातें

किसानों की समस्याओं को अनदेखा करना खतरनाक है।
केटीआर ने कृषि क्षेत्र के लिए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
बिक्री संकट का समाधान निकालना आवश्यक है।
किसानों की आवाज़ को महत्व देना चाहिए।
राजनीतिक संवाद में किसान मुद्दों को शामिल करना जरूरी है।

हैदराबाद, 18 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव (केटीआर) ने मंगलवार को वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ आदिलाबाद जिले का दौरा किया ताकि कपास और सोयाबीन उगाने वाले किसानों की समस्याओं को समझा जा सके।

आदिलाबाद मार्केट यार्ड में किसानों से बातचीत के दौरान कई किसानों ने मौजूदा खरीद संकट को लेकर गहरी निराशा व्यक्त की। बीआरएस के अनुसार, किसानों का आरोप है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों ने उनकी गुहार को पूरी तरह नज़रअंदाज कर दिया है और किसी भी प्रकार की सहायता नहीं दी है।

किसानों ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने चुनावों के दौरान कृषि क्षेत्र के लिए बड़े राहत पैकेज का वादा किया था, लेकिन सरकार ने कोई भी आश्वासन पूरा नहीं किया। यहां तक कि उनकी फसल बेचने के लिए आवश्यक बुनियादी सहायता भी उपलब्ध नहीं कराई गई।

किसानों से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए केटीआर ने राज्य सरकार की नीयत पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “अगर किसानों को कोई समस्या नहीं है तो आज आदिलाबाद मार्केट यार्ड बंद क्यों है? किसानों से मिलने के लिए हमारे दौरे को क्यों रोका गया?”

उन्होंने कपास और सोयाबीन खरीद प्रणाली में भारी गिरावट की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई।

केटीआर ने ‘किसान कपास मोबाइल ऐप’ की भी आलोचना की, यह कहते हुए कि कई किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं और आदिलाबाद के कई क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता भी बेहद कमजोर है।

उन्होंने बताया कि बेमौसम बारिश और अत्यधिक ठंड के कारण कपास की नमी स्वतः बढ़ गई है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले बीआरएस के कार्यकाल में केंद्र पर दबाव बनाने के बाद 20–22 प्रतिशत नमी वाली कपास भी खरीदी गई थी, लेकिन आज 12 प्रतिशत नमी पर भी खरीद से इनकार किया जा रहा है। किसान मजबूर हैं और निराशा की ओर धकेले जा रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि अब तक एक लाख क्विंटल कपास भी नहीं खरीदी गई है। केटीआर का आरोप है कि सरकार निजी व्यापारियों के साथ मिलकर किसानों का शोषण कर रही है।

बीआरएस नेता ने प्रति एकड़ सिर्फ 7 क्विंटल की खरीद सीमा की निंदा की। उन्होंने कहा कि आदिलाबाद की उपजाऊ भूमि पर 10–15 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन होता है, तो बाकी माल किसानों को कहां बेचना चाहिए।

केटीआर ने राज्य सरकार पर “राजनीतिक नौटंकी” करने का आरोप लगाया और कहा कि बीआरएस नेताओं के किसान दौरे के कारण ही सरकार ने केंद्र के साथ अचानक वीडियो कॉन्फ्रेंस तय की। उन्होंने यह भी कहा कि हाल में हुई कैबिनेट बैठक में भी कपास संकट पर चर्चा नहीं हुई, जबकि यह राज्य के आधे से अधिक जिलों को प्रभावित कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि कृषि क्षेत्र में सुधार हो सके।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या केटीआर ने किसानों के मुद्दों को उठाया?
हाँ, केटीआर ने किसानों के मुद्दों को उठाया और केंद्र तथा राज्य सरकारों पर अनदेखी का आरोप लगाया।
किसानों की समस्याएँ क्या हैं?
किसानों ने खराब खरीद प्रणाली, फसल की गिरती कीमतें और सहायता की कमी की शिकायत की।
क्या सरकार ने किसानों के लिए कोई कदम उठाए हैं?
किसानों का आरोप है कि सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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