क्या बिहार में बदलाव संभव है? नीतीश और भाजपा का सफाया तय है: इरफान अंसारी

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क्या बिहार में बदलाव संभव है? नीतीश और भाजपा का सफाया तय है: इरफान अंसारी

सारांश

क्या बिहार में बदलाव आ रहा है? इरफान अंसारी ने नीतीश कुमार और भाजपा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जानें इस बदलाव की वजह और राहुल गांधी की भूमिका।

मुख्य बातें

बिहार में बदलाव: जनता अब जागरूक हो रही है।
राहुल गांधी का नेतृत्व: बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका।
मतदाता सूची में हेरफेर: ६५ लाख लोगों के नाम हटाए गए।
नीतीश और भाजपा: दुबारा सत्ता में आने की संभावना कम।
लोकतांत्रिक अधिकार: जनता के अधिकारों का हनन।

रांची, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने बिहार की राजनीति पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार में अब बदलाव की लहर चल रही है और नीतीश कुमार तथा भाजपा की सरकार एक बार फिर से सत्ता में नहीं आ सकेगी। उनका यह भी मानना है कि जनता अब जागरूक हो चुकी है और राहुल गांधी को इस बदलाव का नेता मान रही है।

इरफान अंसारी ने राष्ट्र प्रेस से कहा, "बिहार में शोषण हुआ है। अधिकारों का हनन किया गया है। वोटों से वंचित किया जा रहा है। ये लोग एसआईआर लागू करना चाहते हैं। वोट से वंचित करने के साथ-साथ वोट भी चुराए जा रहे हैं।"

उन्होंने राहुल गांधी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सुबह ७:३० बजे से उठकर लाखों लोगों से मिलना और लगातार जनसंपर्क करना यह साबित करता है कि लोग अब उनके साथ जुड़ रहे हैं। "मुझे तो थकावट महसूस हो रही थी, लेकिन राहुल गांधी थकने का नाम नहीं ले रहे।"

उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में लगातार जनता के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। वहां मतदाता सूची से लोगों को बाहर किया जा रहा है।

इरफान अंसारी ने दावा किया कि बिहार में ६५ लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जो किसी बड़ी साजिश का संकेत है। वोट चुराने का यह सिलसिला जारी है। उन्होंने झारखंड का उदाहरण देते हुए बताया कि यहां ५० हजार वोट लेकर कोई विधायक बन सकता है।

इरफान अंसारी ने कहा कि राहुल गांधी ने इस लोकतांत्रिक बीमारी को पहचान लिया है और वे इसके खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।

गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे सांसदों को हटाने के प्रस्ताव वाले विधेयक पर मंत्री इरफान अंसारी ने कहा, "हम इस विधेयक का कड़ा विरोध करते हैं, यह केवल नेताओं का मनोबल गिराने के लिए लाया गया है। यह तो एक आदत बन गई है। कभी काला कानून, कभी कृषि विधेयक और अब सांसदों, मंत्रियों और यहां तक कि प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी का विधेयक। यह एक मजाक है और अस्वीकार्य है।"

इरफान अंसारी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, "अमित शाह तो सुपरमैन हैं, जो चाहे कर लें। हम क्या कर सकते हैं?"

उन्होंने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि केवल झारखंड के लोग ही उन्हें पहचानते हैं, लेकिन अब बिहार में भी लोग उनका नाम और चेहरा पहचानने लगे हैं, जो उनके लिए गर्व की बात है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिहार में हो रहे राजनीतिक बदलाव को एक नई आशा के रूप में देखा जा सकता है। जनता की जागरूकता और राजनीतिक नेतृत्व का सही दिशा में होना, लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या इरफान अंसारी का बयान महत्वपूर्ण है?
हाँ, इरफान अंसारी का बयान बिहार की राजनीति में बदलाव के संकेत दे रहा है। यह जनता की जागरूकता को दर्शाता है।
क्या बिहार में चुनावी बदलाव संभव है?
बिल्कुल, अगर जनता जागरूक है और एकजुट होकर मतदान करती है, तो बदलाव संभव है।
राहुल गांधी की भूमिका क्या है?
राहुल गांधी ने बदलाव की लहर को नेतृत्व देने का प्रयास किया है, जिससे जनता उनसे जुड़ रही है।
क्या वोट चुराने का आरोप सही है?
इरफान अंसारी ने इस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जो जांच का विषय है।
भाजपा और नीतीश कुमार की स्थिति क्या है?
उनकी स्थिति अब कमजोर दिखाई दे रही है, क्योंकि जनता में बदलाव की आकांक्षा है।
राष्ट्र प्रेस
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