क्या कलाकार को जीवन भर के संघर्ष के बाद सिर्फ मरने के बाद ही सम्मान मिलता है? : दिलजीत दोसांझ

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क्या कलाकार को जीवन भर के संघर्ष के बाद सिर्फ मरने के बाद ही सम्मान मिलता है? : दिलजीत दोसांझ

सारांश

दिलजीत दोसांझ ने अपनी फ़िल्म 'चमकीला' और एक कलाकार के जीवन के संघर्ष पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि जब तक कलाकार जीवित होता है, उसे सम्मान नहीं मिलता, जबकि मृत्यु के बाद ही उसकी महानता को पहचाना जाता है। यह वीडियो कलाकारों की स्थिति पर एक गहरी नज़र डालता है।

Key Takeaways

  • कलाकारों का संघर्ष: कलाकारों को जीवित रहते हुए सम्मान नहीं मिलता।
  • सामाजिक दृष्टिकोण: समाज अक्सर केवल मृत्यु के बाद ही कलाकारों की सराहना करता है।
  • अमर सिंह चमकीला का योगदान: उन्हें पंजाब का पहला 'रॉकस्टार' माना जाता था।

मुंबई, 4 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 2024 में दिलजीत दोसांझ की फ़िल्म 'चमकीला' प्रदर्शित हुई, जो पंजाबी लोकगायक अमर सिंह चमकीला के जीवन पर आधारित है। इस फ़िल्म को अनेक श्रेणियों में नामांकित किया गया, लेकिन इसे कोई भी पुरस्कार प्राप्त नहीं हुआ।

हाल ही में, दिलजीत ने नेटफ्लिक्स के साथ मिलकर एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उन्होंने फ़िल्म और एक कलाकार की कठिनाइयों पर चर्चा की है। उनका कहना है कि जब तक कलाकार जीवित रहता है, उसे परेशान किया जाता है, परंतु मृत्यु के बाद उसे श्रद्धांजलि दी जाती है।

दिलजीत ने अपने इंस्टाग्राम पर वीडियो साझा किया और बताया कि एक कलाकार को सफल होने के लिए कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वे वीडियो में कहते हैं, "एक कलाकार को अपने जीवन में हर तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है और जब तक वह नहीं मर जाता, तब तक लोग उसकी महानता को नहीं मानते। जब वे निधन हो जाते हैं, तभी उन्हें महान कहा जाता है या उनका प्यार मिलता है। इसके बाद ही उनके काम की सराहना होती है, क्योंकि एक तो वे जीवित नहीं हैं, दूसरा उनके साथ प्रतिस्पर्धा नहीं है, और तीसरा, मृत व्यक्ति को सम्मान देना इंसान की स्वाभाविक प्रवृत्ति है।"

उन्होंने आगे कहा, "यह दुनिया एक फ़िल्म के सेट की तरह है और हर कोई अपना किरदार निभा रहा है। जब तक कलाकार जीवित है, उसे कोई पूछता नहीं है, उसे धमकियां दी जाती हैं, और परेशान किया जाता है, क्योंकि जो वह कर रहे हैं, वह समाज को सहन नहीं होता। और मरने के बाद कहा जाता है, 'वाह, क्या गाना था।'"

इसके अतिरिक्त, उन्होंने अपनी फ़िल्म 'चमकीला' के बारे में भी खुलकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि वे यहां मान्यता के लिए नहीं, बल्कि चमकीला के लिए आए हैं। अपने फ़िल्म के अनुभवों पर गायक ने कहा कि फ़िल्म में एक शॉट है। यह शॉट मैंने इसलिए किया क्योंकि कोई अन्य कलाकार इसे समय पर नहीं कर सकता था। मुझे ऐसा महसूस हुआ कि चमकीला मुझे कहीं से देख रहा है और उस सीन को देखकर मैं भावुक हो गया। मेरे लिए यह करना आसान नहीं था।

ज्ञात हो कि फ़िल्म 'चमकीला' अमर सिंह चमकीला के जीवन पर आधारित है, जिसमें उनके संघर्ष और हत्या की कहानी दर्शाई गई है। उन्हें पंजाब का पहला 'रॉकस्टार' माना जाता था, क्योंकि उनके गानों में लोकगीतों के साथ नए संगीत की झलक भी मिलती थी। उनके गाने रूढ़िवादी विषयों को चुनौती देते थे, और इसी कारण वे समाज में खटकने लगे। वर्ष 1998 में अमर सिंह चमकीला और उनकी पत्नी अमरजोत को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

Point of View

यह स्पष्ट है कि कलाकारों का संघर्ष सदियों से जारी है। दिलजीत का यह बयान केवल उनकी स्थिति नहीं, बल्कि हमें यह समझाने का प्रयास है कि समाज की नजर में महानता का मूल्यांकन अक्सर उनके निधन के बाद होता है। यह हमारे लिए एक आइना है कि हमें जीवित कलाकारों के योगदान को सही समय पर पहचानने और सराहने की आवश्यकता है।
NationPress
26/02/2026

Frequently Asked Questions

दिलजीत दोसांझ ने 'चमकीला' फ़िल्म के बारे में क्या कहा?
दिलजीत ने कहा कि जब तक कलाकार जीवित रहता है, उसे सम्मान नहीं मिलता, लेकिन मरने के बाद उसे महान माना जाता है।
अमर सिंह चमकीला किसे कहा जाता है?
अमर सिंह चमकीला को पंजाब का पहला 'रॉकस्टार' कहा जाता है।
फिल्म 'चमकीला' किस विषय पर आधारित है?
यह फ़िल्म अमर सिंह चमकीला के जीवन, उनके संघर्ष और हत्या की कहानी पर आधारित है।
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