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जस्टिस यशवंत वर्मा के भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए पुनर्गठित समिति

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जस्टिस यशवंत वर्मा के भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए पुनर्गठित समिति

सारांश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का पुनर्गठन किया है। यह समिति 6 मार्च से प्रभावी होगी। जानिए इस मामले की हर महत्वपूर्ण जानकारी।

मुख्य बातें

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए समिति का पुनर्गठन।
नई समिति 6 मार्च से प्रभावी होगी।
अध्यक्ष: जस्टिस अरविंद कुमार , सदस्य: जस्टिस श्री चंद्रशेखर और बी.वी.
यह समिति पिछले साल अगस्त में गठित की गई थी।
समिति में बदलाव मद्रास उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस की रिटायरमेंट के कारण हुआ है।

नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति का पुनर्गठन किया गया है। लोकसभा सचिवालय ने 25 फरवरी को जारी अधिसूचना में बताया है कि यह पुनर्गठित समिति 6 मार्च से प्रभावी होगी।

इस अधिसूचना के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस अरविंद कुमार समिति के अध्यक्ष होंगे। साथ ही, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य इसे सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि पुनर्गठित पैनल 6 मार्च से प्रभावी होगा। यह कदम मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनिंदर मोहन श्रीवास्तव की निर्धारित सेवानिवृत्ति के बाद उठाया गया है। उन्हें अगस्त 2025 में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग नोटिस भेजे जाने के बाद गठित मूल समिति का हिस्सा माना गया था। उनके स्थान पर अब जस्टिस श्री चंद्रशेखर को पैनल में शामिल किया गया है, जबकि अध्यक्ष के रूप में जस्टिस अरविंद कुमार और सदस्य के रूप में बी.वी. आचार्य बने रहेंगे।

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई समिति का पुनर्गठन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा किया गया है। 25 फरवरी को जारी अधिसूचना के अनुसार, समिति के एक सदस्य, मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मणिंद्र मोहन श्रीवास्तव 6 मार्च को रिटायर हो रहे हैं। उनकी जगह जस्टिस श्री चंद्रशेखर को शामिल किया गया है। यह जांच समिति पिछले साल अगस्त में बनाई गई थी, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के 152 सांसदों ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था।

पिछले साल अगस्त में, सत्ता पक्ष और विपक्ष के 152 सांसदों ने उस समय दिल्ली उच्च न्यायालय में कार्यरत रहे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था। प्रस्ताव स्वीकार करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। हालाँकि, जस्टिस वर्मा ने समिति की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे 16 जनवरी को खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने समिति के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखा।

विवाद की शुरुआत 15 मार्च 2024 की रात को दिल्ली स्थित उनके आधिकारिक आवास पर आग लगने की घटना से हुई थी। आग बुझाने के दौरान स्टोर रूम से जली हुई नकदी बरामद हुई थी, जिसके वीडियो सामने आए थे। उस समय जस्टिस वर्मा भोपाल में थे। उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि बरामद धनराशि का उनसे या उनके परिवार से कोई संबंध नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इस जांच से न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर किया जा रहा है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोप क्या हैं?
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं, जिनकी जांच के लिए समिति गठित की गई है।
इस समिति की अध्यक्षता कौन करेगा?
समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस अरविंद कुमार करेंगे।
समिति का पुनर्गठन कब होगा?
पुनर्गठित समिति 6 मार्च से प्रभावी होगी।
पहले समिति में कौन शामिल था?
पहले समिति में मद्रास उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस मणिंद्र मोहन श्रीवास्तव शामिल थे।
क्यों इस समिति का पुनर्गठन किया गया?
मद्रास उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस की रिटायरमेंट के कारण समिति का पुनर्गठन किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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