क्या कोश्यारी को पद्मभूषण दिए जाने पर संजय राउत का बयान महापुरुषों का अपमान है?
सारांश
Key Takeaways
- भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण पुरस्कार मिला है।
- संजय राउत ने इस पर असंतोष व्यक्त किया है।
- राउत का कहना है कि यह महाराष्ट्र के लिए अपमान है।
- राष्ट्रपति के भाषण में शांति का संदेश था।
- बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर सवाल उठाए गए।
मुंबई, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण पुरस्कार दिए जाने पर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे महाराष्ट्र के लोग संतुष्ट नहीं हैं।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए राउत ने कहा कि यह गौरव का दिन है। हम हमेशा गर्व से कहते हैं कि हमारा गणतंत्र अमर है। मैंने राष्ट्रपति का भाषण सुना, जिसमें उन्होंने देश और दुनिया को शांति का संदेश दिया और भारत को शांति के मार्ग पर आगे बढ़ने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को यह जानना चाहिए कि हमारे देश में सबसे ज्यादा अशांति और अस्थिरता है। उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य सड़क पर हैं, उन पर लाठीचार्ज किया गया। मणिपुर में अभी भी हिंसा जारी है। महाराष्ट्र में हर दिन नई खबरें आ रही हैं। दिल्ली में शांति नहीं है, न्यायालय में भी शांति नहीं है और हर जगह दबाव है।
राउत ने कहा कि हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी अशांति है। वहाँ सबसे ज्यादा नुकसान हिंदू भाइयों को हो रहा है। लगातार चार-पांच हिंदुओं की हत्याएं हो रही हैं और उनके घरों पर हमले हो रहे हैं। क्या यह राष्ट्रपति को मंजूर है? प्रधानमंत्री हिंदू भाइयों और सनातन धर्म की बात करते हैं, लेकिन बांग्लादेश में हो रही हिंदुओं की हत्याओं को रोकने में असफल हैं।
भगत सिंह कोश्यारी को मिले पद्मभूषण पर उन्होंने कहा कि इससे महाराष्ट्र के लोग संतुष्ट नहीं हैं। यह कोई व्यक्तिगत मामला नहीं है। वे महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे हैं और उनके कार्यकाल में हमारी पार्टी को तोड़ने का काम किया गया, राजभवन को राजनीतिक अड्डा बनाया गया और संविधान तथा लोकतंत्र की हत्या करके चुनी हुई सरकार को बर्खास्त किया गया। यह सब उच्चतम न्यायालय का ऑब्जर्वेशन है। ऐसे व्यक्ति को पद्मभूषण अवार्ड मिलना महाराष्ट्र को मंजूर नहीं।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के सीएम और उपमुख्यमंत्रियों को प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि भगत सिंह कोश्यारी ने राज्यपाल पद पर रहते हुए छत्रपति महाराज, महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले का अपमान किया था। उन्हें सम्मान देने का निर्णय हमें मंजूर नहीं है।
पूरे देश में हरा झंडा फहराने वाले एआईएमआईएम नेता वारिस पठान के बयान पर उन्होंने कहा कि हरा रंग किसी के बाप की जागीर नहीं है। हर पार्टी का अपना रंग होता है, लेकिन महाराष्ट्र में यदि कोई रंग रहेगा, तो वह छत्रपति शिवाजी महाराज का भगवा रंग रहेगा।