क्या भाजपा विधायक नीरा यादव का मतदाता पुनरीक्षण का विरोध पर सवाल सही है?

सारांश
Key Takeaways
- मतदाता पुनरीक्षण का विरोध बांग्लादेशी नागरिकों को बसाने की कोशिश हो सकता है।
- राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है।
- लोगों में डर का माहौल है, जो उनकी सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है।
- एसआईआर के तहत फर्जी दस्तावेज़ प्राप्त करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
- यह एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
रांची, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री नीरा यादव ने मंगलवार को मतदाता पुनरीक्षण का विरोध करने वालों पर तीखा हमला किया। उन्होंने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि ये लोग मतदाता पुनरीक्षण का विरोध क्यों कर रहे हैं? जिस प्रकार से ये लोग इसका विरोध कर रहे हैं, यह स्पष्ट है कि वे बांग्लादेशी नागरिकों को यहाँ बसाना चाहते हैं और यहाँ के मूल निवासियों के हितों पर आघात करना चाहते हैं, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने इस पर चिंता जताई कि यदि बाहर से आए लोग यहाँ फर्जी तरीके से अपनी पहचान स्थापित कर लेते हैं, तो निश्चित रूप से यहाँ रहने वाले लोगों के हितों को नुकसान होगा। उनकी पहचान छीन ली जाएगी, जो बिल्कुल भी सहन करने योग्य नहीं है। ऐसी स्थिति में हमारा यह कर्तव्य है कि हम यहाँ के मूल निवासियों की पहचान पर किसी भी प्रकार का हमला नहीं होने दें। यहाँ की संस्कृति के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज के समय में यहाँ लोगों का जीना कठिन हो गया है। दिनदहाड़े बहनों की चेन छीन ली जाती है, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। हम पहले रात 12 से 2 बजे तक बिना किसी डर के घूमते थे। हम रात में भी दुर्गा पूजा और होली जैसे त्योहारों पर आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेते थे और हमारे मन में कोई डर नहीं होता था। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। लोगों में कानून व्यवस्था को लेकर इतना भय है कि वे बिना डर के एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाते। इस स्थिति में मेरा सवाल है कि इसका जिम्मेदार कौन है?
भाजपा नेता ने कहा कि आज के समय में प्रदेश के लोग डर के माहौल में जीने को मजबूर हैं। वे हमेशा इस डर में रहते हैं कि कब उनके साथ कुछ अनहोनी हो जाए। कब किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़े। इस स्थिति में यह सवाल उठता है कि सरकार क्या चाहती है?
उन्होंने एसआईआर पर अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि हमें समझ में नहीं आ रहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य क्या है? एसआईआर के तहत स्पष्ट है कि केवल उन्हीं मतदाताओं को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा, जिन्होंने फर्जी तरीके से दस्तावेज प्राप्त किए हैं और जो लोग विधिक तरीके से दस्तावेज प्राप्त किए हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है.