क्या टीवी पत्रकारों की गिरफ्तारी प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है: जगन मोहन रेड्डी?

Click to start listening
क्या टीवी पत्रकारों की गिरफ्तारी प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है: जगन मोहन रेड्डी?

सारांश

तेलंगाना पुलिस द्वारा पत्रकारों की गिरफ्तारी ने प्रेस की स्वतंत्रता को चुनौती दी है। जगन मोहन रेड्डी की कड़ी निंदा और पत्रकारों की रिहाई की मांग इस मुद्दे को और गरमा देती है। जानिए इस विवाद पर और क्या कहती है एनयूजे-आई?

Key Takeaways

  • प्रेस की स्वतंत्रता का हनन
  • तानाशाही मानसिकता का संकेत
  • पत्रकारों की तत्काल रिहाई की मांग
  • लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा
  • कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन

हैदराबाद, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने तेलंगाना पुलिस द्वारा टीवी पत्रकारों की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए इसे प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक सीधा हमला बताया है।

जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए तेलुगु समाचार चैनल एनटीवी के पत्रकारों की गिरफ्तारी की आलोचना की। यह गिरफ्तारी तेलंगाना के एक मंत्री और एक महिला आईएएस अधिकारी के खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री के प्रसारण से संबंधित मामले में की गई है।

उन्होंने लिखा, “मैं एनटीवी पत्रकारों की गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। यह प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है। त्योहार के समय आधी रात को पत्रकारों के घरों पर तोड़फोड़ कर जबरन प्रवेश करना, बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए और बिना नोटिस जारी किए गिरफ्तारी करना बेहद निंदनीय है और यह तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है।”

जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि पत्रकार न तो अपराधी हैं और न ही आतंकवादी, फिर भी उनके साथ अत्यधिक कठोरता बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से पत्रकारों के परिवारों को गंभीर मानसिक आघात पहुंचता है और मीडिया जगत में भय का माहौल बनता है। उन्होंने गिरफ्तार पत्रकारों की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए राज्य सरकार से संविधान का सम्मान करने, कानून के शासन को बनाए रखने और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करने का आग्रह किया।

इस बीच, नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स–इंडिया (एनयूजे-आई) ने भी तेलंगाना पुलिस द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों की “अवैध” गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र और संवैधानिक स्वतंत्रता पर गंभीर हमला करार दिया है। संगठन ने गिरफ्तार पत्रकारों की तुरंत रिहाई की मांग की है।

एनयूजे-आई के अध्यक्ष रास बिहारी और वरिष्ठ नेता सिल्वेरी श्रीशैलम ने तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर एनटीवी पर प्रसारित एक खबर के सिलसिले में वरिष्ठ पत्रकार डोंटू रमेश, परिपूर्णा चारी और सुधीर की गिरफ्तारी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

पत्र में कहा गया है कि गिरफ्तारी का तरीका लोकतांत्रिक शासन की गंभीर विफलता को उजागर करता है। विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन के बावजूद, पत्रकारों को बिना किसी पूर्व नोटिस, समन या सफाई का अवसर दिए गिरफ्तार किया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों, विधि की उचित प्रक्रिया और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन है।

एनयूजे-आई ने स्पष्ट किया कि वह कानून का उल्लंघन करने या व्यक्तिगत मानहानि करने वाली पत्रकारिता का समर्थन नहीं करता, लेकिन किसी भी लोकतांत्रिक सरकार को पुलिस तंत्र का दुरुपयोग कर पत्रकारों को डराने का अधिकार नहीं है।

पत्र में यह भी कहा गया कि यदि सरकार को समाचार सामग्री पर आपत्ति थी तो उसके पास कई कानूनी विकल्प उपलब्ध थे, जैसे स्पष्टीकरण मांगना, नोटिस जारी करना या न्यायालय का रुख करना। गिरफ्तारी जैसा कठोर कदम उठाना तानाशाही प्रवृत्ति को दर्शाता है और यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत प्रदत्त प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।

Point of View

हमें यह समझना आवश्यक है कि पत्रकारिता का यह हमला लोकतंत्र के मूल्यों को चुनौती देता है। हमें प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आवाज उठानी चाहिए, ताकि समाज में स्वतंत्र विचारों का आदान-प्रदान होता रहे।
NationPress
15/01/2026

Frequently Asked Questions

जगन मोहन रेड्डी ने पत्रकारों की गिरफ्तारी पर क्या कहा?
जगन मोहन रेड्डी ने पत्रकारों की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की और इसे प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया।
एनयूजे-आई का इस पर क्या रुख है?
एनयूजे-आई ने तेलंगाना पुलिस की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया और पत्रकारों की तुरंत रिहाई की मांग की।
क्या पत्रकारों को गिरफ्तार करने का तरीका सही था?
पत्रकारों को बिना किसी पूर्व नोटिस या उचित कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तार करना लोकतांत्रिक शासन की विफलता है।
क्या सरकार ने पत्रकारों के खिलाफ कोई कानूनी कदम उठाया था?
सरकार के पास कई कानूनी विकल्प थे, जैसे स्पष्टीकरण मांगना या नोटिस जारी करना।
क्या यह गिरफ्तारी प्रेस की स्वतंत्रता पर असर डाल सकती है?
जी हां, इस तरह की गिरफ्तारी प्रेस की स्वतंत्रता को खतरे में डाल सकती है।
Nation Press