क्या शहीद पिता के शब्दों ने जितेंद्र का जीवन बदल दिया? 26 साल में जुटाए दो लाख वीरों की जानकारी

सारांश
Key Takeaways
- जितेंद्र सिंह ने 26 वर्षों में दो लाख से अधिक शहीदों की जानकारी इकट्ठा की है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें सम्मानित किया, जो उनके लिए गर्व का विषय है।
- उनका सपना है कि शहीदों के लिए एक संग्रहालय बने।
सूरत, 31 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 125वें संस्करण को संबोधित किया। उन्होंने समाज में प्रेरणा देने वाले लोगों का उल्लेख किया, जिनमें गुजरात के सूरत में रहने वाले जितेंद्र सिंह राठौड़ का नाम भी शामिल है।
जितेंद्र सिंह पिछले कई वर्षों से उन वीर जवानों की जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बलि दी है।
जितेंद्र, जो एक सुरक्षा गार्ड हैं, ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि वे गुजरात में नौकरी कर रहे हैं, इसलिए यहां एक फोटो संग्रह भी है। साथ ही, उनके पास शहीदों का एक संग्रह भी है, जिसमें प्रथम विश्व युद्ध से लेकर अब तक के दो लाख सात हजार शहीद जवानों की जानकारी मौजूद है। यह संग्रह 26 क्विंटल वजनी है और इसमें शहीदों की जानकारी 176 रजिस्टर में लिखी गई है।
उन्होंने साझा किया कि वे सेना में भर्ती होना चाहते थे, लेकिन लंबाई कम होने के कारण उनका चयन नहीं हो पाया।
जितेंद्र बताते हैं कि 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान एक समाचार पत्र में एक शहीद पिता के शब्द, “बेटा गया तो क्या हुआ, वतन तो सलामत है ना” ने उनके जीवन को बदल दिया। इसके बाद से उन्होंने शहीद परिवारों की जानकारी इकट्ठा करनी शुरू की।
वह पिछले 26 सालों से शहीद जवानों की जानकारी और तस्वीरें इकट्ठा कर रहे हैं। उनके पास अब तक 2 लाख से अधिक शहीदों का ब्योरा और 23,000 से अधिक शहीदों की तस्वीरें हैं। उनके पास 15,500 से अधिक शहीद परिवारों के संपर्क नंबर भी हैं।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी जी ने मेरा जिक्र किया, इससे मैं बहुत खुश हूं। यह सम्मान मेरे लिए गर्व का विषय है। मैंने दो सिक्योरिटी की नौकरियों से जो भी कमाया, सब शहीदों की यादों को सहेजने में लगाया। मेरी ख्वाहिश है कि शहीदों के लिए एक अच्छा स्मारक या संग्रहालय बने, जहां आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति की सच्ची प्रेरणा मिले।”