क्या विदेश यात्रा करना राहुल गांधी का अपराध है?
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी का विदेश दौरा कोई अपराध नहीं है।
- नववर्ष मनाना एक व्यक्तिगत अधिकार है।
- विदेश में आंतरिक मुद्दों पर चर्चा करना हमारी परंपरा नहीं है।
- राजनीतिक बयानबाजी में संतुलन बनाए रखना चाहिए।
- दूषित पानी और स्वास्थ्य के मुद्दे गंभीर हैं।
पटना, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विदेश दौरे पर कहा कि विदेश यात्रा पर जाना कोई अपराध नहीं है।
पटना में जदयू प्रवक्ता ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि राहुल गांधी नववर्ष मनाने के लिए विदेश गए होंगे। उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, लेकिन देश के अंदरुनी मामलों पर विदेश में चर्चा करना हमारी परंपरा का हिस्सा कभी नहीं रहा है। अगर कोई नववर्ष का जश्न मनाने गया है, तो उसे ऐसा करने का पूरा हक है।
उत्तराखंड सरकार में मंत्री रेखा आर्य के पति गिरिधारी लाल के बिहार को लेकर दिए बयान पर जदयू प्रवक्ता ने कहा कि उत्तराखंड सरकार में एक मंत्री के पति द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा बर्दाश्त से बाहर है। ऐसा लगता है कि मेडिकल आधार पर भी कहा जाता है कि ठंड के मौसम में दिमाग ज्यादा गरम हो जाता है। ऐसी भाषा का इस्तेमाल वह अपने साथियों और परिवार के सदस्यों के साथ भी करते होंगे, इसलिए राज्य सरकार की महिला आयोग ने उत्तराखंड सरकार को पत्र लिखकर इस मामले में उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
बंगाल में विपक्ष की ओर से एसआईआर का विरोध किए जाने पर जदयू प्रवक्ता ने कहा कि एसआईआर पर बेवजह विपक्ष विरोध जता रहा है। बिहार में विपक्ष को करारी हार का सामना करना पड़ा, लेकिन विपक्ष ने इस हार से सबक नहीं लिया। सुप्रीम कोर्ट की भी एसआईआर पर मुहर लग चुकी है।
उन्होंने इंदौर में दूषित पानी के मुद्दे पर कहा कि ये मौजूदा दौर की नई चुनौतियां हैं। अगर इन मानकों के हिसाब से जिंदगी की सुरक्षा नहीं की जाती है तो पानी एक अहम फैक्टर बनकर सामने आ रहा है, जिससे पानी से होने वाली बीमारियां फैल रही हैं। अगर राज्य सरकार, नगर परिषद या कॉर्पोरेशन तय मानकों का पालन करने में नाकाम रहते हैं तो यकीनन सख्त कार्रवाई करनी पड़ेगी।
उन्होंने बीसीसीआई की ओर से केकेआर को बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को टीम से हटाने के निर्देश पर कहा कि धर्म के आधार पर बना कोई भी देश आखिरकार लोकतंत्र का गला घोंट देता है। हालांकि, हमारी परंपरा कभी भी खेल का राजनीतिकरण करने की नहीं रही है। यह सच है कि बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए पूरी दुनिया को दखल देना चाहिए। बीसीसीआई ने जो निर्देश दिया है, वह सोच-समझकर ही दिया होगा।