क्या विपक्षी दलों के मुखर नेताओं को टारगेट किया जा रहा है: उदयवीर सिंह?

सारांश
Key Takeaways
- विपक्ष के नेताओं को टारगेट किया जा रहा है।
- ईडी की कार्रवाई पर संदेह।
- विदेश नीति की विफलता पर चिंता।
- राजनीतिक दबाव की आलोचना।
- वोटर अधिकार यात्रा में भागीदारी।
लखनऊ, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता उदयवीर सिंह ने आम आदमी पार्टी (आप) नेता सौरभ भारद्वाज के आवास पर ईडी की छापेमारी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे विपक्ष के मुखर नेताओं को निशाना बनाने की केंद्र सरकार की रणनीति का हिस्सा माना।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में सपा नेता ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है और सरकार लगातार विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने या गिरफ्तार करने की रणनीति अपना रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के साथ जाने पर ईडी की कार्रवाई रुक जाती है।
टैरिफ के मुद्दे पर, उन्होंने भारत सरकार की विदेश नीति की आलोचना करते हुए इसे एक बड़ी विफलता बताया है। इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सुझाव दिया कि सरकार को विपक्ष के नेताओं और विदेश नीति विशेषज्ञों के साथ बैठक कर आगे के लिए रणनीति तैयार करनी चाहिए।
उदयवीर सिंह ने कहा कि विदेश नीति की असफलता को स्वीकार करने में अब कोई संकोच नहीं होना चाहिए।
यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद के गठबंधन तोड़ने वाले बयान पर उन्होंने कहा कि भाजपा को उनके बयान पर विचार करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्होंने जनता से वादे किए थे, उनका क्या हुआ। सरकार में बने रहने की लालसा नहीं है, तो फिर वे सत्ता में क्यों बने हुए हैं? अगर कोई मजबूरी नहीं है, तो जनता कब तक इंतजार करेगी? उन्होंने भाजपा पर क्षेत्रीय दलों का उपयोग करने और फिर उन्हें छोड़ देने का आरोप लगाया। साथ ही, निषाद पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अपने राजनीतिक एजेंडे को छोड़कर सत्ता की लालसा में सरकार में शामिल हो जाते हैं।
सपा नेता ने बताया कि बिहार में वोटर अधिकार यात्रा में सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी शामिल होंगे। उनके कार्यक्रम को लेकर जल्द ही जानकारी दी जाएगी। अखिलेश यादव ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में भी भरोसा दिलाया था कि वह राहुल गांधी के नेतृत्व में हो रही वोटर अधिकार यात्रा में शामिल होंगे।
संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर उन्होंने कहा कि उनके बयान नीतिगत नहीं होते, बल्कि जनता के बीच झगड़ा करवाने का काम करते हैं और मंच से सौहार्दपूर्ण भाषण देकर निकल जाते हैं, जो उनकी दोहरी नीति को दर्शाता है।