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क्या युद्ध 10 मई को समाप्त नहीं हुआ था? जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर पर दी जानकारी

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क्या युद्ध 10 मई को समाप्त नहीं हुआ था? जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर पर दी जानकारी

सारांश

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नियंत्रण रेखा पर हुए महत्वपूर्ण ऑपरेशन 'ऑपरेशन सिंदूर' के बारे में बताया। क्या यह सच है कि युद्ध केवल 88 घंटों में समाप्त हुआ? जानें इस ऑपरेशन की अनकही कहानियाँ और इसके पीछे की गहरी रणनीतियाँ।

मुख्य बातें

ऑपरेशन सिंदूर का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में गहरे हमले करना था।
युद्ध 10 मई को समाप्त नहीं हुआ, बल्कि यह एक दीर्घकालिक प्रक्रिया थी।
भारतीय सेना की एकजुटता ने ऑपरेशन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह पुस्तक भारतीय सेना के साहस और पेशेवर रवैये को श्रद्धांजलि देती है।
कई महत्वपूर्ण निर्णय इस ऑपरेशन के दौरान लिए गए थे।

नई दिल्ली, 5 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) केजेएस ढिल्लों द्वारा लिखी गई पुस्तक 'ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान में भारत के गहरे हमलों की अनकही कहानी' का विमोचन किया।

यह पुस्तक इस साल की शुरुआत में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार भारत के निर्णायक और बहु-आयामी सैन्य अभियान की कहानी प्रस्तुत करती है। पुस्तक के विमोचन के दौरान जनरल द्विवेदी ने बताया कि यह अभियान केवल 88 घंटों तक सीमित नहीं था, जैसा कि सामान्यतः समझा जाता है।

उन्होंने कहा कि आप सोच रहे होंगे कि युद्ध 10 मई को खत्म हो गया। नहीं, यह काफी समय तक चला, क्योंकि कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने थे। कब शुरू करना है, कब रोकना है, समय, स्थान और संसाधनों का कितना उपयोग करना है-इन सभी मुद्दों पर लगातार चर्चा होती रही।

सेना प्रमुख ने बताया कि 22-23 अप्रैल को सेना ने दिग्गज सैनिकों के साथ मिलकर कई रणनीतिक विकल्पों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि मैंने 22-23 अगस्त को कई दिग्गजों से बात की। उन्होंने कई शानदार विचार दिए, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय हित के अनुसार व्यवस्थित करना आवश्यक था। हर कार्रवाई और हर सोचा-समझा निष्क्रियता का दीर्घकालिक प्रभाव होता है।

ऑपरेशन के दौरान एकजुटता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय सेना एक लयबद्ध लहर की तरह आगे बढ़ी। उन 88 घंटों में सभी लोग एकजुट थे और अपने आदेशों को अच्छी तरह जानते थे।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि यह पुस्तक सिर्फ एक सैन्य ऑपरेशन की कहानी नहीं है।

उन्होंने बताया कि यह केवल सैन्य कार्रवाई का विवरण नहीं है, बल्कि भारतीय सेना और देश के साहस, पेशेवर रवैये और अटल भावना को श्रद्धांजलि है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) की लड़ाइयों के महत्व को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि हम इस तरह के संघर्षों के इतने आदी हो गए हैं कि हम अक्सर इसकी अहमियत को समझ नहीं पाते—इसमें शामिल भावनाओं, नुकसान, उपलब्धियों और चुनौतियों को। जैसा कि आप जानते हैं, जब दूसरी तरफ से मरणोपरांत पुरस्कारों की सूची आई, तो मैं कह सकता हूं कि इसका अधिकांश श्रेय नियंत्रण रेखा (एलओसी) को जाता है।

यह पुस्तक ऑपरेशन सिंदूर के इन अनकहे पहलुओं को दर्ज करने की कोशिश करती है, ताकि इसकी सीख और भावना को भविष्य के लिए संरक्षित किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सिंदूर क्या था?
ऑपरेशन सिंदूर भारत के द्वारा पाकिस्तान में किए गए गहरे हमलों का एक सैन्य अभियान था, जिसकी कहानी इस पुस्तक में साझा की गई है।
क्या युद्ध केवल 88 घंटों में समाप्त हुआ?
नहीं, जनरल उपेंद्र द्विवेदी के अनुसार, युद्ध कई महत्वपूर्ण निर्णयों के कारण अधिक समय तक चला।
इस पुस्तक में क्या विशेष है?
यह पुस्तक ऑपरेशन सिंदूर के अनकहे पहलुओं और भारतीय सेना के साहस को दर्शाती है।
ऑपरेशन सिंदूर का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में गहरे हमलों के माध्यम से सैन्य रणनीति को लागू करना था।
राष्ट्र प्रेस
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