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लद्दाख में 100 निर्वाचन क्षेत्रों की अधिसूचना, उपराज्यपाल VK सक्सेना ने 8 पर्वतीय परिषदों को दी बड़ी शक्तियाँ

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लद्दाख में 100 निर्वाचन क्षेत्रों की अधिसूचना, उपराज्यपाल VK सक्सेना ने 8 पर्वतीय परिषदों को दी बड़ी शक्तियाँ

सारांश

लद्दाख में जमीनी लोकतंत्र की दिशा में बड़ा कदम — उपराज्यपाल VK सक्सेना ने 8 पर्वतीय परिषदों के लिए 100 निर्वाचन क्षेत्रों की अधिसूचना जारी की। पार्षदों की संख्या 52 से दोगुनी होकर 100 हुई और 2026 के जिला पुनर्गठन के बाद सभी 6 नए जिलों को पूर्ण परिषद अधिकार मिले।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने 21 अक्टूबर 2026 को 8 लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के लिए 100 निर्वाचन क्षेत्रों की अधिसूचना जारी की।
निर्वाचित पार्षदों की संख्या पहले की 52 से बढ़कर 100 हो गई है — लगभग दोगुनी।
परिषदवार सीटें: लेह 22, कारगिल 21, सांकू 13, चांगथांग 10, नुब्रा/शाम/ज़ांस्कर 9-9, द्रास 7 ।
2026 के जिला पुनर्गठन के बाद शाम, नुब्रा, चांगथांग, ज़ांस्कर, द्रास और सांकू को पहली बार पूर्ण परिषद शक्तियाँ मिलीं।
परिषदों को भूमि आवंटन, निधि प्रबंधन, स्थानीय कर और जिला कैडर भर्ती के अधिकार प्राप्त होंगे।

उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने 21 अक्टूबर 2026 को लद्दाख की आठ स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के लिए 100 निर्वाचन क्षेत्रों की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी — यह कदम लद्दाख के जमीनी लोकतंत्र के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। एलएएचडीसी (संशोधन) विनियमन, 2026 के तहत आए इस फ़ैसले से निर्वाचित पार्षदों की संख्या पहले की 52 से बढ़कर लगभग दोगुनी होकर 100 हो गई है।

मुख्य घटनाक्रम

उपराज्यपाल सक्सेना ने एक्स पर पोस्ट कर इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने लिखा: 'लद्दाख में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि!' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आवंटन पंचायत हलकों और नगर निगम वार्डों को आधार इकाई मानकर तैयार किया गया है, जिसमें मतदाता संख्या और भौगोलिक क्षेत्र दोनों को उचित महत्व दिया गया है।

परिषदवार सीटों का आवंटन इस प्रकार है — लेह: 22, कारगिल: 21, सांकू: 13, चांगथांग: 10, नुब्रा, शाम और ज़ांस्कर: 9-9, तथा द्रास: 7।

ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि इससे पहले निर्वाचित पर्वतीय परिषदें केवल लेह और कारगिल जिलों तक ही सीमित थीं। 2026 में लद्दाख के जिला पुनर्गठन के बाद छह नए जिले — शाम, नुब्रा, चांगथांग, ज़ांस्कर, द्रास और सांकू — अस्तित्व में आए। नई अधिसूचना इन सभी नवगठित जिलों को पूर्ण परिषद शक्तियाँ प्रदान करती है।

यह ऐसे समय में आया है जब लद्दाख में राज्य के दर्जे की माँग वर्षों से लंबित है और स्थानीय निवासी प्रशासनिक स्वायत्तता के लिए आवाज़ उठाते रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में यह अधिसूचना स्थानीय प्रतिनिधित्व को सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

परिषदों को मिलने वाले अधिकार

लद्दाख प्रशासन के अनुसार, आठों परिषदों को जिला स्तर पर व्यापक अधिकार प्राप्त होंगे। इनमें भूमि आवंटन, समर्पित परिषद निधि का प्रबंधन, स्थानीय कर लगाने और जिला कैडर में भर्ती को विनियमित करने का अधिकार शामिल है।

प्रशासन का कहना है कि निर्वाचन क्षेत्रों का युक्तिकरण भौगोलिक क्षेत्र और जनसंख्या घनत्व के आधार पर किया गया है, जिससे दूरदराज के इलाकों को भी उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा।

आम जनता पर असर

सीटों की संख्या दोगुनी होने से स्थानीय राजनीतिक भागीदारी में व्यापक विस्तार होगा। उपराज्यपाल के अनुसार इससे 'लद्दाख के हर कोने में समावेशी शासन' सुनिश्चित होगा। पहाड़ी और सुदूर क्षेत्रों के मतदाताओं को पहली बार अपने जिले में ही निर्वाचित प्रतिनिधि मिलेंगे, जो स्थानीय विकास और संसाधन आवंटन में सीधी भूमिका निभाएँगे।

क्या होगा आगे

अधिसूचना जारी होने के बाद अब चुनाव आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की प्रतीक्षा है। नई परिषदें गठित होने के बाद लद्दाख में स्थानीय शासन का ढाँचा पूरी तरह बदल जाएगा। राजनीतिक दलों और स्थानीय संगठनों की नज़र अब इस बात पर है कि निर्वाचन प्रक्रिया कब और कैसे शुरू होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन परिषदों के पास वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता कितनी व्यावहारिक होगी — खासकर तब, जब लद्दाख अभी भी बिना विधानमंडल के एक केंद्र शासित प्रदेश है। पर्वतीय परिषदों को जिला स्तर पर शक्तियाँ देना प्रशंसनीय है, परंतु राज्य के दर्जे की माँग करने वाले स्थानीय समूहों के लिए यह पर्याप्त नहीं। यह अधिसूचना स्थानीय प्रशासन में सुधार की दिशा में एक कदम ज़रूर है, लेकिन लद्दाख की राजनीतिक स्वायत्तता की बड़ी माँग का जवाब नहीं।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लद्दाख में 100 निर्वाचन क्षेत्रों की अधिसूचना क्या है?
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने 21 अक्टूबर 2026 को एलएएचडीसी (संशोधन) विनियमन, 2026 के तहत लद्दाख की आठ स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के लिए 100 निर्वाचन क्षेत्रों की आधिकारिक अधिसूचना जारी की। इससे निर्वाचित पार्षदों की संख्या 52 से बढ़कर 100 हो गई है।
लद्दाख की आठ परिषदों में सीटें कैसे बाँटी गई हैं?
लेह को 22, कारगिल को 21, सांकू को 13, चांगथांग को 10, नुब्रा, शाम और ज़ांस्कर को 9-9 तथा द्रास को 7 सीटें आवंटित की गई हैं। यह वितरण पंचायत हलकों, नगर निगम वार्डों, मतदाता संख्या और भौगोलिक क्षेत्र को ध्यान में रखकर किया गया है।
इस अधिसूचना से पहले लद्दाख में परिषदों की स्थिति क्या थी?
इससे पहले निर्वाचित पर्वतीय परिषदें केवल लेह और कारगिल जिलों तक सीमित थीं। 2026 के जिला पुनर्गठन के बाद छह नए जिले — शाम, नुब्रा, चांगथांग, ज़ांस्कर, द्रास और सांकू — अस्तित्व में आए, जिन्हें अब पूर्ण परिषद शक्तियाँ मिली हैं।
नई पर्वतीय परिषदों के पास क्या अधिकार होंगे?
लद्दाख प्रशासन के अनुसार, प्रत्येक परिषद को जिला स्तर पर भूमि आवंटन, समर्पित परिषद निधि का प्रबंधन, स्थानीय कर लगाने और जिला कैडर में भर्ती को विनियमित करने का अधिकार होगा।
लद्दाख में अब आगे क्या होगा?
अधिसूचना जारी होने के बाद अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का इंतज़ार है। नई परिषदें गठित होने के बाद लद्दाख के सभी आठ जिलों में निर्वाचित स्थानीय प्रतिनिधि सीधे विकास और प्रशासनिक निर्णयों में भागीदारी कर सकेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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