क्या मौलाना महमूद मदनी का बयान निंदनीय है? जिहाद का अर्थ समाज या देश के खिलाफ लड़ाई नहीं है: मौलाना अबरार जमाल
सारांश
Key Takeaways
- जिहाद का असली अर्थ बुराइयों के खिलाफ संघर्ष है।
- मौलाना कारी अबरार जमाल ने एकता और सुधार पर जोर दिया है।
- ऐसे बयानों से समाज में विभाजन हो सकता है।
- हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का इतिहास हमेशा सकारात्मक रहा है।
- आतंकवाद के खिलाफ सख्त फतवा जारी करने की आवश्यकता है।
सहारनपुर, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। मौलाना महमूद मदनी द्वारा जिहाद के संदर्भ में हाल में दिया गया बयान मुस्लिम संगठनों में तीव्र प्रतिक्रिया का कारण बन गया है। जमीयत हिमायतुल इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना कारी अबरार जमाल ने मदनी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जिहाद का असली अर्थ समझना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जिहाद का अर्थ किसी समाज या देश के खिलाफ लड़ाई नहीं, बल्कि बुराईयों के खिलाफ संघर्ष, सुधार और अच्छे कार्यों को प्रोत्साहित करना है।
कारी अबरार जमाल ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यदि मौलाना महमूद मदनी अपने समुदाय में मौजूद समस्याओं और उन लोगों के खिलाफ जिहाद की बात करते हैं जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं, तो इससे सकारात्मक संदेश जाता।
उन्होंने कहा कि यदि वह आतंकवादियों के खिलाफ जिहाद का फतवा जारी करते, तो यह समाज के लिए प्रेरणादायक होता।
मदनी से संबंधित बयान को उन्होंने दुखद बताया और कहा कि हिंदू समुदाय हमेशा मुसलमानों के साथ खड़ा रहा है, चाहे त्योहार हों या कठिन समय।
उन्होंने 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय हिंदू समाज ने मुसलमानों से कहा था कि यही आपका मुल्क है। इस संदर्भ में हिंदुओं के खिलाफ जिहाद की बात करना व्यर्थ है।
कारी अबरार जमाल ने कहा कि ऐसे बयान देश के माहौल को बिगाड़ते हैं और भारत की प्रगति के लिए ठीक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया गया है। ऐसे समय में जिहाद और आतंकवाद के शब्दों का बढ़ावा देना समाज को गलत दिशा में ले जा सकता है।
उन्होंने मौलाना महमूद मदनी से अपील की कि वे मुसलमानों को राष्ट्रवाद और एकता का संदेश दें, न कि समाज में विभाजन पैदा करने वाले विचार। उलेमा को आतंकवाद के खिलाफ सख्त फतवा जारी करना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति आतंकवादी गतिविधियों में पकड़ा जाता है, तो हम उसका जनाजा नहीं पढ़ेंगे।