क्या वाइस एडमिरल संजय साधु बने युद्धपोत उत्पादन के नए नियंत्रक?
सारांश
Key Takeaways
- वाइस एडमिरल संजय साधु ने युद्धपोत उत्पादन के नए नियंत्रक का पदभार ग्रहण किया।
- उन्हें अशोक पंडित ने बधाई दी।
- यह पद भारतीय नौसेना के लिए महत्वपूर्ण है।
- संजय साधु का करियर 38 वर्षों का है।
- उन्होंने कई प्रमुख युद्धपोत परियोजनाओं में कार्य किया है।
मुंबई, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय नौसेना के अधिकारी वाइस एडमिरल संजय साधु ने रविवार को औपचारिक रूप से युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण नियंत्रक का पद संभाला। इस अवसर पर फिल्म निर्माता और इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर यूनियन के अध्यक्ष अशोक पंडित ने उन्हें बधाई दी।
यह भारतीय नौसेना के लिए महत्वपूर्ण पदों में से एक है, क्योंकि इसी विभाग के अंतर्गत देश में बनने वाले सभी युद्धपोत, पनडुब्बी और हथियारबंद जहाजों का निर्माण और खरीद का कार्य होता है।
इस अवसर पर अशोक पंडित गर्वित और उत्साहित दिखे। उन्होंने संजय साधु को बधाई देने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया।
अपनी खुशी को इंस्टाग्राम पर साझा करते हुए उन्होंने संजय साधु की तस्वीर भी पोस्ट की और लिखा, “वाइस एडमिरल संजय साधु को बहुत-बहुत बधाई। आपको और हमारे बहादुर सैनिकों को और ताकत मिले। यह हमारे परिवार के लिए एक अद्भुत पल है। वंदे मातरम। भारत माता की जय। जय हिंद।”
वाइस एडमिरल संजय साधु इससे पहले नौसेना के उप प्रमुख के पद पर कार्यरत थे। अब वे स्वदेशी युद्धपोत कार्यक्रम को गति देने के साथ-साथ आने वाले प्रोजेक्ट और एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे प्रोजेक्ट्स की देखरेख करेंगे।
वाइस एडमिरल संजय जसजीत साधु 1987 में भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे। वे मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एमटेक और रक्षा अध्ययन में एमफिल हैं। 38 वर्षों के शानदार करियर में उन्होंने आईएनएस विराट, आईएनएस ब्रह्मपुत्र जैसे युद्धपोतों पर कार्य किया। रूस से आए विक्रमादित्य विमानवाहक पोत को लाने और तैयार करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उन्होंने मुंबई, विशाखापत्तनम और कारवार के नौसेना डॉकयार्ड संभाले, पनडुब्बी डिजाइन में भी योगदान दिया और पूर्वी-पश्चिमी दोनों नौसेना कमानों में तकनीकी प्रमुख रहे। इतना सम्मान बहुत कम अधिकारियों को मिलता है। राष्ट्रपति उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक और नौसेना पदक से सम्मानित कर चुके हैं।