क्या पंचकूला में बड़ा साइबर फ्रॉड रैकेट बेनकाब हुआ?
सारांश
Key Takeaways
- साइबर फ्रॉड के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।
- नकली कॉल सेंटर के जरिए ठगी की जा रही है।
- ईडी ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया।
- हवाला नेटवर्क का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा रहा है।
- अमेरिकी नागरिकों को तकनीकी सहायता के नाम पर ठगा जा रहा है।
पंचकूला, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा के पंचकूला में एक बड़े साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में ईडी ने पंचकूला के आईटी पार्क, सेक्टर-22 में स्थित एक गलत टेक्निकल-सपोर्ट कॉल सेंटर के मालिक महेश चंद्रशेखर शेट्ये को गिरफ्तार किया है।
यह गिरफ्तारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। महेश पर आरोप है कि वह हवाला नेटवर्क के जरिए अपराध से अर्जित कमाई (पीओसी) को भारत लाकर उसे विभिन्न खातों में डालकर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल था।
गिरफ्तारी के बाद महेश शेट्ये को उसी दिन पंचकूला की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को 7 दिनों की ईडी कस्टडी में भेज दिया है।
ईडी ने अपनी कार्रवाई साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, पंचकूला और चंडीमंदिर थाना में दर्ज तीन मामलों की जांच के बाद शुरू की। शिकायतों में आरोप था कि आरोपी और उसके साथी आईटी पार्क में बिना किसी वैध अनुमति के कॉल सेंटर संचालित कर अमेरिकी नागरिकों से ठगी कर रहे थे।
जांच में सामने आया कि आरोपी नेटफ्लिक्स, अमेजन, स्पेक्ट्रम, एटीएंडटी जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर झूठे टेक्निकल-सपोर्ट कॉल करते थे। वीओआईपी डायलर और रिमोट-एक्सेस टूल के माध्यम से यूएस नागरिकों को यह डराया जाता था कि उनके सिस्टम में तकनीकी समस्या है। इसके बाद उनसे 100 से 5,000 अमेरिकी डॉलर तक की ठगी की जाती थी।
ईडी के मुताबिक, ठगी की गई राशि को जेल्ल, रेमिटली, बिटकॉइन और कैश ऐप गिफ्ट कार्ड जैसे माध्यमों से वसूला जाता था और इसके बाद हवाला चैनलों के जरिए भारत ट्रांसफर किया जाता था।
जांच में महेश शेट्ये के साथ सुरभि दुहन, ऋषभ दुहन और राहुल छूकर की भूमिका भी सामने आई। कॉल सेंटर के कर्मचारियों ने भी महेश शेट्ये को मुख्य संचालक के तौर पर पहचाना है।
ईडी ने जांच में पाया कि यूएस से कमाए गए पीओसी को हवाला के जरिए कैश में भारत लाया गया। यह राशि पहले महेश शेट्ये के व्यक्तिगत खाते और उसकी फर्म एमएसी एंड क्रिस इंटरप्राइजेज के खाते में जमा की गई। इसके बाद उसकी मां शालिनी के बैंक खाते में फंड को जमा किया गया। बाद में इसी गैर-कानूनी कमाई का इस्तेमाल प्रॉपर्टी, कार और व्यक्तिगत खर्चों के लिए किया गया।