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क्या तिरंगे की रोशनी से जगमगाया महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर?

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क्या तिरंगे की रोशनी से जगमगाया महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर?

सारांश

गणतंत्र दिवस पर उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को तिरंगे की रोशनी से सजाया गया। ओम का प्रकाश चिन्ह श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बना। भस्म आरती में बाबा का तिरंगा तिलक ने भक्तों को मंत्रमुग्ध किया। जानिए इस धार्मिक अनुष्ठान का महत्व और डॉ. नारायण व्यास की पद्मश्री घोषणा का जश्न।

मुख्य बातें

गणतंत्र दिवस पर महाकालेश्वर मंदिर की विशेष सजावट।
ओम का प्रकाश चिन्ह श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र।
भस्म आरती का धार्मिक महत्व।
नारायण व्यास की पद्मश्री की घोषणा।
महिलाओं के लिए भस्म आरती में दर्शन का विशेष नियम।

उज्जैन, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभर में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस खास मौके पर उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को भव्यता से सजाया गया है।

श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को तिरंगे की रोशनी से सजाया गया है। रात के समय मंदिर का शिखर केसरिया, सफेद और हरे रंग की लाइटों से जगमगाता रहा। यह सजावट राष्ट्रध्वज का प्रतीक है। शिखर पर बने ओम का प्रकाश चिन्ह श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना।

इसके साथ ही, प्रातःकाल होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया गया। विशेष पर्व के उपलक्ष्य में बाबा का भव्य और आकर्षक शृंगार किया गया, जिसमें सबसे खास रहा उनके मस्तक पर सुशोभित तिरंगा तिलक

राष्ट्रभक्ति के रंगों में रंगे बाबा के इस स्वरूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भस्म आरती के पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा महाआरती संपन्न की गई। इस दिव्य दर्शन से पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ और ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से गूंज उठा।

श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भस्म आरती का विशेष धार्मिक और पौराणिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल निराकार स्वरूप में होते हैं, इसलिए महिलाएं इस आरती में शामिल नहीं होती हैं। महिलाएं सिर पर घूंघट या ओढ़नी डालकर ही दर्शन करती हैं।

इस परंपरा का मंदिर में सख्ती से पालन किया जाता है।

उज्जैन के निवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई, जब पद्मश्री-2026 की घोषणा में शहर के वरिष्ठ पुरातत्वविद् (आर्कियोलॉजिस्ट) डॉ. नारायण व्यास का नाम शामिल किया गया। डॉ. नारायण व्यास ने उज्जैन ही नहीं, बल्कि पूरे मालवा अंचल की प्राचीन विरासत को देश और दुनिया के सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके शोध कार्यों के माध्यम से कई ऐतिहासिक स्थलों की पहचान को नई दिशा मिली है, वहीं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और उनके महत्व को लेकर समाज में जागरूकता भी बढ़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह इस शहर की सांस्कृतिक धरोहर को भी दर्शाता है। गणतंत्र दिवस पर इस मंदिर की सजावट ने श्रद्धालुओं को एकजुट किया है और हमारी सांस्कृतिक विविधता को उजागर किया है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का क्या महत्व है?
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर हिंदू धार्मिक मान्यता में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे भगवान शिव का एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग माना जाता है।
भस्म आरती क्यों की जाती है?
भस्म आरती का धार्मिक और पौराणिक महत्व है। इसे भगवान महाकाल के निराकार स्वरूप में पूजा जाता है।
तिरंगे की सजावट का क्या अर्थ है?
तिरंगे की सजावट देश की एकता और अखंडता का प्रतीक है, जो राष्ट्रभक्ति को दर्शाती है।
डॉ. नारायण व्यास को पद्मश्री क्यों मिला?
उज्जैन और मालवा क्षेत्र की प्राचीन विरासत को उजागर करने के लिए डॉ. नारायण व्यास को यह सम्मान मिला है।
महिलाएं भस्म आरती में क्यों नहीं जातीं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल निराकार स्वरूप में होते हैं, इसलिए महिलाएं इसमें शामिल नहीं होतीं।
राष्ट्र प्रेस
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