महिला आरक्षण विधेयक से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को मिलेगा नया आयाम: सोनिया नित्यानंद
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी।
- यह विधेयक 27 वर्षों के इंतजार के बाद आया है।
- प्रधानमंत्री मोदी की पहल महिला सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण है।
- इस विधेयक का प्रभाव चुनावों से पहले लागू होने पर होगा।
- महिलाओं की समस्याएँ अब अधिक स्पष्टता से सामने आएँगी।
लखनऊ, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पद्म श्री से सम्मानित केजीएमयू की उपाध्यक्ष सोनिया नित्यानंद ने महिला आरक्षण विधेयक पर अपनी राय रखते हुए कहा कि भारत की राजनीतिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। यह एक बहुत ही अभूतपूर्व पहल है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए की गई है।
उन्होंने बताया कि इस विधेयक से महिलाओं की प्रत्यक्ष और सक्रिय भूमिका होगी, और 27 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद देश की महिलाओं को यह अधिकार मिल रहा है। एक महिला के रूप में, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार को दिल से धन्यवाद देती हूं।
महिला आरक्षण बिल पर सामाजिक कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट की वकील फराह फैज ने कहा कि यह मोदी सरकार का एक स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि इसे चुनावों के बाद लागू किया गया, तो इसका कोई लाभ नहीं होगा। यह तभी प्रभावी होगा जब इसे चुनावों से पहले घोषित किया जाए।
फराह ने कहा कि यह विधेयक उन महिलाओं के लिए फायदेमंद होगा जो अपनी समस्याओं को व्यक्त नहीं कर पाती थीं। अगर यह कानून पास हो जाता है, तो इसका चुनावों में लाभ मिलेगा।
महिला आरक्षण विधेयक पर नगर निगम पार्षद गुरबख्श रावत ने कहा कि केंद्र सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि राजनीति में आने के लिए महिलाओं को आरक्षण मिलेगा, जिससे कई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
महिला आरक्षण बिल पर लक्ष्मी नगर की पार्षद अलका राघव ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करती हूं, क्योंकि उनके कार्यकाल में महिलाओं का सशक्तिकरण किसी भी पिछली सरकार की तुलना में अधिक हुआ है। यह केवल एक नीतिगत फैसला नहीं है, बल्कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।