महिला आरक्षण बिल: बिहार से पंजाब तक महिला नेताओं का ऐतिहासिक समर्थन

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महिला आरक्षण बिल: बिहार से पंजाब तक महिला नेताओं का ऐतिहासिक समर्थन

सारांश

महिला आरक्षण बिल को लेकर देशभर में महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। बिहार से लेकर पंजाब तक महिला नेताओं ने इस पहल का स्वागत किया है। जानिए उनके विचार और इस बिल का महत्व।

Key Takeaways

  • महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना है।
  • विभिन्न राज्यों की महिला नेताओं ने इस बिल का समर्थन किया है।
  • यह कदम महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण है।
  • महिला आरक्षण में वृद्धि एक स्वागत योग्य निर्णय है।
  • महिलाओं की भागीदारी से नीतियों और शासन पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देशभर में महिला आरक्षण बिल को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। बिहार से लेकर जम्मू-कश्मीर, पंजाब, झारखंड, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश तक, महिला नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।

बिहार के बेतिया से मेयर गरिमा देवी सिकारिया ने इस बिल का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने राष्ट्र प्रेस से कहा कि 2029 के चुनाव से पहले इस बिल को पास करने की कोशिश सराहनीय है और उन्होंने इसका पूरा समर्थन किया।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह ने भी प्रधानमंत्री की सोच और महिलाओं के प्रति सम्मान की सराहना की। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी में अब नई कमेटी में कम से कम सात महिलाओं को शामिल करने का प्रावधान रखा गया है।

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा की सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता सबीहा भट ने कहा कि यदि महिलाओं के लिए सीटों की संख्या बढ़ती है, तो यह महिलाओं के लिए एक सकारात्मक कदम होगा। उनके अनुसार, महिला आरक्षण में वृद्धि एक स्वागत योग्य निर्णय है।

झारखंड के चाईबासा से 'सृजन महिला विकास मंच' की सचिव नरगिस खातून ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 2029 को ध्यान में रखते हुए लिया गया यह निर्णय बहुत मजबूत और प्रशंसनीय है।

जम्मू-कश्मीर के बारामुला से जेकेएनसी की महिला विंग की जिला अध्यक्ष और बार एसोसिएशन की अध्यक्ष नीलोफर मसूद ने जानकारी दी कि महिला आरक्षण बिल पहले ही 2023 में पारित हो चुका था। उन्होंने बताया कि 2 अप्रैल

पंजाब के पटियाला से अकादमी लेक्चरर नेहा ने इस कदम को महिलाओं को सशक्त बनाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि 'नारी शक्ति' का नारा अब और मजबूती से आगे बढ़ेगा। वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर हरलीन कौर ने इसे भारत के लोकतंत्र को अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्व वाला बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उनके अनुसार इससे महिलाओं की भागीदारी निर्णय लेने की प्रक्रिया में बढ़ेगी, जिससे शासन और नीतियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

पटियाला की उद्यमी मोनिका राजपूत कथूरिया ने कहा कि लंबे समय से संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग की जा रही थी। यह महिलाओं के लिए खुशी की बात है कि सरकार ने इतना बड़ा निर्णय लिया।

छत्तीसगढ़ के बस्तर से सामाजिक कार्यकर्ता राधा राव ने भी इसे एक सकारात्मक और स्वागत योग्य पहल बताया और कहा कि इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से वकील एम. कमला कुमारी ने कहा कि महिलाओं का समाज में योगदान हमेशा से रहा है, लेकिन संसद में उनका प्रतिनिधित्व कम रहा है। ऐसे में यह कदम बेहद जरूरी और ऐतिहासिक है।

हालांकि, इस मुद्दे पर एक अलग आवाज भी सामने आई है। आंध्र प्रदेश के अमरावती में ट्रांसजेंडर कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर महिला आरक्षण बिल में अपने लिए समान अधिकार और शामिल किए जाने की मांग की है।

Point of View

NationPress
12/04/2026

Frequently Asked Questions

महिला आरक्षण बिल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
महिला आरक्षण बिल का मुख्य उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों की संख्या बढ़ाना है।
इस बिल का समर्थन किन नेताओं ने किया है?
बिहार, पंजाब, झारखंड, और अन्य राज्यों की महिला नेताओं ने इस बिल का समर्थन किया है।
महिला आरक्षण की आवश्यकता क्यों है?
महिला आरक्षण की आवश्यकता इसलिए है ताकि महिलाओं की भागीदारी राजनीतिक निर्णय लेने में बढ़ सके।
महिला आरक्षण बिल कब पारित हुआ था?
महिला आरक्षण बिल पहले ही 2023 में पारित हो चुका था।
महिला आरक्षण का क्या महत्व है?
महिला आरक्षण का महत्व इस बात में है कि यह महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सशक्त बनाता है।
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