डॉ. विजयलक्ष्मी देशमाने ने महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी के साहसिक निर्णय की सराहना की
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक का पारित होना एक ऐतिहासिक कदम है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने साहसिक निर्णय लिया है।
- महिलाओं से राजनीति में सक्रिय भागीदारी की अपील।
- 27 वर्षों के बाद विधेयक पारित होने की कगार पर है।
- महिला नेतृत्व को मजबूती देने का अवसर।
बेंगलुरु, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा करते हुए पद्मश्री डॉ. विजयलक्ष्मी देशमाने ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से कहा कि मैं अपनी बात एक सुंदर नारे से शुरू करना चाहूंगी, 'मोदी हैं तो सब संभव है।'
उन्होंने आगे कहा कि यह एक ऐसा विधेयक था जो लंबे समय से लम्बित था। प्रधानमंत्री मोदी और उनकी कैबिनेट ने संसद में इस बिल को लेकर एक साहसिक निर्णय लिया है। अब यह देश की महिलाओं पर निर्भर करता है कि वे राजनीति में जिम्मेदारी उठाएं और इस प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाएं।
डॉ. देशमाने ने युवा और ऊर्जावान महिलाओं से अपील की कि वे राजनीति में कदम रखें और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। इस तरह हम अपने प्रधानमंत्री को जवाब दे सकते हैं, जो 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' में विश्वास रखते हैं। इसलिए मैं केंद्र सरकार और विशेष रूप से पीएम मोदी का धन्यवाद करती हूं।
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान अद्भुत कार्य किए हैं, इसलिए अब यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम आगे आएं और राष्ट्र का नेतृत्व करें। यह एक सुनहरा अवसर है। मेरा विश्वास है कि हमें मिलकर काम करना होगा और 'राष्ट्र-प्रथम' के मुद्दे के साथ आगे बढ़ना होगा।
महिला आरक्षण विधेयक के संदर्भ में देश भर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। शिवसेना की नेता शाइना एनसी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बिना किसी देरी के 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का समर्थन किया है। केंद्रीय कैबिनेट का यह फैसला और संसद में होने वाली चर्चा में सभी राजनीतिक दलों को अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी चाहिए।
अभिनेत्री प्रीति झंगियानी ने कहा कि अंततः महिला आरक्षण विधेयक पास होने वाला है। मुझे लगता है कि इसके लिए सभी ने 27 से अधिक वर्षों का लंबा इंतजार किया है, क्योंकि यह विधेयक पहली बार 1996 में प्रस्तुत किया गया था। यह एक राजनीतिक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक कदम भी है।