मनोज विश्वास ने बिहार में नीतीश कुमार के कार्यों की सराहना की
सारांश
Key Takeaways
- नीतीश कुमार ने सभी जातियों और धर्मों को एक साथ लेकर चलने का प्रयास किया है।
- राज्यसभा में उनकी भूमिका को लेकर चिंताएं हैं।
- महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए मनोज विश्वास ने इसे 50%25 करने की मांग की है।
पटना, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 20 साल के कार्यकाल की सराहना करते हुए कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास ने कहा कि उन्होंने सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है।
पटना में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे सभी जातियों और धर्मों को साथ लेकर चलते हैं। उन्होंने कभी भी किसी एक जाति विशेष पर राजनीति नहीं की।
उन्होंने आगे कहा कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद अब लोगों में यह चिंता है कि कुछ जातियों को निशाना बनाया जा सकता है। नए सीएम के कार्यकाल में हम देखेंगे कि क्या होता है।
कांग्रेस विधायक ने कहा कि अब तक राज्यसभा में सदस्य के तौर पर शपथ लेने के संबंध में नीतीश कुमार का कोई बयान नहीं आया है। मुझे लगता है कि कुछ न कुछ दबाव की राजनीति चल रही है, और नीतीश कुमार को समझना सभी के लिए आसान नहीं है। यदि उन्होंने राज्यसभा में जाने का निर्णय ले लिया है, तो आगे क्या होगा, यह देखना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में नीतीश कुमार का कार्यकाल बहुत शानदार रहा है, विशेष रूप से 2005 से 2010 तक। इस कार्यकाल को उन्होंने सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया। सीएम ने हर क्षेत्र में कार्य किया है।
नेपाल के प्रधानमंत्री का उल्लेख करते हुए कांग्रेस विधायक ने कहा कि नेपाल एक छोटा देश है और वह अन्य देशों पर निर्भर रहता है। नेपाल के प्रधानमंत्री ने प्राइवेट शिक्षण संस्थानों को बंद करने का निर्णय लिया है। यह हमारे देश के नेताओं को सीखने की जरूरत है। उन्होंने एक अच्छी पहल की है। सोशल मीडिया पर आपने देखा होगा कि हमारे यहां प्राइवेट स्कूलों के रवैये से अभिभावक चिंतित हैं। फीस लगातार बढ़ रही है और किताबें मनमानी कीमतों पर बेची जा रही हैं। इस पर कोई ठोस पहल होनी चाहिए।
महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस विधायक ने कहा कि यह सत्य है कि बिहार में आरक्षण बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आरक्षण नहीं होता, तो आज हम जैसे लोग यहां तक नहीं पहुंच पाते। हम ओबीसी समाज से आते हैं। उसी तरह महिलाओं का भी आरक्षण होना अत्यंत आवश्यक है। जब तक आरक्षण नहीं होगा, तब तक सबसे निचले पायदान पर रहने वाले लोगों की हिस्सेदारी सुनिश्चित नहीं हो सकेगी। यह एक सकारात्मक पहल है, लेकिन हम चाहेंगे कि 33 फीसदी की बात की जा रही है, उसे 50 फीसदी किया जाए।