क्या मेघालय सरकार बजट सत्र में नौकरी आरक्षण रिपोर्ट पेश करेगी?
सारांश
Key Takeaways
- रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जाएगी।
- मुख्यमंत्री ने इसकी संवेदनशीलता पर जोर दिया।
- राज्यपाल से बजट सत्र बुलाने का अनुरोध किया गया है।
- शिक्षक भर्ती से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
- सुधारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।
शिलांग, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मेघालय कैबिनेट ने शुक्रवार को निर्णय लिया है कि राज्य नौकरी आरक्षण नीति, 1972 से संबंधित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को विधान सभा के आगामी बजट सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।
कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने मीडिया को बताया कि रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई है। कैबिनेट इस बात पर सहमत है कि इस रिपोर्ट को चर्चा और विचार के लिए विधानसभा में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार ने बजट सत्र बुलाने के लिए पहले ही राज्यपाल से अनुरोध किया है। मंजूरी मिलने के बाद सत्र की अंतिम तिथियाँ तय की जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा में पेश किए जाने से पहले रिपोर्ट की जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह रिपोर्ट काफी व्यापक और संवेदनशील है, इसलिए विधायकों को इस पर गंभीरता से विचार और चर्चा करनी चाहिए। इससे पहले मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा था कि अधिकारियों ने इस रिपोर्ट की अच्छी तरह से जांच की है और यह विधानसभा में प्रस्तुत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने 2008-09 में लोअर प्राइमरी शिक्षक भर्ती में हुई कथित अनियमितताओं से संबंधित आपराधिक मामलों के समाप्त होने के बाद, तथाकथित “व्हाइट इंक स्कैम” में आरोपित शिक्षकों के लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे पर भी बात की।
संगमा ने बताया कि आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं। राज्य सरकार इस पर विचार कर रही है। उन्होंने मुख्य सचिव को सभी उपलब्ध कानूनी और प्रशासनिक विकल्पों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार कोई भी कार्रवाई पूरी तरह से अदालत के निर्देशों के अनुसार करेगी।
पहले कोर्ट के आदेश पर की गई समीक्षा का उल्लेख करते हुए संगमा ने बताया कि पहले चरण में करीब 140 शिक्षकों को बहाल किया गया था। इसके बाद चार से पांच अन्य शिक्षकों को भी बहाल किया गया, क्योंकि वे सीधे तौर पर इस मामले में शामिल नहीं पाए गए थे।
उन्होंने कहा कि सरकार ने एक बार फिर मेघालय हाई कोर्ट से नई समीक्षा करने की अनुमति मांगी है। पिछले साल हाई कोर्ट ने पूर्व शिक्षा मंत्री एम्परीन लिंगदोह और अन्य के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया था। इसके बावजूद कई शिक्षकों पर अब भी दाग लगा हुआ माना जा रहा है।
इस मुद्दे को लेकर हिन्यूट्रप यूथ्स काउंसिल जैसे संगठनों ने प्रभावित शिक्षकों के पुनर्वास की मांग की है। मुख्यमंत्री ने सुधारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार उन मामलों पर विशेष ध्यान देगी जिनमें शिक्षकों को गलत तरीके से नुकसान पहुँचा है।