क्या मुजफ्फरपुर में एआईडीईओ ने बेरोजगारी और पेपर लीक के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया?

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क्या मुजफ्फरपुर में एआईडीईओ ने बेरोजगारी और पेपर लीक के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया?

सारांश

मुजफ्फरपुर में एआईडीईओए ने बेरोजगारी और पेपर लीक के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया। क्या यह अभियान सरकार के ध्यान को आकर्षित करेगा?

Key Takeaways

  • बेरोजगारी की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
  • परीक्षा प्रश्नपत्र लीक एक गंभीर मुद्दा है।
  • सरकारी पदों को जल्द भरने की आवश्यकता है।
  • गिग वर्कर्स को सुरक्षा और वेतन की जरूरत है।
  • भ्रष्टाचार और निजीकरण का विरोध किया जा रहा है।

मुजफ्फरपुर, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ऑल इंडिया डिप्लोमा इंजीनियर्स एंड ऑफिशियल एसोसिएशन (एआईडीईओए) ने बेरोजगारी, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कदम उठाने के लिए मुजफ्फरपुर शहर में हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा जाएगा।

एआईडीईओए की अखिल भारतीय समिति के सदस्य अरविंद कुमार ने कहा कि देश में बेरोजगारी की समस्या भयानक रूप ले चुकी है। केंद्र सरकार के 78 मंत्रालयों और विभागों में लगभग पौने 10 लाख से ज्यादा पद खाली हैं, और यही स्थिति देश के अनेक राज्यों में भी है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार, पेपर लीक, कर्मचारियों की छंटनी और सरकारी विभागों का निजीकरण हालात को और खराब कर रहा है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में युवाओं को हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था।

देश की बढ़ती जरूरतों के अनुसार, हर व्यक्ति को उसकी योग्यता के अनुसार काम दिया जाना चाहिए। हमारे पास पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन इसके अभाव में भयानक आर्थिक तंगी के कारण युवाओं में मानसिक अवसाद, पारिवारिक रिश्तों में कड़वाहट, और नशे और अपराध की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।

हर साल हजारों युवा अपनी जान गंवा रहे हैं। जैसे कि 2023 में देशभर में 14,234 युवाओं ने आत्महत्या कर ली। मुजफ्फरपुर के मोतीझील ओवरब्रिज पर हस्ताक्षर अभियान चलाकर युवाओं की शक्ति को बर्बाद होने से बचाने की कोशिश की जा रही है।

इनकी पहली मांग है कि केंद्र और राज्य के अधीन खाली पदों को तुरंत भरा जाए और नए रोजगार सृजित किए जाएं। दूसरी मांग है कि परीक्षा की सभी जिम्मेदारी सरकारी एजेंसियों के पास हो, परीक्षा में पूरी पारदर्शिता हो, और नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया समाप्त कर दी जाए। ठेकेदारी प्रथा को समाप्त कर सभी पदों को स्थायी किया जाए।

साथ ही, पूरे देश में गिग वर्कर्स को कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा दी जाए। रोजगार न मिलने पर सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त बेरोजगारी भत्ता दिया जाए। सरकारी उपक्रमों के निजीकरण की नीति को रद्द किया जाए।

Point of View

तब इस तरह की समस्याएं उभरना एक गंभीर संकेत है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि युवा शक्ति का सही उपयोग हो और उन्हें रोजगार मिले।
NationPress
17/01/2026
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