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क्या सबरीमला सोना चोरी मामले में भाकपा नेता शंकरदास को सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया?

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क्या सबरीमला सोना चोरी मामले में भाकपा नेता शंकरदास को सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया?

सारांश

तिरुवनंतपुरम में गिरफ्तार भाकपा नेता के.पी. शंकरदास को शनिवार को निजी अस्पताल से सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। यह कदम तब उठाया गया जब हाईकोर्ट ने जांच की गति बढ़ाने का निर्देश दिया। जानिए इस मामले में क्या नया मोड़ आया है।

मुख्य बातें

शंकरदास को सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है।
जांच की प्रक्रिया में तेजी देखने को मिल रही है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप बढ़ रहे हैं।
भाकपा और माकपा के नेताओं की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
अगले दिनों में जांच की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

तिरुवनंतपुरम, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सबरीमला सोना चोरी मामले में गिरफ्तार ट्रावनकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व सदस्य और वरिष्ठ भाकपा नेता के.पी. शंकरदास को शनिवार शाम को तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। यह कदम उस समय उठाया गया है, जब केरल हाईकोर्ट की तय समय-सीमा से पहले विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने जांच की गति तेज कर दी है।

शंकरदास को बुधवार को उस समय हिरासत में लिया गया था, जब वह एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। उनकी गिरफ्तारी में देरी को लेकर बढ़ती आलोचना के बाद यह कार्रवाई की गई थी।

गिरफ्तारी की सूचना तुरंत कोल्लम विजिलेंस कोर्ट को दी गई। शनिवार को जेल के एक डॉक्टर ने निजी अस्पताल पहुंचकर शंकरदास की जांच की और उनके इलाज से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की।

चिकित्सकीय आकलन के आधार पर अधिकारियों ने निर्णय लिया कि उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें जेल अस्पताल के बजाय किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आगे का इलाज दिया जाना चाहिए।

जांच में अचानक आई तेजी की वजह बढ़ती न्यायिक सख्ती मानी जा रही है। सोमवार को एसआईटी को केरल हाईकोर्ट के समक्ष एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी है। इससे पहले, हाईकोर्ट ने शंकरदास की गिरफ्तारी न होने पर जांच एजेंसी को कड़ी फटकार लगाई थी।

इस मामले में नामजद ट्रावनकोर देवस्वोम बोर्ड के तीन सदस्यों में से शंकरदास आखिरी व्यक्ति थे, जिनकी गिरफ्तारी हुई। इस देरी ने अदालत में गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

यह मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। शंकरदास के बेटे केरल पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी हैं और भाकपा के प्रमुख नेता भी माने जाते हैं। भाकपा सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है। ऐसे में राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी तेज हो गए हैं।

इन आशंकाओं को तब और बल मिला, जब भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर द्वारा दायर याचिका पर हाईकोर्ट जल्द ही फैसला सुनाने वाला है, जिसमें मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है।

इस बीच, विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने कहा है कि वह जांच की प्रगति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने यह भी इंगित किया कि एसआईटी ने पूर्व देवस्वोम मंत्री और वरिष्ठ माकपा विधायक कडकमपल्ली सुरेंद्रन से पूछताछ की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने एक बार फिर मांग दोहराई है कि जांच को राजनीतिक नेतृत्व के ऊपरी स्तर तक ले जाया जाए।

माकपा और भाकपा के नेताओं की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में एसआईटी की कार्रवाई (खासतौर पर हाईकोर्ट में पेश की जाने वाली रिपोर्ट) यह तय करेगी कि जांच को विश्वसनीय माना जाएगा या फिर अदालत के दबाव में की गई महज प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई समझी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस मामले की जांच की गति और राजनीतिक निहितार्थ पर ध्यान देना आवश्यक है। यह मामला केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक संरक्षण और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या शंकरदास की गिरफ्तारी के पीछे राजनीतिक कारण हैं?
इस मामले में राजनीतिक संरक्षण के आरोप लगाए जा रहे हैं, क्योंकि शंकरदास के बेटे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं।
क्या एसआईटी की जांच प्रभावी है?
हाईकोर्ट ने एसआईटी को गंभीरता से फटकार लगाई है, जिससे उनकी जांच की प्रक्रिया में तेजी आई है।
राष्ट्र प्रेस
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