नेशनल मेरीटाइम डे: 'एसएस लॉयल्टी' के साहसिक सफर से भारत की समुद्री ताकत की ओर

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नेशनल मेरीटाइम डे: 'एसएस लॉयल्टी' के साहसिक सफर से भारत की समुद्री ताकत की ओर

सारांश

क्या आप जानते हैं कि भारत के समुद्री व्यापार की शुरुआत कैसे हुई? 'एसएस लॉयल्टी' का साहसिक सफर ब्रिटिश एकाधिकार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम था। इस लेख में जानें कि कैसे भारत ने समुद्री ताकत में परिवर्तन किया।

Key Takeaways

  • एसएस लॉयल्टी की यात्रा ने भारतीय समुद्री व्यापार को सशक्त किया।
  • भारत ने कंटेनर शिपिंग लाइन की स्थापना की है।
  • भारत के बंदरगाह अब विश्व-स्तरीय हैं।
  • भारत का विजन 2047 में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है।
  • समुद्री क्षेत्र में नौकरियों का सृजन बढ़ रहा है।

नई दिल्ली, (राष्ट्र प्रेस)। क्या आप जानते हैं कि जिस महासागर पर आज भारत गर्व से तिरंगा लहरा रहा है, उस पर पहले किसी और का वर्चस्व था? बॉम्बे बंदरगाह पर विश्व के समुद्री व्यापार में ब्रिटिश जहाजों की प्रमुखता थी। वे मनमाने किराए वसूलते थे और किसी भी भारतीय कंपनी को टिकने नहीं देते थे।

महान उद्योगपति जमशेदजी टाटा ने अपनी 'टाटा लाइन' की स्थापना कर इस स्थिति को बदलने का प्रयास किया था, लेकिन ब्रिटिश कंपनियों ने 'किराया-युद्ध' छेड़कर उन्हें बाजार से बाहर कर दिया। इसी दौरान एक गुजराती उद्योगपति वालचंद हीराचंद ने 1919 में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर 'सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी' की स्थापना की। उन्होंने ग्वालियर के महाराजा से एक 'हॉस्पिटल शिप' खरीदी, जिसे नया रूप देते हुए 'एसएस लॉयल्टी' नाम दिया गया।

5 अप्रैल 1919 को बॉम्बे के तट से 'एसएस लॉयल्टी' ने जब लंदन के लिए अपनी पहली व्यावसायिक यात्रा शुरू की, तो यह केवल एक जहाज की यात्रा नहीं थी। यह ब्रिटिश एकाधिकार के खिलाफ एक सीधा राष्ट्रवादी प्रहार था। इस अदम्य साहस को सम्मानित करने के लिए भारत हर साल 5 अप्रैल को 'नेशनल मेरीटाइम डे' मनाता है।

1964 में 5 अप्रैल को ही बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय की स्थापना हुई थी। 'एसएस लॉयल्टी' जहाज मुंबई से लंदन के लिए रवाना हुआ था। इस ऐतिहासिक यात्रा की स्मृति में भारत सरकार ने 5 अप्रैल, 1964 को पहली बार 'नेशनल मेरीटाइम डे' मनाने का निर्णय लिया।

आज, जब भारत अपना 63वां राष्ट्रीय समुद्री दिवस मना रहा है, तब परिस्थितियाँ पूरी तरह से बदल चुकी हैं। इस वर्ष का विषय 'मैरीटाइम इंडिया - एम्पावरिंग प्रोग्रेस' है।

'भारत कंटेनर शिपिंग लाइन' (बीसीएसएल) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता को कम करना और वैश्विक समुद्री व्यापार में भारत की स्थिति को सशक्त बनाना है। फरवरी 2026 में, भारत ने अपनी पहली राष्ट्रीय कंटेनर शिपिंग लाइन स्थापित करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

59,000 करोड़ रुपए के निवेश से शुरू हुई यह योजना विदेशी जहाजों पर हमारी निर्भरता को समाप्त कर देगी। अब भारत केवल विदेशी जहाजों में अपना माल नहीं भेजेगा, बल्कि स्वदेशी जहाज भी बनाएगा।

आज भारत के बंदरगाह किसी विश्व-स्तरीय एयरपोर्ट से कम नहीं हैं। 'सागरमाला कार्यक्रम' ने देश के परिवहन ढांचे की तस्वीर बदल दी है। पहले जहां एक जहाज को बंदरगाह पर माल उतारने में औसतन 93 घंटे लगते थे, आज यह समय घटकर मात्र 48 घंटे रह गया है। सड़क पर बोझ कम करने के लिए नदियों और जलमार्गों (आईडब्ल्यूटी) के माध्यम से माल ढुलाई में 710 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

भारत 'हरित सागर' दिशा-निर्देशों के तहत ग्रीन हाइड्रोजन और सौर ऊर्जा से संचालित शून्य-उत्सर्जन (जीरो-एमिशन) बंदरगाह विकसित कर रहा है। दक्षिण कोरिया के साथ हालिया समझौते के बाद, भारतीय युवाओं को दुनिया की सबसे बेहतरीन 'शिपबिल्डिंग' प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

इन सब के बीच हमें उन चेहरों को नहीं भूलना चाहिए जो समुद्र के असली योद्धा हैं। हमारे नाविक महीनों तक अपने परिवार से दूर, गहरे समुद्र में तूफानों और चुनौतियों का सामना करते हुए भारत की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा को बनाए रखते हैं। उनकी बहादुरी और असाधारण कार्यों को सम्मानित करने के लिए ही सरकार 'सागर सम्मान पुरस्कार' प्रदान करती है।

भारत का विजन 2047 बिल्कुल स्पष्ट है। 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना और 1 करोड़ (10 मिलियन) से अधिक नई नौकरियों का सृजन करना। आज समुद्री क्षेत्र देश की जीडीपी में 4 प्रतिशत का योगदान देता है, 2047 तक इसे करीब 'दो अंकों' तक ले जाने का लक्ष्य है।

5 अप्रैल 1919 को 'एसएस लॉयल्टी' ने आज़ादी की जो चिंगारी समुद्र की लहरों पर छोड़ी थी, आज वह 'अमृत काल' में एक मशाल बन चुकी है। यह दुनिया के लिए एक उद्घोषणा है कि समुद्र के मार्गों पर अब भारत की नई वैश्विक महाशक्ति का उदय हो रहा है।

Point of View

बल्कि समुद्री क्षेत्र में स्वदेशी पहल के विकास की दिशा में एक नई शुरुआत की।
NationPress
08/04/2026

Frequently Asked Questions

नेशनल मेरीटाइम डे क्यों मनाया जाता है?
नेशनल मेरीटाइम डे हर साल 5 अप्रैल को मनाया जाता है ताकि 'एसएस लॉयल्टी' की पहली यात्रा की स्मृति को सम्मानित किया जा सके, जिसने ब्रिटिश एकाधिकार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।
भारत में समुद्री व्यापार का इतिहास क्या है?
भारत में समुद्री व्यापार का इतिहास ब्रिटिश राज के समय से शुरू होता है, जब भारतीय कंपनियों को व्यापार में बाधाओं का सामना करना पड़ता था।
भारत की समुद्री ताकत को कैसे बढ़ाया गया है?
भारत ने 'भारत कंटेनर शिपिंग लाइन' जैसी पहलों से विदेशी निर्भरता को कम करने और समुद्री व्यापार में अपनी स्थिति को मजबूत किया है।
सागरमाला कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है?
सागरमाला कार्यक्रम का उद्देश्य देश के बंदरगाहों की दक्षता में सुधार और समुद्री परिवहन को बढ़ावा देना है।
कौन से पुरस्कार समुद्री क्षेत्र में दिए जाते हैं?
समुद्री क्षेत्र में 'सागर सम्मान पुरस्कार' दिए जाते हैं, जो नाविकों की बहादुरी और योगदान को सम्मानित करते हैं।
Nation Press