क्या एनसीआर की हवा में जहर है? दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में एक्यूआई 450 के पास, अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या एनसीआर की हवा में जहर है? दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में एक्यूआई 450 के पास, अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़

सारांश

एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो गई है। एक्यूआई 450 के करीब पहुँच गया है, जिससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी है। जानें इसके कारण और इससे बचने के उपाय।

मुख्य बातें

दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद में एक्यूआई 450 के पास पहुँच गया है।
बढ़ती हुई प्रदूषण की वजह से अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सेहत पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
सफाई और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।

नोएडा, 3 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। बुधवार को वायु गुणवत्ता पिछले दिनों की तुलना में और भी भयावह हो गई है।

दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के कई क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 से 430 के खतरनाक स्तर को पार करके 450 के आसपास पहुँच गया है, जिससे पूरा क्षेत्र एक 'गैस चैंबर' में बदलता हुआ प्रतीत हो रहा है। इस भयंकर प्रदूषण का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है और सांस, त्वचा सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या अस्पतालों में तेजी से बढ़ रही है।

वायु प्रदूषण से संबंधित आंकड़े चौंकाने वाले हैं। दिल्ली में, आनंद विहार (402), चांदनी चौक (430), विवेक विहार (410) और वजीरपुर (402) जैसे इलाके 'गंभीर' श्रेणी में पहुँच चुके हैं। आरके पुरम और रोहिणी में भी एक्यूआई 418 दर्ज किया गया है।

नोएडा की स्थिति भी बेहतर नहीं है, जहाँ सेक्टर-116 (406), सेक्टर-125 (405) और सेक्टर-1 (397) में हवा की गुणवत्ता 'बेहद खराब' से 'गंभीर' स्तर पर है। गाजियाबाद में भी इंदिरापुरम में 410, लोनी में 428 एक्यूआई बना हुआ है। इस भयंकर प्रदूषण का स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर की खराब वायु गुणवत्ता पर लंबे समय तक रहने से सांस की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। अस्पतालों के आपातकालीन विभागों और श्वास रोग विशेषज्ञों के क्लीनिकों में मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। न केवल अस्थमा और सीओपीडी जैसी पुरानी बीमारियों के मरीजों में समस्या बढ़ रही है, बल्कि स्वस्थ लोग भी आंखों में जलन, गले में खराश, लगातार खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें लेकर पहुँच रहे हैं।

बच्चों और बुजुर्गों को इस स्थिति में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। इस संकट के पीछे मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियाँ, जैसे कम हवा की गति और ठंड का बढ़ना, प्रमुख कारण माने जा रहे हैं, जो प्रदूषकों को फैलने से रोक रही हैं। हालाँकि, वाहनों और उद्योगों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियाँ, और पराली जलाने जैसे स्थानीय स्रोत भी इस समस्या में इजाफा कर रहे हैं।

इस गंभीर स्थिति में स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से घर के अंदर रहने, बाहर निकलते समय मास्क पहनने, खूब पानी पीने और व्यायाम जैसी शारीरिक गतिविधियों से बाहर करने से बचने की सलाह दे रहे हैं। स्कूलों में बच्चों की बाहरी गतिविधियों पर भी रोक लगाई जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि लोगों के दैनिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। सरकार और नागरिकों दोनों को मिलकर इसे नियंत्रित करने की आवश्यकता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस प्रदूषण का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
यह सांस, त्वचा और अन्य बीमारियों को बढ़ा सकता है।
इस स्थिति से बचने के उपाय क्या हैं?
घर के अंदर रहना, मास्क पहनना और पानी पीना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले