नेरियमंगलम: प्रकृति की गोद में छिपा अद्भुत गांव, झरनों और मसालों का संपूर्ण अनुभव
सारांश
Key Takeaways
- नेरियमंगलम की प्राकृतिक सुंदरता अद्वितीय है।
- यहां के झरने पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
- मसालों की खेती यहां का मुख्य व्यवसाय है।
- यहां का मेहराबदार पुल ऐतिहासिक महत्व रखता है।
- स्थानीय भोजन मसालों से भरपूर है।
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जून की छुट्टियों का समय नजदीक है और यदि आप शांति एवं प्रकृति की अद्भुत छटा का अनुभव करना चाहते हैं, तो हम आपको केरल के एक ऐसे स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपनी प्राकृतिक सुन्दरता, झरनों, और मसालेदार पेड़-पौधों के लिए प्रसिद्ध है।
यहां आप दक्षिण भारत का पहला मेहराबदार पुल भी देख सकेंगे, जिसे एक प्राचीन इतिहास प्राप्त है।
केरल के एर्नाकुलम और इडुक्की की सीमाओं में बसा नेरियमंगलम, ऊंचे हरे-भरे पहाड़ों से घिरा हुआ एक रहस्यमय गांव है। यहां आकर्षक झरनों से लेकर विशाल रबर के पेड़ों तक का दृश्य देखने को मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि नेरियमंगलम में कदम रखते ही आप तापमान में बदलाव का अनुभव करेंगे, इसे “मुन्नार का प्रवेश द्वार” कहा जाता है। यह गांव पेरियार नदी के किनारे स्थित है, जहां हरे-भरे रबर के बाग और विभिन्न मसालों के बगीचे हैं। यहां के दो प्रमुख झरने चीयप्पारा और वलारा हैं, जो दूर-दूर से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
नेरियमंगलम का अर्थ मलयालम में “नेरियम का गांव” है, जहां नेरियम उस पेड़ का नाम है जो यहां की प्रकृति में पाया जाता है। मसालों की खेती यहां बड़े पैमाने पर होती है, जिसमें इलायची, काली मिर्च, वनीला, लौंग, जायफल और दालचीनी शामिल हैं।
चीयप्पारा और वलारा झरने कोच्चि-मुन्नार राजमार्ग पर स्थित हैं। चीयप्पारा एक इको-टूरिज्म स्थल है, जहां 1000 फीट ऊंचे पहाड़ से जल तेजी से गिरता है। पानी साफ और ठंडा होता है, और जून से सितंबर के बीच पानी का स्तर बढ़ता है। जबकि वलारा झरना मानसून के दौरान दिखाई देता है।
नेरियमंगलम के मेहराबदार पुल की बात करें तो यह एर्नाकुलम और इडुक्की के बीच एक महत्वपूर्ण मार्ग है। पुल पर चलते ही आपको अलग जलवायु का अनुभव होगा। इसका निर्माण 1935 में त्रावणकोर के महाराजा ने करवाया था। यहां के स्थानीय भोजन में आपको काली मिर्च का स्वाद लेना चाहिए, साथ ही अप्पम, पुट्टू, कडाला करी, मसालेदार मछली और चावल का आनंद भी लें।