29 सितंबर 2026
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भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का 65 प्रभारियों को निर्देश: दिल्ली छोड़ो, राज्यों में मजबूत करो संगठन

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भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का 65 प्रभारियों को निर्देश: दिल्ली छोड़ो, राज्यों में मजबूत करो संगठन

सारांश

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने 65 नवनियुक्त प्रभारियों को साफ संदेश दिया — दिल्ली कम, राज्य ज़्यादा। 2027 के चुनावी चक्र से पहले भाजपा का यह कदम बताता है कि पार्टी की असली लड़ाई बूथ स्तर पर जीतनी है, न दिल्ली के गलियारों में।

मुख्य बातें

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में नवनियुक्त प्रदेश प्रभारियों की पहली सामूहिक बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 65 प्रभारी और सह-प्रभारी शामिल हुए।
नवीन ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पदाधिकारी अनावश्यक रूप से दिल्ली न आएँ और अपने-अपने राज्यों में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करें।
सूत्रों के अनुसार, कुछ प्रभारियों के बार-बार दिल्ली आने पर शिकायतें मिलने के बाद यह निर्देश जारी किया गया।
भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव चक्र को देखते हुए हाल ही में संगठनात्मक ढाँचे में बड़ा फेरबदल किया है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में नवनियुक्त प्रदेश प्रभारियों और सह-प्रभारियों की पहली सामूहिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि पदाधिकारी अनावश्यक रूप से दिल्ली के दौरे न करें और अपने-अपने राज्यों में जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करें। हाल ही में हुए बड़े संगठनात्मक फेरबदल के बाद यह बैठक पार्टी के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नियुक्त लगभग 65 प्रभारियों और सह-प्रभारियों को एक साथ संबोधित करने का पहला अवसर था।

बैठक की पृष्ठभूमि और संगठनात्मक फेरबदल

भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव चक्र को ध्यान में रखते हुए हाल ही में अपने संगठनात्मक ढाँचे में व्यापक बदलाव किया है। इसके तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। यह फेरबदल इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जमीनी तैयारी को धार देना चाहती है। मंगलवार की बैठक इस पुनर्गठन के बाद नवीन की अध्यक्षता में प्रभारियों की पहली सामूहिक समीक्षा बैठक थी।

नवीन का मुख्य संदेश: राज्यों में रहें, दिल्ली से बचें

सूत्रों के अनुसार, बैठक में नितिन नवीन का सबसे प्रमुख संदेश यही रहा कि प्रभारियों को दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के लिए अनावश्यक समय खर्च करने के बजाय अपने निर्धारित राज्यों में संगठनात्मक दायित्व निभाने को प्राथमिकता देनी चाहिए। सूत्रों का कहना है कि कुछ पदाधिकारियों के बार-बार दिल्ली आने और वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात में अत्यधिक समय देने को लेकर शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद नवीन ने यह स्पष्ट निर्देश जारी किया।

नवीन ने पदाधिकारियों से कहा कि संगठन के हित को व्यक्तिगत प्राथमिकताओं से ऊपर रखा जाए और दी गई जिम्मेदारी को पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाया जाए।

बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर

बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि पार्टी की गतिविधियाँ केवल प्रदेश या जिला स्तर तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें बूथ स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जाए। नवीन ने प्रभारियों को नियमित रूप से अपने-अपने राज्यों का दौरा करने, प्रदेश इकाइयों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने और बूथ स्तरीय बैठकों से मिलने वाले फीडबैक को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुँचाने का निर्देश दिया। संगठन के कामकाज की नियमित समीक्षा करने पर भी जोर दिया गया।

महिलाओं, युवाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुँच बढ़ाने का निर्देश

बैठक में महिलाओं, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच पार्टी की पहुँच बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। पदाधिकारियों से कहा गया कि संगठन की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित किया जाए और विभिन्न सामाजिक समूहों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा जाए। गौरतलब है कि यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब भाजपा 2027 के चुनावी चक्र से पहले नए मतदाता वर्गों को जोड़ने की कोशिश में है।

आगामी चुनावी राज्यों पर विशेष चर्चा

बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों वाले राज्यों को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। नवीन ने संबंधित प्रभारियों को चुनावी राज्यों में लगातार दौरे करने और संगठन की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया। इस बैठक को पार्टी के भीतर प्रदेश स्तरीय संगठनात्मक गतिविधियों को और सक्रिय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले हफ्तों में यह देखना होगा कि प्रभारी इन निर्देशों को जमीन पर किस हद तक उतार पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ पदाधिकारी संगठन से ज़्यादा वरिष्ठ नेताओं की परिक्रमा में समय लगाते हैं। 2027 के चुनावी चक्र से पहले यह संदेश रणनीतिक है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या अनुपालन सुनिश्चित करने का कोई जवाबदेही तंत्र भी बनाया गया है या यह निर्देश महज़ एक औपचारिक संबोधन बनकर रह जाएगा। इतिहास बताता है कि भाजपा में ऐसे निर्देश हर बड़े चुनावी चक्र से पहले आते हैं — 2022 और 2024 से पहले भी इसी तरह की बैठकें हुई थीं। जब तक बूथ-स्तरीय प्रदर्शन को प्रभारियों के मूल्यांकन से नहीं जोड़ा जाता, यह निर्देश संगठनात्मक संस्कृति को बदलने में सीमित असर ही छोड़ेगा।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नितिन नवीन ने भाजपा प्रभारियों को क्या निर्देश दिया?
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 29 सितंबर 2026 को हुई बैठक में प्रदेश प्रभारियों को अनावश्यक दिल्ली दौरे बंद करने और अपने राज्यों में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि संगठन का हित व्यक्तिगत प्राथमिकताओं से ऊपर रखा जाना चाहिए।
भाजपा ने हाल ही में संगठनात्मक फेरबदल क्यों किया?
भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव चक्र को देखते हुए सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। इस फेरबदल का मकसद पार्टी की जमीनी तैयारी को मजबूत करना और विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुँच बढ़ाना है।
इस बैठक में कितने पदाधिकारी शामिल हुए और क्या चर्चा हुई?
बैठक में लगभग 65 प्रभारी और सह-प्रभारी शामिल हुए। इसमें संगठन को मजबूत करने, आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों, बूथ स्तरीय गतिविधियों और महिलाओं व युवाओं के बीच पार्टी की पहुँच बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ।
भाजपा प्रभारियों के बार-बार दिल्ली आने पर निर्देश क्यों देना पड़ा?
सूत्रों के अनुसार, कुछ नवनियुक्त प्रभारियों के बार-बार दिल्ली आने और वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात में अत्यधिक समय देने को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद नितिन नवीन ने स्पष्ट किया कि राज्य की जिम्मेदारी संभालने वाले नेताओं को अपने निर्धारित संगठनात्मक दायित्व को प्राथमिकता देनी चाहिए।
भाजपा के प्रदेश प्रभारियों की भूमिका क्या होती है?
भाजपा में प्रदेश प्रभारी केंद्रीय नेतृत्व और राज्य इकाई के बीच की कड़ी होते हैं। वे राज्य की संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी करते हैं, चुनावी तैयारियों में समन्वय करते हैं और ज़मीनी फीडबैक को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुँचाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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