क्या नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दूसरी बार सफल कैलीब्रेशन फ्लाइट ट्रायल हुआ?

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क्या नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दूसरी बार सफल कैलीब्रेशन फ्लाइट ट्रायल हुआ?

सारांश

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया है। दूसरी बार सफल कैलीब्रेशन फ्लाइट ट्रायल के बाद, सभी सिस्टम्स की सुरक्षा रिपोर्ट सकारात्मक रही है। यह परीक्षण एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जानें इसके महत्व और भविष्य की योजनाओं के बारे में!

मुख्य बातें

कैलीब्रेशन फ्लाइट ट्रायल की सफलता एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सभी एविशन सिस्टम्स की सुरक्षा रिपोर्ट सकारात्मक रही है।
डीजीसीए का लाइसेंस मिलने के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की तैयारियां तेज होंगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के एयर ट्रैफिक को कम करेगा।
यह एयरपोर्ट हजारों रोजगार के अवसर प्रदान करेगा।

नोएडा, 4 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक और बड़ी उपलब्धि की ओर बढ़ गया है। यहां दूसरी बार कैलीब्रेशन फ्लाइट ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया गया। रनवे के दोनों छोर से हुए इस विशेष परीक्षण में तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने कई अहम एविशन सिस्टम्स को परखा। परीक्षण के बाद प्राप्त रिपोर्टों में सभी सिस्टम पूर्ण रूप से सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, कैलीब्रेशन फ्लाइट ने एयरपोर्ट पर मौजूद आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम), नेविगेशन, कम्युनिकेशन और रडार सिस्टम की वास्तविक परिस्थितियों में जांच की। इस दौरान विमान ने रनवे पर कई बार लैंडिंग एप्रोच बनाते हुए ऊंचाई, दिशा, आवृत्ति, विजिबिलिटी और अन्य तकनीकी मापदंडों को जांचा।

परीक्षण में मौजूद विशेषज्ञों ने बताया कि सभी सिस्टम आधुनिक स्तर के हैं और इंटरनेशनल फ्लाइट ऑपरेशन के मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। इससे पहले भी एयरपोर्ट पर एक चरण का कैलीब्रेशन ट्रायल सफलतापूर्वक किया जा चुका है। दूसरी बार हुई यह परीक्षण उड़ान इसलिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसके बाद सबसे अहम प्रक्रिया डीजीसीए (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) द्वारा एरोड्रम लाइसेंस जारी की जाएगी। यह लाइसेंस मिलने के बाद एयरपोर्ट से वास्तविक उड़ानों का रास्ता साफ हो जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि परीक्षण रिपोर्ट बहुत सकारात्मक रही है। एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर, रनवे लाइटिंग, कम्युनिकेशन नेटवर्क, सेफ्टी सिस्टम और इमरजेंसी सिस्टम की भी जांच की गई। अब डीजीसीए की टीम अंतिम दस्तावेजी प्रक्रिया और निरीक्षण के बाद औपचारिक लाइसेंस जारी कर सकती है।

एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी और उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्तर का प्रोजेक्ट बताया है। अनुमान है कि एरोड्रम लाइसेंस जारी होते ही यहां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की तैयारियों को तेज गति मिलेगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन शुरू होने से ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की सूची में उत्तर प्रदेश की बड़ी छलांग होगी। आने वाले समय में यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के एयर ट्रैफिक का बड़ा दबाव कम करेगा और हजारों रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह एयरपोर्ट भारत की आधुनिक एयर ट्रैफिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कैलीब्रेशन ट्रायल क्या है?
कैलीब्रेशन ट्रायल एक परीक्षण है जिसमें एयरपोर्ट के एविशन सिस्टम्स की प्रभावशीलता और सुरक्षा की जांच की जाती है।
डीजीसीए का एरोड्रम लाइसेंस क्या है?
डीजीसीए का एरोड्रम लाइसेंस एयरपोर्ट को वास्तविक उड़ानों के संचालन के लिए आवश्यक औपचारिक अनुमति है।
इस परीक्षण के बाद अगला कदम क्या है?
परीक्षण के बाद, डीजीसीए टीम अंतिम दस्तावेजी प्रक्रिया और निरीक्षण के बाद लाइसेंस जारी करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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