क्या नॉर्थ ईस्ट भारत में एडीबीयू अपना पहला सैटेलाइट ‘लाचित-1’ लॉन्च करने जा रही है?

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क्या नॉर्थ ईस्ट भारत में एडीबीयू अपना पहला सैटेलाइट ‘लाचित-1’ लॉन्च करने जा रही है?

सारांश

असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी (एडीबीयू) नॉर्थईस्ट भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। यह पहला सैटेलाइट 'लाचित-1' छात्रों द्वारा विकसित किया जा रहा है। जानिए इस मिशन की पूरी कहानी और इसके महत्व के बारे में।

Key Takeaways

  • लाचित-1 सैटेलाइट नॉर्थईस्ट भारत की पहली यूनिवर्सिटी द्वारा लॉन्च किया जा रहा है।
  • यह परियोजना छात्रों के लिए तकनीकी ज्ञान को वास्तविक अनुप्रयोग से जोड़ने का मौका है।
  • असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी ने इस मिशन को शुरू किया है।
  • सैटेलाइट का उद्देश्य पर्यावरणीय निगरानी करना है।
  • यह क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक प्रयास है।

सोनापुर-तेपसिया, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी (एडीबीयू) नॉर्थईस्ट भारत के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने के लिए तैयार है। यह यूनिवर्सिटी अपने पहले सैटेलाइट मिशन की लॉन्चिंग की तैयारी कर रही है, जिसे क्षेत्र में अंतरिक्ष अनुसंधान और नवाचार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस सैटेलाइट का नाम ‘लाचित-1’ रखा गया है और इसे फैकल्टी मेंबर्स के मार्गदर्शन में पूरी तरह से यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही, एडीबीयू नॉर्थईस्ट भारत की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी बन जाएगी, जो इतना महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन शुरू कर रही है।

इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2022 में प्रोफेसर बिक्रमजीत काकती के नेतृत्व में की गई थी। इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए पांच छात्रों की एक कोर टीम गठित की गई है, जो पूरे प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रही है। इसके अलावा, लगभग 20 छात्रों के अलग-अलग समूह सैटेलाइट डिजाइन, इंजीनियरिंग, डेटा सिस्टम, कम्युनिकेशन और मिशन प्लानिंग जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट छात्रों के लिए अकादमिक ज्ञान को वास्तविक तकनीकी अनुप्रयोग से जोड़ने का एक अनूठा अवसर साबित हो रहा है।

प्रोजेक्ट से जुड़े छात्रों का कहना है कि यह पहल वर्षों की टीम वर्क, तकनीकी सीख और नवाचार का परिणाम है। उनके अनुसार, इस मिशन के जरिए उन्हें रियल-वर्ल्ड सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जो भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए बेहद उपयोगी होगा।

असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी में इंडिजिनस नॉलेज के डायरेक्टर दिनेश बैश्य ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में इस मिशन को नॉर्थईस्ट भारत के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह इस क्षेत्र में अपनी तरह का पहला मिशन होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नॉर्थईस्ट भारत के इतिहास में यह पहली बार होगा जब किसी यूनिवर्सिटी के छात्र और शिक्षक मिलकर एक सैटेलाइट लॉन्च करेंगे, जो क्षेत्र की शैक्षणिक और तकनीकी क्षमताओं को नई पहचान देगा।

सैटेलाइट ‘लाचित-1’ का नाम महान अहोम सेनापति लाचित बोरफुकन के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने मुगल सेना के खिलाफ असम की रक्षा की थी। लाचित बोरफुकन साहस, नेतृत्व और स्वदेशी गौरव के प्रतीक माने जाते हैं। यूनिवर्सिटी का उद्देश्य इन्हीं मूल्यों को युवा इनोवेटर्स में विकसित करना है, ताकि वे तकनीक के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़े रहें।

लाचित-1 सैटेलाइट को भूस्खलन, बाढ़, मौसम के पैटर्न और पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। यह सैटेलाइट नॉर्थईस्ट भारत में आपदा प्रबंधन, जलवायु अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों को मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराएगा, जिससे समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे।

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अनुभवात्मक शिक्षा के माध्यम से छात्रों को सशक्त बनाना है। इस पहल के जरिए युवा दिमागों को अंतरिक्ष विज्ञान और सैटेलाइट तकनीक में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक प्रयास के साथ असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी नॉर्थईस्ट भारत को राष्ट्रीय अंतरिक्ष नवाचार के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है और नई पीढ़ी को आसमान से आगे, सितारों तक पहुंचने का सपना देखने के लिए प्रेरित कर रही है।

Point of View

बल्कि यह नॉर्थईस्ट भारत के तकनीकी विकास में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे प्रयासों से क्षेत्र की क्षमता और संभावनाओं को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
NationPress
12/01/2026

Frequently Asked Questions

लाचित-1 सैटेलाइट का मुख्य उद्देश्य क्या है?
लाचित-1 सैटेलाइट का मुख्य उद्देश्य भूस्खलन, बाढ़, मौसम के पैटर्न और पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी करना है।
कौन से छात्र इस प्रोजेक्ट में शामिल हैं?
इस प्रोजेक्ट में लगभग 25 छात्र विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
क्या यह सैटेलाइट पहली बार लॉन्च हो रहा है?
हाँ, यह नॉर्थईस्ट भारत में किसी यूनिवर्सिटी द्वारा लॉन्च किया जाने वाला पहला सैटेलाइट है।
लाचित बोरफुकन कौन थे?
लाचित बोरफुकन महान अहोम सेनापति थे, जिन्होंने मुगलों के खिलाफ असम की रक्षा की थी।
इस मिशन से छात्रों को क्या लाभ होगा?
इस मिशन से छात्रों को वास्तविक सैटेलाइट तकनीक का अनुभव मिलेगा, जो उनके भविष्य में मददगार होगा।
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