क्या असम के सीएम ने चाय जनजाति और आदिवासी युवाओं को 296 नियुक्ति पत्र बांटे?

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क्या असम के सीएम ने चाय जनजाति और आदिवासी युवाओं को 296 नियुक्ति पत्र बांटे?

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चाय जनजाति और आदिवासी समुदाय के 296 युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए। यह कदम दीर्घकालिक सामाजिक परिवर्तन का आधार बनेगा। जानिए इस समारोह की विशेषताएँ और इसके पीछे की योजना।

Key Takeaways

  • 296 युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र
  • चाय जनजाति और आदिवासी समुदाय का सामाजिक उत्थान
  • साझा परीक्षा प्रणाली का लागू होना
  • तीन प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान
  • चाय जनजाति छात्रों के लिए विशेष योजनाएँ

गुवाहाटी, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को चाय जनजाति और आदिवासी समुदाय के 296 युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र प्रदान किए। ये नियुक्तियां असम डायरेक्ट रिक्रूटमेंट एग्ज़ामिनेशन के माध्यम से हुई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि चाय बागान क्षेत्रों के युवाओं की बड़ी संख्या में सरकारी सेवा में भागीदारी से राज्य में दीर्घकालिक सामाजिक परिवर्तन होगा।

ये नियुक्ति पत्र गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में वितरित किए गए। चयनित उम्मीदवारों में से 130 को ग्रेड-IV और 166 को ग्रेड-III पदों पर विभिन्न राज्य सरकारी विभागों में नियुक्त किया गया।

इन नियुक्तियों के साथ, मौजूदा राज्य सरकार द्वारा अब तक दी गई सरकारी नौकरियों की कुल संख्या 1,56,679 हो गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे पहले भी चाय जनजाति और आदिवासी समुदाय के उम्मीदवारों को 12 नवंबर को शिक्षण पदों पर, 8 दिसंबर को असम पुलिस और गृह विभाग में, और 24 दिसंबर को स्वास्थ्य विभाग के तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों पर नियुक्तियां दी गई थीं।

समारोह को संबोधित करते हुए सरमा ने कहा कि असम सभी विभागों में भर्ती के लिए साझा परीक्षा प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू करने वाला अग्रणी राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि त्रुटिरहित परीक्षा आयोजन से लेकर कानूनी अड़चनों से बचने तक कई चुनौतियों के बावजूद पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूर्ण की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने चाय उद्योग में पिछले 200 वर्षों के योगदान को मान्यता देते हुए ग्रेड-III और ग्रेड-IV पदों में चाय जनजाति और आदिवासी युवाओं के लिए तीन प्रतिशत आरक्षण लागू किया है। इस कोटे के तहत अब तक लगभग 1,000 युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है, जिसे उन्होंने व्यासायिक सामाजिक-आर्थिक बदलाव का माध्यम बताया।

सरमा ने घोषणा की कि अब यह तीन प्रतिशत आरक्षण ग्रेड-I और ग्रेड-II पदों तक भी बढ़ाया जाएगा, जिससे चाय बागान क्षेत्रों के युवा मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी और प्रोफेसर जैसे वरिष्ठ पदों तक पहुंच बना सकेंगे। इससे इन समुदायों के छात्रों में प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक माहौल भी विकसित होगा।

कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि असम के मेडिकल कॉलेजों में चाय जनजाति के छात्रों के लिए 30 एमबीबीएस सीटें पहले से आरक्षित हैं, जिनमें हाल ही में 14 अतिरिक्त सीटों की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, राज्य भर में चाय जनजाति और आदिवासी छात्रों के लिए 44 छात्रावासों का निर्माण किया जा रहा है, और शहीद दयाल दास पनिक्का स्वरोजगार योजना के तहत वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने असम विधानसभा द्वारा हाल ही में चाय बागान की “लाइनों” में रहने वाले लोगों को भूमि अधिकार देने के फैसले का भी उल्लेख किया।

Point of View

बल्कि सामाजिक समावेश और आर्थिक विकास की दिशा में भी एक कदम है। यह सुनिश्चित करता है कि असम का विकास सभी वर्गों के साथ हो।
NationPress
12/01/2026

Frequently Asked Questions

ये नियुक्ति पत्र कब वितरित किए गए?
ये नियुक्ति पत्र 12 जनवरी को गुवाहाटी में वितरित किए गए।
कुल कितने युवाओं को नियुक्ति पत्र मिले?
कुल 296 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कौन सी प्रणाली लागू की है?
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों में भर्ती के लिए साझा परीक्षा प्रणाली लागू की है।
आरक्षण की व्यवस्था क्या है?
चाय जनजाति और आदिवासी युवाओं के लिए ग्रेड-III और ग्रेड-IV पदों में तीन प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है।
क्या अन्य योजनाएँ चाय जनजाति के छात्रों के लिए हैं?
असम के मेडिकल कॉलेजों में चाय जनजाति के छात्रों के लिए 30 एमबीबीएस सीटें आरक्षित की गई हैं।
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