सस्मित पात्रा की ओडिशा मेट्रो प्रोजेक्ट को शुरू करने की मांग, जयपुर मॉडल का उदाहरण
सारांश
Key Takeaways
- सस्मित पात्रा ने ओडिशा मेट्रो प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने की मांग की है।
- जयपुर मेट्रो का फंडिंग मॉडल एक सफल उदाहरण है।
- यह प्रोजेक्ट भुवनेश्वर, कटक, खुर्दा और पुरी को जोड़ेगा।
- केंद्र और राज्य सरकार की 50:50 साझेदारी से होगा कार्यान्वयन।
- प्रोजेक्ट के लागू होने से यातायात और आर्थिक विकास में सुधार होगा।
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा के सांसद सस्मित पात्रा ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को एक पत्र भेजकर ओडिशा मेट्रो प्रोजेक्ट की फिर से शुरुआत के लिए आग्रह किया है। उन्होंने राजस्थान के जयपुर मेट्रो के फंडिंग मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि इसी तरह का तरीका अपनाकर ओडिशा में भी मेट्रो परियोजना को सफल बनाया जा सकता है।
पात्रा ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि 8 अप्रैल को केंद्र सरकार की कैबिनेट ने मेट्रो रेल नीति 2017 के तहत जयपुर मेट्रो के फेज-2 को मंजूरी दी है। यह प्रोजेक्ट लगभग 41 किलोमीटर लंबा है और इसकी लागत 13,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इसे केंद्र और राज्य सरकार की 50:50 साझेदारी में एक विशेष कंपनी (एसपीवी) द्वारा लागू किया जाएगा, जिसमें अतिरिक्त फंडिंग भी शामिल होगी।
उन्होंने कहा कि यह मॉडल इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को केंद्र और राज्य मिलकर आसानी से पूरा कर सकते हैं। इसी तर्ज पर ओडिशा मेट्रो प्रोजेक्ट को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।
ओडिशा मेट्रो, जो भुवनेश्वर, कटक, खुर्दा और पुरी को जोड़ने वाली परियोजना है, इसकी लागत 2024 में लगभग 6,255 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। प्रारंभ में इसे पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित करने की योजना थी, लेकिन अब इसे जयपुर मॉडल के अनुसार परिवर्तित किया जा सकता है। इस मॉडल के तहत, करीब 3,100 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और 3,100 करोड़ रुपये राज्य सरकार दे सकती हैं, जबकि बाकी राशि अन्य वित्तीय स्रोतों से जुटाई जा सकती है।
सस्मित पात्रा ने यह भी कहा कि यदि केंद्र सरकार 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले जयपुर मेट्रो प्रोजेक्ट को समर्थन दे सकती है, तो ओडिशा का यह प्रोजेक्ट, जिसकी लागत उससे आधी है, आसानी से लागू किया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रोजेक्ट को रद्द किया गया, तो राज्य की यातायात व्यवस्था और आर्थिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि पुरी-खुर्दा-भुवनेश्वर-कटक कॉरिडोर पर मेट्रो के निर्माण से लोगों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव होगा। इससे छात्रों और युवाओं को शिक्षा और रोजगार तक बेहतर पहुँच मिलेगी, जबकि बुजुर्गों के लिए यात्रा करना भी सरल होगा। इसके साथ ही, यह पर्यटन को बढ़ावा देगा, छोटे व्यवसायों को सहायता प्रदान करेगा और शहरों में ट्रैफिक की समस्या को भी कम करेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि ओडिशा मेट्रो प्रोजेक्ट को रद्द करने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए और केंद्र सरकार के साथ मिलकर जयपुर मॉडल को अपनाया जाए, ताकि राज्य के विकास को नई गति मिल सके।