क्या गणतंत्र दिवस परेड में 'ऑपरेशन सिंदूर' की झलक ने सबको प्रभावित किया?

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क्या गणतंत्र दिवस परेड में 'ऑपरेशन सिंदूर' की झलक ने सबको प्रभावित किया?

सारांश

गणतंत्र दिवस परेड में 'ऑपरेशन सिंदूर' की झलक ने दर्शकों को भारतीय सेना की वीरता और एकता का परिचय दिया। इस विशेष झांकी ने न केवल देश की रक्षा बलों के सामूहिक प्रयासों को उजागर किया, बल्कि देशभक्ति की भावना को भी जगाया। क्या यह प्रदर्शन हमारे सशस्त्र बलों की ताकत को दर्शाता है?

मुख्य बातें

ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना की सामूहिक ताकत को उजागर किया।
यह झांकी देशभक्ति की भावना को जगाने में सफल रही।
सेनाओं के बीच आपसी तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
ब्रह्मोस और आकाश जैसे मिसाइल सिस्टम का प्रदर्शन किया गया।
दिव्यास्त्र और शक्तिबाण की तकनीकी क्षमता को दर्शाया गया।

नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सोमवार को कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का झंडा दिखाकर विश्व को भारत की उस वीरता की याद दिलाई, जो पिछले वर्ष आतंकियों के खिलाफ प्रदर्शित की गई थी।

इस अवसर पर भारतीय रक्षा बलों की ट्राई-सर्विसेज झांकी भी प्रदर्शित की गई, जिसकी थीम थी 'ऑपरेशन सिंदूर: एकजुटता से जीत'। यह झांकी देश की सुरक्षा की रक्षा में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की सामूहिक ताकत, एकता और बेहतरीन तालमेल का प्रतीक थी।

इस प्रदर्शन में, इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को उजागर किया, जिसमें मिशन के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के समन्वित और तालमेल वाले प्रयासों पर जोर दिया गया। इस ऑपरेशन की योजना राष्ट्रीय और सैन्य नेतृत्व द्वारा प्रभावी ढंग से बनाई गई।

इस मिशन की कामयाबी की सबसे बड़ी वजह सेनाओं के बीच का आपसी तालमेल और वहां के स्थानीय लोगों का भरपूर साथ था।

विरासत, विविधता और विकास’ के मेल को ऑपरेशन सिंदूर की एक खास पहचान के तौर पर दिखाया गया।

जहां ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम ने दुश्मन के ठिकानों पर निर्णायक हमले किए, वहीं आकाश मिसाइल सिस्टम और एस-400 एयर डिफेंस नेटवर्क ने ‘सुदर्शन चक्र’ की अवधारणा के तहत आम नागरिकों को एक मज़बूत सुरक्षा कवच दिया।

झांकी के कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट्स सेगमेंट में, दिव्यास्त्र को शक्तिबाण के साथ प्रदर्शित किया गया।

हाई मोबिलिटी व्हीकल्स पर लगे ये प्लेटफॉर्म भारतीय सेना का स्वदेशीकरण और तकनीकी आधुनिकीकरण पर बढ़ते जोर को दिखाते हैं।

सर्विलांस और टारगेटिंग के इंटीग्रेटेड कॉन्सेप्ट पर बने ये सिस्टम सेना के टेक्नोलॉजी-आधारित और सटीक युद्ध की ओर बढ़ने में एक बड़ी छलांग हैं।

शक्तिबाण और दिव्यास्त्र में झुंड वाले ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी रूप से विकसित हाइब्रिड लगे हैं, जो तोपखाने की फायरिंग की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म ग्रुप ड्रोन, सटीक हमले के मिशन के लिए लंबी दूरी के ड्रोन और प्रभावी युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल के लिए लोइटरिंग म्यूनिशन की तैनाती को संभव बनाते हैं।

शक्तिबाण वाहन की कमान 161 मीडियम रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट रमन मिश्रा ने संभाली थी, जबकि दिव्यास्त्र वाहन की कमान उसी रेजिमेंट के सूबेदार किरण मेदार ने संभाली थी, जो इसमें शामिल भारतीय सेना के जवानों की ऑपरेशनल तैयारी और प्रोफेशनलिज्म को दिखाता है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 100 से ज़्यादा आतंकवादियों को मार गिराया गया था – यह सैन्य कार्रवाई मई 2025 में की गई थी, जिसे 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में लॉन्च किया गया था, जिसमें 26 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वे हमारी एकता और साहस का भी प्रतीक हैं। इस तरह के प्रदर्शनों से देशवासियों का मनोबल बढ़ता है और हम सभी को अपने सशस्त्र बलों पर गर्व होता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सिंदूर क्या है?
ऑपरेशन सिंदूर भारत की सशस्त्र बलों द्वारा आतंकवादियों के खिलाफ एक सफल सैन्य कार्रवाई है।
गणतंत्र दिवस परेड में इस बार क्या खास था?
इस बार की परेड में 'ऑपरेशन सिंदूर' की झांकी ने भारतीय सेना की एकता और सामर्थ्य को दर्शाया।
ऑपरेशन सिंदूर कब हुआ था?
ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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