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रात को ज्यादा खाना क्यों है खतरनाक? NHM की चेतावनी और विशेषज्ञों की ज़रूरी सलाह

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रात को ज्यादा खाना क्यों है खतरनाक? NHM की चेतावनी और विशेषज्ञों की ज़रूरी सलाह

सारांश

रात का भारी भोजन सिर्फ वजन नहीं बढ़ाता — यह नींद, पाचन और समग्र स्वास्थ्य को भी बिगाड़ता है। NHM की ताज़ा चेतावनी के अनुसार, डिनर हल्का रखें, धीरे-धीरे चबाकर खाएं और सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले भोजन करें।

मुख्य बातें

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने रात में ओवरईटिंग को मोटापा , गैस और नींद की समस्याओं का प्रमुख कारण बताया है।
रात का भोजन हमेशा हल्का और सुपाच्य होना चाहिए — जैसे दाल-रोटी , खिचड़ी , दलिया या छाछ ।
तला-भुना और अधिक मसालेदार भोजन रात के समय पाचन तंत्र पर अतिरिक्त बोझ डालता है।
भोजन धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाने से पाचन बेहतर होता है।
डिनर और सोने के बीच कम से कम 2-3 घंटे का अंतर रखने से एसिडिटी और बेचैनी से बचाव होता है।

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने 29 अप्रैल 2026 को रात के भोजन को लेकर एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है — रात में अधिक मात्रा में भोजन करना यानी ओवरईटिंग पाचन तंत्र पर अतिरिक्त बोझ डालती है और मोटापा, गैस तथा नींद संबंधी समस्याओं को बढ़ावा देती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, खान-पान की आदतों में मामूली बदलाव कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव कर सकता है।

रात के भोजन से जुड़े प्रमुख स्वास्थ्य जोखिम

NHM के अनुसार, रात को भारी भोजन करने से मोटापा बढ़ने का खतरा सबसे अधिक रहता है। इसके अलावा गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। रात में शरीर की चयापचय (मेटाबॉलिज्म) दर धीमी हो जाती है, जिससे अधिक कैलोरी वाला भोजन आसानी से वसा के रूप में जमा हो जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की दर तेज़ी से बढ़ रही है।

क्या खाएं रात के भोजन में

विशेषज्ञों का सुझाव है कि रात का भोजन हमेशा हल्का और सुपाच्य होना चाहिए। दाल-रोटी, सब्जी, सलाद, छाछ, खिचड़ी या दलिया जैसे विकल्प आदर्श माने जाते हैं। इसके विपरीत, तला-भुना, अधिक मसालेदार या भारी भोजन रात के समय बिल्कुल नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह पाचन तंत्र को ठीक से काम नहीं करने देता।

खाने की सही आदतें अपनाएं

भोजन के चुनाव के साथ-साथ खाने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों की सलाह है कि भोजन को धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाना चाहिए। जल्दबाजी में खाने से पाचन संबंधी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। गौरतलब है कि भोजन को ठीक से चबाने से पाचन एंजाइम बेहतर तरीके से सक्रिय होते हैं, जिससे भोजन जल्दी और आसानी से पचता है।

सोने और खाने के बीच रखें उचित अंतर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डिनर और सोने के समय के बीच कम से कम 2 से 3 घंटे का अंतर अवश्य रखना चाहिए। इस समय अंतराल से भोजन अच्छी तरह पच जाता है और रात में एसिडिटी या बेचैनी की शिकायत नहीं होती। NHM का कहना है कि समय पर और संयमित मात्रा में भोजन करने से न केवल वजन नियंत्रित रहता है, बल्कि पूरा शरीर ऊर्जावान और स्वस्थ भी बना रहता है।

स्वस्थ जीवनशैली की कुंजी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हल्का, संतुलित और आसानी से पचने वाला आहार ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य की नींव है। रोज़मर्रा की खान-पान की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव लाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। अच्छी नींद, बेहतर पाचन और स्वस्थ वजन — ये सब सही खान-पान के सीधे परिणाम हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज पहले से कहीं अधिक है — जब भारत में शहरी आबादी का एक बड़ा हिस्सा देर रात काम करने और लेट डिनर की आदत में जकड़ा हुआ है। समस्या केवल 'क्या खाएं' की नहीं, बल्कि 'कब खाएं' और 'कैसे खाएं' की भी है, जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है। जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों — जैसे टाइप-2 डायबिटीज़ और हृदय रोग — में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी को देखते हुए, खान-पान की आदतों पर सार्वजनिक जागरूकता अभियान और भी ज़रूरी हो जाते हैं। सरकारी दिशानिर्देश तभी असरदार होंगे जब इन्हें स्कूलों, कार्यस्थलों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सक्रिय रूप से पहुँचाया जाए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रात को ज्यादा खाने से क्या नुकसान होते हैं?
NHM के अनुसार, रात को ओवरईटिंग से मोटापा बढ़ने का खतरा, गैस, अपच और एसिडिटी की समस्या होती है। इसके अलावा पाचन तंत्र पर अतिरिक्त बोझ पड़ने से नींद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
रात के भोजन में क्या खाना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, रात का भोजन हल्का और सुपाच्य होना चाहिए। दाल-रोटी, सब्जी, सलाद, छाछ, खिचड़ी या दलिया जैसे विकल्प आदर्श हैं, जबकि तला-भुना और मसालेदार भोजन से परहेज़ करना चाहिए।
खाना खाने और सोने के बीच कितना अंतर होना चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि डिनर के कम से कम 2 से 3 घंटे बाद ही सोना चाहिए। इससे भोजन अच्छी तरह पच जाता है और रात में एसिडिटी या बेचैनी नहीं होती।
भोजन को धीरे-धीरे चबाकर खाना क्यों ज़रूरी है?
भोजन को धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाने से पाचन एंजाइम बेहतर तरीके से सक्रिय होते हैं। जल्दबाजी में खाने से पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं और शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता।
NHM ने खान-पान को लेकर क्या सलाह दी है?
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) का कहना है कि रोज़मर्रा की खान-पान की आदतों में छोटे बदलाव लाकर कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। समय पर और संयमित मात्रा में भोजन करने से वजन नियंत्रित रहता है और पूरा शरीर ऊर्जावान बना रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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