क्या आप जानते हैं पंच सरोवर के बारे में?
सारांश
Key Takeaways
- पंच सरोवर भारत के पांच महत्वपूर्ण जल तीर्थ हैं।
- इन सरोवरों में स्नान करने से पाप कटते हैं।
- हर सरोवर की अपनी विशेष मान्यता और धार्मिक महत्व है।
नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत की आध्यात्मिक परंपरा में जल को जीवन, शुद्धि और मोक्ष का साधन माना जाता है। इसी आस्था के साथ जुड़े हैं भारत के पांच पवित्र सरोवर, जिन्हें पंच सरोवर कहा जाता है। ये सरोवर केवल जल के स्रोत नहीं हैं, बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही मान्यताओं, पुराणों और साधना का जीवंत उदाहरण हैं। मान्यता है कि इन सरोवरों में स्नान करने से व्यक्ति के पाप धुलते हैं, मन की शुद्धि होती है और आत्मा को शांति मिलती है।
राजस्थान के पुष्कर में स्थित पुष्कर सरोवर को हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थों में से एक माना जाता है।
कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा के हाथ से यहां एक कमल का फूल गिरा था, जिससे इस सरोवर का निर्माण हुआ। कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। पुष्कर सरोवर के किनारे स्थित भगवान ब्रह्मा का एकमात्र मंदिर इस स्थान को और भी खास बनाता है। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु मोक्ष की कामना लेकर आते हैं।
कैलाश पर्वत के निकट स्थित मानसरोवर को भगवान शिव का धाम माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस सरोवर का निर्माण भगवान ब्रह्मा ने किया था और माता पार्वती यहां स्नान किया करती थीं। इसका जल बहुत ही शीतल और मीठा माना जाता है। न केवल हिंदू, बल्कि बौद्ध
गुजरात के कच्छ जिले में स्थित नारायण सरोवर भगवान विष्णु से जुड़ा पवित्र तीर्थ है। मान्यता है कि यहां स्वयं भगवान विष्णु ने स्नान किया था। कहा जाता है कि कभी सरस्वती नदी का प्रवाह यहां तक आता था और इस सरोवर का जल उसी पवित्र धारा से जुड़ा हुआ है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि नारायण सरोवर में डुबकी लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गुजरात के पाटन जिले में स्थित बिंदु सरोवर को मातृ गया तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है। यहां विशेष रूप से महिलाओं के लिए श्राद्ध और पिंडदान की परंपरा है। मान्यता है कि इससे मातृ आत्मा को शांति मिलती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि कर्दम ने भगवान विष्णु के दर्शन के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी।
कर्नाटक में हंपी के पास स्थित पंपा सरोवर रामायण काल से जुड़ा हुआ है। यही वह स्थान माना जाता है जहां शबरी ने वर्षों तक भगवान राम की प्रतीक्षा की थी। यह क्षेत्र किष्किंधा से जुड़ा माना जाता है। शांत वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर पंपा सरोवर आज भी भक्तों को ध्यान और भक्ति की अनुभूति कराता है।