पटना मुठभेड़: हथियार बरामदगी के दौरान आरोपी सौरभ सिंह ने पुलिस पर चलाई गोली, पैर में लगी गोली
सारांश
मुख्य बातें
पटना के बख्तियारपुर इलाके में रविवार, 25 अक्टूबर 2026 की सुबह एक पुलिस मुठभेड़ में गैरेज मालिक हत्याकांड का मुख्य आरोपी सौरभ सिंह घायल हो गया। पुलिस के अनुसार, हथियार बरामदगी अभियान के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर छिपा हुआ हथियार निकालकर पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी।
मुठभेड़ की पूरी घटना
पुलिस के मुताबिक, रामकृष्ण नगर पुलिस ने सौरभ सिंह को एक दिन पहले ही गिरफ्तार किया था। रविवार सुबह अधिकारी उसे बख्तियारपुर के कल्याण बीघा मोड़ इलाके में ले गए, जहाँ उसने कथित तौर पर हथियार छिपाया था।
अभियान के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर वह छिपा हुआ हथियार निकाला और पुलिस टीम पर सीधे गोली चला दी। पुलिस के अनुसार, एक गोली पुलिस वाहन के बोनट के नीचे हेडलाइट के पास जा लगी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली आरोपी के घुटने के नीचे लगी, जिससे वह घायल होकर गिर पड़ा।
इलाज और हिरासत
घायल आरोपी को तत्काल बख्तियारपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार दिया गया। बाद में उन्नत चिकित्सा के लिए उसे पटना के एनएमसीएच (कथित तौर पर) में रेफर किया गया। इस पूरे ऑपरेशन में एसटीएफ, एसडीपीओ-2 और बख्तियारपुर पुलिस के जवान शामिल थे।
पुलिस अधिकारी का बयान
एसडीपीओ आयुष श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी को हथियार बरामद कराने के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था, तभी उसने कथित तौर पर पुलिस दल पर गोली चला दी। श्रीवास्तव ने कहा कि अधिकारियों को बचाव में जवाबी फायरिंग करनी पड़ी। अब जाँच की जा रही है कि आरोपी पुलिस हिरासत में रहते हुए हथियार तक कैसे पहुँचा — यह प्रश्न जाँच के केंद्र में है।
मूल हत्याकांड की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 26 सितंबर 2026 को पटना के रामकृष्ण नगर के भूपतिपुर इलाके में नंदन ऑटोमोबाइल्स के मालिक अंजनी नंदन कुमार पर गैरेज बंद करते समय हथियारबंद अपराधियों ने घात लगाकर हमला किया था। उन्हें कई गोलियाँ मारी गई थीं और बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। यह मामला कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की आशंका से जुड़ा है, जो पटना में गंभीर कानून-व्यवस्था की चिंता को उजागर करता है।
आगे की जाँच
पुलिस अधिकारी अब इस बात की गहन जाँच कर रहे हैं कि हिरासत में रहते हुए आरोपी के पास हथियार कहाँ से आया। यह घटना हिरासत प्रबंधन को लेकर प्रक्रियागत सवाल खड़े करती है। आने वाले दिनों में जाँच के निष्कर्ष और चार्जशीट की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।