प्रमुखस्वामी महाराज की जीवनी को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: 8,848 पृष्ठ, 21 लाख से अधिक शब्द
सारांश
मुख्य बातें
बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के दिवंगत आध्यात्मिक प्रमुख प्रमुखस्वामी महाराज पर आधारित 13 खंडों की जीवनी को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने एकल लेखक द्वारा रचित विश्व के सबसे लंबे जीवनचरित्र के रूप में मान्यता प्रदान की है। यह ग्रंथ 8,848 पृष्ठों और 21,46,447 शब्दों में विस्तृत है। यह प्रमाणपत्र 4 अक्टूबर 2026 को लंदन के ओवीओ एरीना वेम्बली में एक ऐतिहासिक समारोह में प्रदान किया गया।
पुरस्कार और समारोह
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का यह प्रमाणपत्र परम पूज्य महंत स्वामी महाराज को उनकी 93वीं जयंती के अवसर पर सौंपा गया। समारोह के दौरान एरीना में उपस्थित 11,000 श्रद्धालु इसके प्रत्यक्षदर्शी बने, जबकि विश्वभर में दसियों हज़ार लोगों ने लाइव वेबकास्ट के माध्यम से इस ऐतिहासिक क्षण को देखा।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के वरिष्ठ निर्णायक कार्ल सैविल ने प्रमाणपत्र प्रदान करते हुए कहा, 'एकल लेखक द्वारा लिखित सबसे लंबे जीवनचरित्र के लिए आज का यह प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता, विशेषाधिकार और सम्मान की बात रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि गिनीज का मुख्य उद्देश्य ऐसी असाधारण उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण करना है जो पृथ्वी पर अब तक किसी अन्य व्यक्ति ने हासिल नहीं की हैं।
जीवनी के बारे में
इस जीवनी का शीर्षक है 'ब्रह्मस्वरूप प्रमुखस्वामी महाराज: विस्तृत जीवन एवं कार्य'। इसके लेखक संस्कृत विद्वान साधु आदर्शजीवनदास, पीएच.डी. हैं। इसमें 1921 से 2016 तक के 94 वर्षों के जीवन का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया गया है। इसका शोध और लेखन जुलाई 2017 से अगस्त 2020 तक 38 महीनों में पूरा किया गया।
लेखक साधु आदर्शजीवनदास ने कहा, 'इस जीवनचरित का विषय लेखक से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। परम पूज्य प्रमुखस्वामी महाराज ने अपना जीवन गहन आध्यात्मिकता, गहन विनम्रता तथा वैश्विक सद्भाव, करुणा और सहानुभूति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से परिभाषित किया।' उन्होंने इस दिव्य जीवन और स्थायी विरासत का दस्तावेजीकरण करने को अपने लिए सम्मान और सौभाग्य बताया।
विरासत और पहुँच
यह जीवनचरित केवल अपने असाधारण विस्तार के कारण नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता, सेवा और परोपकार को समर्पित जीवन के एक विस्तृत ऐतिहासिक अभिलेख के रूप में भी उल्लेखनीय है। इन 13 खंडों की 3,10,000 से अधिक प्रतियाँ पहले ही बिक चुकी हैं, जो इसकी व्यापक लोकप्रियता को दर्शाता है।
बीएपीएस की अन्य उपलब्धियाँ
गौरतलब है कि यह मान्यता बीएपीएस की एक अन्य गिनीज उपलब्धि के कुछ महीनों बाद आई है। फरवरी 2026 में वडोदरा, गुजरात में 12,723 बच्चों ने एक साथ संस्कृत के सत्संग दीक्षा के श्लोकों का पाठ कर 'एक साथ सर्वाधिक लोगों द्वारा हिंदू ग्रंथ-पाठ' का रिकॉर्ड बनाया था। उस व्यापक पहल के अंतर्गत 15,000 से अधिक बच्चों ने सभी 315 संस्कृत श्लोक कंठस्थ किए थे।
आगे की राह
यह जीवनचरित वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए प्रमुखस्वामी महाराज के जीवन और विचारों को संरक्षित करने का एक स्थायी माध्यम बन गया है। यह उपलब्धि भारतीय आध्यात्मिक साहित्य के वैश्विक महत्व को और अधिक रेखांकित करती है।