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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जमशेदपुर में श्री जगन्नाथ मंदिर का भूमिपूजन किया

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जमशेदपुर में श्री जगन्नाथ मंदिर का भूमिपूजन किया

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जमशेदपुर में श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के मंदिर का भूमिपूजन किया, जहाँ उन्होंने भगवान जगन्नाथ की कृपा के बारे में अपने विचार साझा किए।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की कृपा सभी पर समान रूप से बरसती है।
समाज में जाति और वर्ग भेदभाव को समाप्त करने का संदेश दिया गया।
मंदिर का निर्माण 100 करोड़ रुपए की लागत से होगा।
यह केंद्र सामाजिक जागरण का माध्यम बनेगा।
मंदिर का वास्तु-शैली पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर से प्रेरित होगा।

जमशेदपुर, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को जमशेदपुर के कदमा (मरीन ड्राइव) में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा, ''भगवान जगन्नाथ की कृपा पूरी मानवता पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से बरसती है।''

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत 'जय जगन्नाथ' के उद्घोष से की और कहा कि महाप्रभु का दरबार भेदभाव से परे है। यहाँ कोई जाति, वर्ग या ऊंच-नीच का स्थान नहीं है।

उन्होंने लोकप्रचलित उक्ति 'जगन्नाथ के भात, जगत पसारे हाथ' का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परंपरा साझा जीवन-मूल्यों और सामूहिकता का प्रतीक है, जहाँ सभी एक साथ महाप्रसाद ग्रहण कर समरसता का अनुभव करते हैं। उन्होंने मंदिर निर्माण के भूमिपूजन के समय को ईश्वरीय संयोग बताया।

राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे रथयात्रा में प्रभु अपनी इच्छा से नंदीघोष रथ पर विराजमान होते हैं, उसी तरह इस शिलान्यास का भी यही उचित समय था। उन्होंने विश्वास जताया कि यह केंद्र सामाजिक जागरण का माध्यम बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब नीलांचल के प्रभु का आशीर्वाद जमशेदपुर की धरती पर स्थायी रूप से स्थापित होगा।

झारखंड की पूर्व राज्यपाल रहीं राष्ट्रपति ने जगन्नाथ संस्कृति को जनजातीय और गैर-जनजातीय परंपराओं के अद्भुत समन्वय का प्रतीक बताया। सबर जनजाति के राजा विश्वावसु और ब्राह्मण विद्यापति की कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने सामाजिक एकात्मता की विरासत को रेखांकित किया।

‘दारुब्रह्म’ स्वरूप का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लकड़ी के देवता के रूप में भगवान जगन्नाथ प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण-सम्मत जीवनशैली का संदेश देते हैं, जो आदिवासी समाज की मूल चेतना से जुड़ा है। मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

ट्रस्ट अध्यक्ष एस.के. बेहरा के अनुसार, लगभग 100 करोड़ रुपए की लागत से ढाई एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना में मुख्य मंदिर डेढ़ एकड़ और आध्यात्मिक-सांस्कृतिक केंद्र एक एकड़ में बनाया जाएगा। मंदिर की वास्तु-शैली श्री जगन्नाथ मंदिर पुरी से प्रेरित होगी। चार वर्षों में मंदिर और दो वर्षों में आध्यात्मिक केंद्र पूरा करने का लक्ष्य है। यहाँ गीता, भागवत जैसे ग्रंथों के अध्ययन के माध्यम से युवाओं में नैतिकता, अनुशासन और आत्मविश्वास का विकास करने की योजना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सामाजिक जागरण का एक केंद्र भी बनेगा।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूमिपूजन का आयोजन किसने किया?
भूमिपूजन का आयोजन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया।
मंदिर का निर्माण कहाँ किया जाएगा?
मंदिर का निर्माण जमशेदपुर के कदमा (मरीन ड्राइव) में किया जाएगा।
इस परियोजना की लागत क्या है?
इस परियोजना की लागत लगभग 100 करोड़ रुपए है।
मंदिर का वास्तु-शैली किससे प्रेरित है?
मंदिर की वास्तु-शैली श्री जगन्नाथ मंदिर पुरी से प्रेरित होगी।
इस मंदिर के माध्यम से क्या संदेश दिया जाएगा?
यह मंदिर सामाजिक जागरण और सामूहिकता का माध्यम बनेगा।
राष्ट्र प्रेस
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