पंजाब में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि: रंधावा ने केंद्र से राहत पैकेज की मांग की
सारांश
Key Takeaways
- पंजाब में भारी बारिश और ओलावृष्टि से फसल बर्बाद हुई है।
- सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्र से राहत की मांग की है।
- किसान फसल बीमा योजना से अज्ञात हैं।
- राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से सहायता की आवश्यकता है।
- किसानों की स्थिति देश की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी है।
नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं की फसल को हुए भारी नुकसान के लिए केंद्र से तात्कालिक सहायता की मांग की है। उन्होंने इस संदर्भ में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने तात्कालिक आकलन, राहत पैकेज और नीतिगत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस पत्र की जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की।
उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "मैंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर तात्कालिक आकलन, राहत पैकेज और नीतिगत सहयोग की मांग की है। विशेष रूप से इसलिए, क्योंकि किसानों के पास पीएमएफबीवाई (प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना) का कवरेज उपलब्ध नहीं है।"
रंधावा ने पत्र में उल्लेख किया कि यह पत्र एक अत्यंत आवश्यक स्थिति में लिखा गया है। यह पंजाब के गुरदासपुर क्षेत्र सहित पूरे राज्य के किसानों की गंभीर समस्या से संबंधित है। पिछले कुछ दिनों, अर्थात् 30-31 मार्च को, पंजाब के कई जिलों में बेमौसम बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि हुई है। बठिंडा, मानसा, फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब, पटियाला, लुधियाना, अमृतसर, तरनतारन, होशियारपुर और गुरदासपुर जैसे कई जिलों में फसल को भारी नुकसान हुआ है। मौसम विभाग ने 6 और 7 अप्रैल को भी खराब मौसम की चेतावनी दी है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पंजाब में लगभग 34 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है। इस समय फसल कटाई के लिए पूरी तरह से तैयार थी और 1 अप्रैल से खरीद प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी, तभी मौसम ने अपना मिजाज बदल लिया। कई स्थानों पर 30 से 70 प्रतिशत तक फसल बर्बाद हो गई है। लगातार बारिश के कारण कटाई में लगभग दो हफ्ते की देरी हो रही है। खेतों में नमी बढ़ने से फसल में बीमारी लगने का खतरा है और गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। जो फसल कट चुकी थी, वह भी बारिश में भीग गई, जिससे उसकी गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों प्रभावित हुए हैं।
इसके अलावा, गीली जमीन के कारण हार्वेस्टर मशीनें भी कार्य नहीं कर पा रही हैं। किसान ऐसी स्थिति में फंसे हैं कि वे न तो फसल काट पा रहे हैं और न ही उसे बेच पा रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि पंजाब के किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) से नहीं जुड़े हैं, इसलिए उन्हें किसी भी बीमा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ऐसी स्थिति में कुछ महत्वपूर्ण सवाल और मांगें सामने आती हैं। क्या केंद्र सरकार ने इस नुकसान का कोई आकलन किया है? यदि नहीं, तो तुरंत सर्वे कराया जाना चाहिए। पंजाब के किसानों को राहत किस तरह मिलेगी, यह भी स्पष्ट किया जाए। क्या केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) से विशेष सहायता देगी, या पूरा बोझ राज्य सरकार पर ही रहेगा?
इसके साथ ही, एसडीआरएफ के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि वर्तमान लागत के अनुसार बहुत कम है, इसलिए इसे बढ़ाया जाना आवश्यक है। खराब मौसम के कारण गेहूं में नमी बढ़ गई है। ऐसे में एफसीआई के खरीद मानकों में ढील दी जानी चाहिए, ताकि किसानों की फसल मंडियों में रिजेक्ट न हो और उन्हें दोहरी मार न झेलनी पड़े।
यह भी आवश्यक है कि केंद्र सरकार पंजाब को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल करने के लिए आगे आए, ताकि भविष्य में किसानों को ऐसी आपदाओं से सुरक्षा मिल सके।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि पंजाब के किसान देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। इस समय वे गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। आपसे अनुरोध है कि इस मामले को प्राथमिकता देते हुए तुरंत नुकसान का आकलन कराएं और जल्द से जल्द ठोस राहत उपायों की घोषणा करें।