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राहुल गांधी की चुनाव प्रचार में अनुपस्थिति से डीएमके गठबंधन में बढ़ी चिंता

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राहुल गांधी की चुनाव प्रचार में अनुपस्थिति से डीएमके गठबंधन में बढ़ी चिंता

सारांश

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अनुपस्थिति से डीएमके गठबंधन की चिंताएँ बढ़ गई हैं। क्या यह चुनावी रणनीति को प्रभावित करेगा?

मुख्य बातें

राहुल गांधी की अनुपस्थिति से डीएमके गठबंधन की चिंताएँ बढ़ी हैं।
28 सीटें मिलने के बावजूद कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सक्रिय नहीं हुआ है।
जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की ऊर्जा बढ़ाने के लिए प्रियंका गांधी की भागीदारी की माँग की जा रही है।
कांग्रेस नेता भाजपा के परिसीमन अभ्यास की आलोचना कर रहे हैं।
राहुल गांधी की चुनाव प्रचार कार्यक्रम की घोषणा जल्द ही होगी।

चेन्नई, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका है। इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा अपने दौरे की तिथियों की घोषणा में बार-बार हो रही देरी ने पार्टी की राज्य इकाई और उसके गठबंधन सहयोगी डीएमके की चिंताओं को बढ़ा दिया है।

गहन चर्चाओं के बाद 28 सीटें मिलने के बावजूद, कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अब तक तमिलनाडु में चुनाव प्रचार में सक्रिय नहीं हुआ है। ऐसे समय में जब अन्य दलों ने अपने प्रचार का स्तर बढ़ा दिया है, राहुल गांधी की अनुपस्थिति कुछ उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्रों में समस्याएँ पैदा कर रही है।

तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) के भीतर कार्यकर्ताओं और नेताओं ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की भागीदारी के लिए दबाव बढ़ा दिया है, जिन्हें पार्टी का सबसे बड़ा जनसमर्थक माना जाता है। नेताओं का मानना है कि उनकी उपस्थिति कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भर सकती है और चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में पार्टी की दृश्यता को बढ़ा सकती है।

टीएनसीसी के अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई और अन्य वरिष्ठ नेता पार्टी के आधार को सक्रिय करने के लिए राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान में लगे हुए हैं। फिर भी, पार्टी के भीतर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे राष्ट्रीय नेताओं की उपस्थिति की माँग बढ़ती जा रही है, जिन्हें व्यापक रूप से पार्टी की चुनावी संभावनाओं को बढ़ाने में सक्षम माना जाता है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने अभी तक अपने तमिलनाडु दौरे की तिथियाँ तय नहीं की हैं। उनकी हिचकिचाहट कथित तौर पर टीएनसीसी के भीतर के मतभेदों से संबंधित है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर बेचैनी पैदा की है।

इसी बीच, कांग्रेस नेता 16-18 अप्रैल को प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास को लेकर भाजपा की मुखर आलोचना कर रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि पार्टी का ध्यान संगठनात्मक मुद्दों और राजनीतिक संदेश के बीच बंटा हुआ है। इस देरी ने राहुल गांधी और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के बीच संबंधों में संभावित तनाव की अटकलों को और बल दिया है।

हालांकि, दोनों नेताओं ने हाल ही में पड़ोसी राज्य पुडुचेरी में एक ही दिन चुनाव प्रचार किया, लेकिन मंच पर एक साथ नहीं दिखे, जिससे गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी की धारणा और मजबूत हुई है।

कांग्रेस नेता विशेष रूप से चिंतित हैं, क्योंकि पार्टी जमीनी स्तर पर लामबंदी के लिए डीएमके की संगठनात्मक ताकत पर निर्भर है। उन्हें आशंका है कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति उनके चुनावी अभियान को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर कमजोर कर सकती है। तमिलनाडु कांग्रेस प्रभारी गिरीश चोडंकर ने कहा है कि राहुल गांधी के चुनाव प्रचार कार्यक्रम की घोषणा जल्द ही की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

राहुल गांधी की अनुपस्थिति निश्चित रूप से कांग्रेस और उसके सहयोगियों के लिए चिंताजनक है। चुनावी प्रचार के अंतिम चरण में यह महत्वपूर्ण है कि नेता सक्रिय रूप से भाग लें, अन्यथा पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार में भाग क्यों नहीं लिया?
राहुल गांधी की अनुपस्थिति कई आंतरिक मतभेदों के कारण है, जो पार्टी के भीतर चिंता का कारण बन रहा है।
डीएमके का राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर क्या कहना है?
डीएमके के नेता चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति से चुनावी अभियान को नुकसान पहुँच सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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