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कम लागत में अधिक मुनाफा: रायसेन कृषि महोत्सव में सीखें मोती की खेती

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कम लागत में अधिक मुनाफा: रायसेन कृषि महोत्सव में सीखें मोती की खेती

सारांश

रायसेन के उन्नत कृषि महोत्सव में मोती की खेती का अनोखा प्रदर्शन। यह नई तकनीक किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प बन रही है। जानें कैसे कम पानी में यह खेती होती है और कितनी कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।

मुख्य बातें

मोती की खेती एक लाभकारी विकल्प है।
कम पानी में संभव है।
केंद्र सरकार से 50% सब्सिडी प्राप्त होती है।
बेरोजगारी कम करने का एक साधन।
आधुनिक तकनीकें जैसे बायोफ्लॉक और आरएएस भी उपलब्ध हैं।

रायसेन, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव में इस बार पारंपरिक खेती से अलग एक नई और आकर्षक पहल देखने को मिल रही है। यहां मोती की खेती का जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है, जो किसानों के लिए आय का एक नया और लाभकारी विकल्प बनकर उभर रहा है।

मेले के पहले दिन इस नवाचार की सराहना केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी की। मेले में मत्स्य पालन विभाग द्वारा मोती उत्पादन की पूरी प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें किसानों को बताया जा रहा है कि किस तरह सीप का चयन किया जाता है, उसमें नाभिक डाला जाता है और तालाब में उसका सही प्रबंधन कर मोती तैयार किया जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मोती की खेती कम पानी में भी की जा सकती है और इससे पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। मेले में मोती की खेती के साथ-साथ बायोफ्लॉक, आरएएस और एक्वापोनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों को भी प्रदर्शित किया जा रहा है, जो पानी आधारित रोजगार के नए अवसर प्रदान कर रही हैं। मेले में पहुंचे किसानों में इस नई तकनीक को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में किसान मोती की खेती के बारे में जानकारी लेने के लिए स्टॉल पर पहुंचे और विशेषज्ञों से सवाल पूछे।

वहीं, वर्षों से मोती की खेती कर रहे बुधन सिंह पुर्ती ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बेरोजगार लोग भी घर पर आसानी से मोती की खेती शुरू कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि एक सीप तैयार करने में करीब ५० रुपये का खर्च आता है, जबकि तैयार मोती बाजार में लगभग ६०० रुपये तक बिक जाता है। बुधन सिंह पुर्ती ने बताया कि उन्होंने भी अपनी नौकरी छोड़कर मोती की खेती शुरू की थी और आज वे करीब ३०० लोगों को रोजगार दे रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। यह मेला पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक और नवाचार से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मोती की खेती के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत सहायता और सब्सिडी प्रदान करती है। यह योजना ग्रामीण युवाओं और किसानों की आय बढ़ाने के लिए 'ब्लू रिवोल्यूशन' (नीली क्रांति) के अंतर्गत चलाई जा रही है। पीएमएमएसवाई के तहत सरकार मोती पालन (सीप पालन) की परियोजना लागत पर ५० फीसदी तक की सब्सिडी (अनुदान) प्रदान करती है। विभिन्न राज्य सरकारों के सहयोग से इस परियोजना पर अधिकतम ५ लाख रुपए तक की सब्सिडी का प्रावधान है, जैसा कि उत्तर प्रदेश में देखा जा रहा है।

वहीं, एक महिला उद्यमी ने बताया कि वह भी मोती की खेती करने में रुचि रखती हैं क्योंकि वह मछली पालन पहले से कर रही हैं। जिस तालाब में मछली पालन हो रहा है, उसी में मोती की खेती करने की योजना है।

दरअसल देश के कुछ हिस्सों में आर्टिफिशियल तरीके से खेतों में तालाब बनाकर 'मोती' की फॉर्मिंग की जा रही है। इसमें सीप के माध्यम से मोती विकसित किए जाते हैं। इस उन्नत तकनीक में तालाब में ठीक उसी तरह से मोती तैयार होते हैं, जैसे समंदर की गहराई में सीप के अंदर मोती तैयार होते हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, इस मॉडल को एमपी में लेकर आए हैं। रायसेन जिले में आयोजित ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ इसी कारण चर्चाओं में आया, क्योंकि इस आयोजन की सबसे खास बात रही केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम डॉ. मोहन यादव को मोती की खेती का प्रदर्शन दिखाना।

जब शिवराज सिंह चौहान ने राजनाथ सिंह को खेतों में तैयार हो रहे मोतियों को दिखाया तो रक्षा मंत्री दंग रह गए। आमतौर पर मोती समुद्र की गहराइयों में पाए जाते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के किसान अब इन्हें मीठे पानी के टैंकों और तालाबों में सफलतापूर्वक पैदा कर रहे हैं। मेले में आए मोती उत्पादक ने राजनाथ, मोहन यादव और शिवराज के सामने सीप से मोती निकालकर दिखाए तो सभी आश्चर्यचकित रह गए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां किसान आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। मोती की खेती जैसे नवाचार ग्रामीण आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने में मदद कर सकते हैं।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोती की खेती के लिए क्या खास तकनीकें हैं?
मोती की खेती में सीप के चयन, नाभिक डालने और तालाब के प्रबंधन जैसी तकनीकें शामिल हैं।
क्या मोती की खेती में पानी की आवश्यकता अधिक होती है?
नहीं, मोती की खेती कम पानी में भी की जा सकती है।
केंद्र सरकार मोती की खेती के लिए क्या सहायता देती है?
केंद्र सरकार पीएमएमएसवाई योजना के तहत मोती पालन पर 50% तक की सब्सिडी देती है।
मोती की कीमत कितनी होती है?
एक सीप से तैयार मोती की कीमत बाजार में लगभग 600 रुपये तक होती है।
क्या कोई भी मोती की खेती कर सकता है?
हां, बेरोजगार लोग भी घर पर मोती की खेती आसानी से शुरू कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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