क्या रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने चंडीगढ़ में रक्षा कौशल कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया?

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क्या रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने चंडीगढ़ में रक्षा कौशल कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया?

सारांश

रक्षा कौशल कॉन्क्लेव का उद्घाटन रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने चंडीगढ़ में किया। उन्होंने आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर दिया और बताया कि कैसे भारत रक्षा क्षेत्र में एक मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है। यह आयोजन उद्योग और शिक्षा जगत की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

Key Takeaways

  • आत्मनिर्भरता पर जोर
  • रक्षा क्षेत्र में बदलाव
  • स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा
  • मानव संसाधन का महत्व
  • पंजाब की क्षमता

नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। चंडीगढ़ में रक्षा, एयरोस्पेस और रणनीतिक क्षेत्र के कौशल विकास पर आयोजित रक्षा कौशल कॉन्क्लेव का उद्घाटन रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने रक्षा और औद्योगिक मार्ग पर एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहाँ आत्मनिर्भरता अब एक राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुकी है।

उन्होंने पिछले दस वर्षों में रक्षा क्षेत्र में आए महत्वपूर्ण बदलावों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से यह क्षेत्र अब आयात पर निर्भरता छोड़कर एक मजबूत और जीवंत इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है। इसमें रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, निजी कंपनियां, छोटे-मध्यम उद्यम और स्टार्टअप सभी शामिल हैं।

रक्षा सचिव ने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार और निरंतर नीतिगत परिवर्तनों ने स्वदेशी विनिर्माण को तेज गति दी है। अब यूएवी, सेंसर, आर्टिलरी गन, बख्तरबंद वाहन और मिसाइलों जैसे जटिल सिस्टम का डिजाइन और उत्पादन भारत में ही हो रहा है। उन्होंने बताया कि 462 कंपनियों को 788 से अधिक औद्योगिक लाइसेंस जारी किए गए हैं, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी में भारी बढ़ोतरी हुई है। 2025 में रक्षा निर्यात 23,162 करोड़ रुपए से अधिक हो गया, जो 2014 के मुकाबले लगभग 35 गुना अधिक है।

राजेश कुमार सिंह ने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, अस्त्र बियॉंड विजुअल रेंज मिसाइल, धनुष तोप और आईएनएस विक्रांत जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म को इंडस्ट्री, रिसर्च और कुशल मानव संसाधन के बीच बढ़ते सहयोग का बेहतरीन उदाहरण बताया। उन्होंने दोहराया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल एक आर्थिक लक्ष्य नहीं है, बल्कि लंबे समय तक रणनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करने की आवश्यकता है। बदलती वैश्विक सप्लाई चेन और तेजी से बढ़ती तकनीक भारत के लिए चुनौतियाँ और नए अवसर ला रही हैं।

रक्षा सचिव ने मानव संसाधन के महत्व पर बात करते हुए कहा कि सच्ची रणनीतिक स्वायत्तता के लिए हार्डवेयर का स्वदेशीकरण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौशल, तकनीक और बौद्धिक पूंजी पर भी संप्रभुता आवश्यक है। उन्होंने स्किल इंडिया मिशन के अंतर्गत सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया, जहाँ नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग जैसी एजेंसियां रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र की मौजूदा और भविष्य की कौशल आवश्यकताओं का मानचित्रण कर रही हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री के टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन के माध्यम से कौशल और रोजगार कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि यह पहल शिक्षा, इंडस्ट्री और रक्षा के बीच की खाई को पाटने के लिए शुरू की गई है। पांच वर्षों में 60,000 करोड़ रुपए के कुल खर्च के साथ, जिसमें 50 प्रतिशत केंद्र सरकार की फंडिंग है। उन्होंने राज्य सरकारों और इंडस्ट्री से अपील की कि इस कार्यक्रम को परिणाम-आधारित तरीके से आगे बढ़ाया जाए, जहाँ अप्रेंटिसशिप और ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग मुख्य आधार बने।

रक्षा सचिव ने पंजाब की रक्षा मैन्युफैक्चरिंग में छिपी क्षमता पर खास जोर दिया। उन्होंने रक्षा इकोसिस्टम नेटवर्क को मजबूत करने, रक्षा संस्थानों के साथ एमएसएमई का बेहतर जुड़ाव बनाने और राज्य में समर्पित कौशल तथा टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की आवश्यकता बताई, ताकि पंजाब रक्षा मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बन सके।

उन्होंने अग्निवीरों की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि अग्निपथ योजना ने अनुशासित और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं का बड़ा पूल तैयार किया है, जिन्हें नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क के तहत सर्टिफिकेशन देकर रक्षा मैन्युफैक्चरिंग और रणनीतिक क्षेत्रों में आसानी से शामिल किया जा सकता है।

यह कॉन्क्लेव पंजाब सरकार ने सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स और कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के सहयोग से आयोजित किया था। रक्षा सचिव ने कहा कि इस आयोजन ने सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत की सामूहिक प्रतिबद्धता को मजबूत किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि समन्वित प्रयासों से पंजाब और उत्तरी क्षेत्र रक्षा-आधारित विकास के प्रमुख चालक बन सकते हैं। कार्यक्रम में उद्योग जगत के नेता, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षा जगत के प्रतिनिधि और सशस्त्र बलों के सदस्य शामिल हुए।

Point of View

हमें यह दर्शाता है कि भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाने का संकल्प लिया है। आत्मनिर्भरता का यह मार्ग केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह समय है जब देश को अपने संसाधनों पर निर्भर होना चाहिए और यह आयोजन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
NationPress
11/01/2026

Frequently Asked Questions

रक्षा कौशल कॉन्क्लेव का उद्देश्य क्या है?
इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य रक्षा, एयरोस्पेस और रणनीतिक क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा देना है।
राजेश कुमार सिंह ने क्या कहा?
उन्होंने आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और रक्षा क्षेत्र में आए बदलावों पर जोर दिया।
इस आयोजन का महत्व क्या है?
यह आयोजन सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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