राज्यसभा में 'जय हिंद-वंदे मातरम्' पर प्रतिबंध, क्या यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है?

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राज्यसभा में 'जय हिंद-वंदे मातरम्' पर प्रतिबंध, क्या यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है?

सारांश

राज्यसभा में 'जय हिंद' और 'वंदे मातरम्' पर रोक को लेकर पप्पू यादव का कड़ा बयान, क्या यह सच में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है? जानें इस विवाद के पीछे की सच्चाई और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं।

Key Takeaways

  • राज्यसभा में 'जय हिंद' और 'वंदे मातरम्' पर रोक लगाई गई है।
  • कांग्रेस और टीएमसी ने इस निर्णय की आलोचना की है।
  • पप्पू यादव ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।
  • राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस चल रही है।
  • संपूर्ण विवाद लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रभावित कर सकता है।

पटना, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा के बुलेटिन में सांसदों को शिष्टाचार और परंपरा का हवाला देते हुए 'जय हिंद' और 'वंदे मातरम्' जैसे नारों को नहीं लगाने की सलाह दी गई है। इस पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने खुलकर आपत्ति जताई है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद और कांग्रेस के नेता पप्पू यादव ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।

राज्यसभा में 'जय हिंद' और 'वंदे मातरम्' के नारों पर प्रतिबंध के विषय में पप्पू यादव ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "यह हर किसी का बोलने का अधिकार है, चाहे वो 'वंदे मातरम्', 'जय हिंद', 'वाहेगुरु', 'सत श्री अकाल', या 'हर हर महादेव' कहे। यह सभी की व्यक्तिगत आजादी है। लेकिन यदि सरकार कुछ थोपने की कोशिश करती है, तो यह गलत है। संविधान के अनुसार कार्य करने में किसी को कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।"

उन्होंने एसआईआर विवाद पर कहा, "उत्तर प्रदेश में कई बीएलओ की मौतें हो गई हैं। यह दर्शाता है कि चुनाव आयोग का तरीका गलत है। सही समय दिया जाना चाहिए। एसआईआर की जांच होनी चाहिए और इसे वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाना चाहिए। बिहार में जिस तरह से गरीब और सामान्य लोगों के वोट करने के अधिकार को छीना गया है, ऐसा नहीं होना चाहिए।"

राज्यसभा में जय हिंद और वंदे मातरम् जैसे नारों पर बैन लगाने के विवाद पर जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, "राष्ट्रीय प्रतीक के नारे का प्रयोग राजनीतिक विमर्श का विषय क्यों बन जाता है? निश्चित रूप से इससे बचना चाहिए। सभी राजनीतिक दलों ने इस देश के संविधान के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की है। संविधान जिन प्रतीकों का उपयोग करने की अनुमति देता है, उनके बारे में विमर्श और आलोचना उचित नहीं है।"

शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे के सदन में नारे लगाने और भाजपा को चुनौती देने के मामले पर नीरज कुमार ने कहा, "ऐसी कोई चुनौती नहीं है। जनता ने पहले ही उन लोगों को नकार दिया है।"

Point of View

NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

क्या राज्यसभा में नारों पर प्रतिबंध सही है?
राज्यसभा में नारों पर प्रतिबंध को लेकर अलग-अलग राय है। कुछ इसे अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक मानते हैं, जबकि अन्य इसे अभिव्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन मानते हैं।
पप्पू यादव ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
पप्पू यादव ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया और कहा कि हर नागरिक को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है।
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