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क्या रवि योग में सूर्य देव की आराधना से सुख-समृद्धि पाई जा सकती है?

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क्या रवि योग में सूर्य देव की आराधना से सुख-समृद्धि पाई जा सकती है?

सारांश

रवि योग में सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। इस योग में उनकी आराधना से सुख, समृद्धि और सम्मान की प्राप्ति होती है। जानें कि कब और कैसे करें सूर्य देव की आराधना।

मुख्य बातें

रवि योग में सूर्य की आराधना फलदायी होती है।
भद्रा काल में महत्वपूर्ण कार्य नहीं करना चाहिए।
इस योग में किए गए कार्य शीघ्र फल देते हैं।
सूर्य देव को जल अर्पित कर पूजा करना चाहिए।
सुख और समृद्धि की प्राप्ति के लिए उचित समय का चयन करें।

नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में सूर्य देव की साधना का अद्वितीय महत्व है। सूर्य को आत्माकारक, नवग्रहों के राजा और प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। उनकी नियमित आराधना से स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, पराक्रम, सम्मान और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही कुंडली दोष दूर होकर करियर में उन्नति मिलती है।

विशेष रूप से रवि योग में सूर्य देव की पूजा अत्यंत फलदायी होती है। इस शुभ योग में अर्घ्य, मंत्र जाप, आदित्य हृदय स्तोत्र या 'ओम घृणि सूर्याय नमः' का जाप करने से सूर्य की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है, जिससे सुख, शांति और उच्च पद की प्राप्ति होती है।

दृक पंचांग के अनुसार, 8 जनवरी को षष्ठी तिथि सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगी, इसके बाद सप्तमी तिथि आरंभ होगी। यदि कोई शुभ कार्य करना चाहते हैं, तो राहुकाल का समय अवश्य ध्यान में रखें। इस समय कोई महत्वपूर्ण या शुभ काम नहीं करना चाहिए। राहुकाल दोपहर 1 बजकर 46 मिनट से 3 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। चंद्रमा पूरे दिन सिंह राशि में गोचर करेंगे। सूर्योदय सुबह 7 बजकर 15 मिनट और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 41 मिनट पर होगा।

पंचांग में रवि योग एक विशेष शुभ संयोग माना जाता है। यह सूर्य और चंद्रमा के बीच का योग है। जब चंद्रमा सूर्य से चौथे, छठे, नौवें या दसवें स्थान पर होता है, तब रवि योग बनता है। खासकर जब सूर्य अश्विनी नक्षत्र में और चंद्रमा रोहिणी (चौथा), आर्द्रा (छठा), आश्लेषा (नौवां) या मघा (दसवां) नक्षत्र में हो, तो यह योग बनता है। रवि योग में किए गए कार्य शीघ्र फल देते हैं और सफल होते हैं। इस मुहूर्त में सूर्य देव की आराधना करने से सुख, समृद्धि और सम्मान मिलता है। यह योग उच्च पद, प्रतिष्ठा और सफलता प्रदान करता है।

यह समय कई शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल है। घर में नई कार लाने, प्रॉपर्टी का सौदा पक्का करने, कार बुकिंग कराने, दुकान का उद्घाटन करने, गृह प्रवेश करने या किसी नए बिजनेस या कार्य की शुरुआत करने के लिए रवि योग शुभ माना जाता है। ऐसे कार्यों से लंबे समय तक लाभ मिलता है।

वहीं, भद्रा काल अशुभ समय होता है। इस दौरान महत्वपूर्ण काम जैसे विवाह, मुंडन, नामकरण या नए निवेश जैसे कार्य नहीं करने चाहिए। भद्रा में शुरू किए गए कामों में बाधाएं आ सकती हैं। रवि योग में सूर्य देव को जल अर्पित कर पाठ करना चाहिए। धर्म शास्त्र के अनुसार, तांबे के लोटे में जल, रोली, गुड़, अक्षत डालकर जल देना चाहिए। इस दौरान 'ओम घृणि सूर्याय नमः' का जप कर धूप-दीप जलाना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज में सकारात्मकता फैलाने का भी कार्य करता है। ऐसे में, हमें इस योग का सही उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भद्रा काल में क्या नहीं करना चाहिए?
भद्रा काल में महत्वपूर्ण कार्य जैसे विवाह, मुंडन, नामकरण या नए निवेश नहीं करना चाहिए।
रवि योग में सूर्य की पूजा का क्या महत्व है?
रवि योग में सूर्य की पूजा करने से सुख, समृद्धि और सम्मान की प्राप्ति होती है।
राष्ट्र प्रेस
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