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लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नवीकरणीय ऊर्जा की गति को बढ़ाना होगा

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लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नवीकरणीय ऊर्जा की गति को बढ़ाना होगा

सारांश

आईआईटी मद्रास के अध्ययन के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा की वर्तमान गति 2050 तक जीवाश्म ईंधनों को पीछे नहीं छोड़ पाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए तत्काल निवेश बढ़ाना आवश्यक है। क्या हम समय पर जलवायु संकट से निपट पाएंगे?

मुख्य बातें

2050 तक जीवाश्म ईंधनों को पीछे छोड़ने के लिए तेजी से प्रयास आवश्यक हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश को दोगुना करना होगा।
बिजली ग्रिड और ऊर्जा भंडारण पर खर्च बढ़ाना जरूरी है।
भारत का लक्ष्य 2030 तक 485 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा हासिल करना है।
नेट-जीरो लक्ष्य के लिए कई उपायों की जरूरत होगी।

नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आईआईटी मद्रास द्वारा प्रस्तुत एक अध्ययन ने वैश्विक ऊर्जा पर गहन और यथार्थवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। इस रिसर्च के अनुसार, यदि वर्तमान गति से कार्य जारी रहा, तो नवीकरणीय ऊर्जा वर्ष 2050 तक भी जीवाश्म ईंधनों (कोयला, तेल और गैस) को मात नहीं दे पाएगी। हालांकि, शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि तेज और आक्रामक प्रयास किए जाएं, तो यह लक्ष्य 2040 के दशक के अंत तक प्राप्त किया जा सकता है।

अध्ययन के अनुसार, वैश्विक जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए बड़े पैमाने पर निवेश में तुरंत वृद्धि की आवश्यकता है। विशेष रूप से, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश को कम से कम दोगुना करना होगा। इसके अलावा, बिजली ग्रिड और ऊर्जा भंडारण पर खर्च को लगभग 73 प्रतिशत बढ़ाना आवश्यक है। आईआईटी मद्रास का यह शोध एक प्रमुख इंजीनियरिंग जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिसमें पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।

शोध में स्वीकार किया गया है कि वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन यह अभी भी आवश्यकतानुसार पर्याप्त नहीं है। आईआईटी के शोधकर्ताओं का यह स्पष्ट कहना है कि तकनीक उपलब्ध है, लेकिन विश्वभर में अभी भी उस गति और स्तर पर निवेश नहीं हो रहा है, जितनी आवश्यकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्यों और उसके लिए की जाने वाली वास्तविक कार्रवाई के बीच का अंतर अभी भी काफी बड़ा है। वर्तमान वृद्धि दर लगभग 5.48 प्रतिशत प्रति वर्ष है, जिसके अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा 50 प्रतिशत हिस्सेदारी तक पहुँचने में 2047 से 2053 तक का समय लगेगा। यदि इस वृद्धि दर को दोगुना करके लगभग 10.96 प्रतिशत किया जाए, तो यह लक्ष्य 2035 से 2037 के बीच प्राप्त किया जा सकता है। हालांकि, सबसे धीमे परिदृश्य में यह लक्ष्य 2074 तक भी नहीं मिल पाएगा।

रिसर्च में बताया गया है कि पिछले एक दशक में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में 128 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 3869.7 गीगावाट तक पहुँच गई है। इसके बावजूद, यह कुल वैश्विक ऊर्जा खपत का केवल 14.56 प्रतिशत हिस्सा है। जीवाश्म ईंधन, जैसे कोयला, तेल और गैस, अभी भी दुनिया की 81 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहे हैं और 95 प्रतिशत से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। भारत के सामने एक जटिल चुनौती है।

एक ओर, देश तेजी से विकास कर रहा है और ऊर्जा की मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणीय लक्ष्यों को भी पूरा करना आवश्यक है। भारत ने 2030 तक 485 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें सौर, पवन, जल विद्युत और बायोएनर्जी शामिल हैं। यह लक्ष्य न केवल भारत बल्कि विश्व के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

आईआईटी द्वारा किया गया अध्ययन यह भी बताता है कि सिर्फ नवीकरणीय ऊर्जा के भरोसे 2050 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। इसके लिए कई अन्य उपायों की भी आवश्यकता होगी, जिनमें कार्बन कैप्चर और भंडारण तकनीक, उन्नत ऊर्जा भंडारण (बैटरी, पंप्ड हाइड्रो, ग्रीन हाइड्रोजन), ऊर्जा दक्षता में सुधार और स्मार्ट ग्रिड का विकास शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन एक स्पष्ट चेतावनी देता है कि सिर्फ लक्ष्य तय करना पर्याप्त नहीं है। यदि दुनिया को समय पर जलवायु संकट से निपटना है, तो तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे। बड़े स्तर पर निवेश, नीतिगत सुधार और तकनीकी विकास के बिना 2050 तक नेट-जीरो का लक्ष्य हासिल करना अत्यंत कठिन होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु यह अभी भी पर्याप्त नहीं है। हमें तत्काल ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। जलवायु संकट से निपटने के लिए निवेश और नीतिगत सुधार आवश्यक हैं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवीकरणीय ऊर्जा की वर्तमान स्थिति क्या है?
वर्तमान में नवीकरणीय ऊर्जा की वृद्धि दर लगभग 5.48 प्रतिशत है, जो 50 प्रतिशत हिस्सेदारी तक पहुँचने में 2047 से 2053 तक का समय लेगी।
भारत का नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य क्या है?
भारत ने 2030 तक 485 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
क्या नवीकरणीय ऊर्जा के भरोसे नेट-जीरो लक्ष्य हासिल किया जा सकता है?
सिर्फ नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भर रहना कठिन है, इसके लिए अन्य उपायों की भी आवश्यकता होगी।
क्यों जरूरी है निवेश बढ़ाना?
जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश को कम से कम दोगुना करना होगा।
आईआईटी मद्रास का अध्ययन किस विषय पर है?
यह अध्ययन वैश्विक ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा की प्रगति पर केंद्रित है।
राष्ट्र प्रेस
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