क्या रोहिणी आचार्य ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए?

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क्या रोहिणी आचार्य ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए?

सारांश

रोहिणी आचार्य ने बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ आवाज उठाते हुए आरोप लगाया कि एनडीए सरकार ने महागठबंधन के समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए घातक है। क्या यह चुनावी धांधली की ओर इशारा करता है?

Key Takeaways

  • रोहिणी आचार्य ने बिहार में एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
  • 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया गया।
  • महागठबंधन के समर्थकों की चिंता व्यक्त की गई।
  • युवाओं को राजनीति में आने की सलाह दी गई।
  • लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए सभी को सजग रहने की आवश्यकता है।

पटना, 25 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोमवार को बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर एनडीए सरकार और भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) पर तीखा हमला किया।

पत्रकारों से बातचीत में आचार्य ने आरोप लगाया कि राज्य में लगभग 65 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिनमें से अधिकांश महागठबंधन के समर्थक हैं।

उन्होंने कहा, "जिस व्यक्ति को कमल नहीं दिख रहा है, उसे मृत घोषित कर दिया गया है। हम इसी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। हम बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और लालू प्रसाद यादव द्वारा संविधान के माध्यम से हमें दिए गए अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। हम इस लड़ाई में सारण के लोगों के साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।"

वहीं, बिहार में 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान तेजस्वी यादव ने यह ऐलान किया कि वह विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अगला प्रधानमंत्री बनाने के लिए काम करेंगे। हालांकि, बिहार में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में पूछे जाने पर राहुल गांधी चुप्पी साध गए।

रोहिणी आचार्य ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "बिहार की जनता चाहती है कि तेजस्वी मुख्यमंत्री बनें। बाकी बातें बैठक में होंगी। हम जो भी निर्णय लेंगे, वह अभी मीडिया को नहीं बताएंगे।"

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में प्रवेश की अटकलों के बीच, रोहिणी आचार्य ने राजनीति में युवाओं की भागीदारी का स्वागत किया।

उन्होंने कहा, "युवाओं को राजनीति में आना चाहिए। जिनके दिल में गरीबों के प्रति सम्मान है, उन्हें राजनीति में जरूर आना चाहिए।"

अपने भाई तेज प्रताप यादव के महुआ निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के सवालों का जवाब देते हुए रोहिणी आचार्य ने कहा, "सभी को चुनाव लड़ने का अधिकार है, कोई भी चुनाव लड़ सकता है।"

Point of View

यह स्पष्ट है कि बिहार में मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप गंभीर हैं। यह केवल एक दल की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे लोकतंत्र की नींव को हिलाने का मामला है। सभी पक्षों को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

रोहिणी आचार्य ने क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार ने लगभग 65 लाख महागठबंधन समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए हैं।
बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का क्या महत्व है?
मतदाता सूची का पुनरीक्षण लोकतंत्र में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करता है।
क्या रोहिणी आचार्य राजनीति में युवाओं के प्रति सकारात्मक हैं?
हाँ, उन्होंने युवाओं की राजनीति में भागीदारी का स्वागत किया है।