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क्या सबरीमाला सोना चोरी मामले में टीडीबी के सभी सदस्य आरोपी हैं?

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क्या सबरीमाला सोना चोरी मामले में टीडीबी के सभी सदस्य आरोपी हैं?

सारांश

सबरीमाला अयप्पा मंदिर से गायब सोने की जांच में नया मोड़ आया है। एसआईटी ने पूर्व त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के सभी सदस्यों को आरोपी बनाया है। यह मामला केरल के मंदिर प्रशासन में हलचल पैदा कर रहा है। क्या इस जांच से सच सामने आएगा?

मुख्य बातें

एसआईटी ने सभी पूर्व बोर्ड सदस्यों को आरोपी बनाया है।
जांच केरल उच्च न्यायालय के निर्देश पर की जा रही है।
गोल्ड कोटिंग के लिए धन मुहैया करने वाले उन्नीकृष्णन पोट्टी को पहला आरोपी बनाया गया है।
आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धाराएं लगाई गई हैं।
बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पद्मकुमार ने जांच में सहयोग देने का आश्वासन दिया है।

चेन्नई, १२ अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। सबरीमाला अयप्पा मंदिर से गायब हुए सोने की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सीपीआई (एम) नेता ए. पद्मकुमार के नेतृत्व वाले पूर्व त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) को मामले में आरोपी बनाया है।

बोर्ड के २०१९ के सभी सदस्यों को आरोपी बनाया गया है, जिससे केरल के मंदिर प्रशासन में हड़कंप मच गया है। यह मामले में एक नया मोड़ है, जो मंदिर स्वर्ण-प्लेट घोटाला कहलाता है।

तत्कालीन देवस्वोम आयुक्त एन. वासु, तिरुवभरणम आयुक्त, कार्यकारी अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और सहायक अभियंता पर भी आरोप लगाए गए हैं।

देवस्वोम सतर्कता पुलिस अधीक्षक और सबरीमाला उच्चायुक्त द्वारा अनियमितताओं की रिपोर्ट मिलने के बाद, अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एच. वेंकटेश के नेतृत्व में कार्यरत एसआईटी ने केरल उच्च न्यायालय के निर्देश पर मामला दर्ज किया।

जाँच उन आरोपों के इर्द-गिर्द घूमती है कि सबरीमाला में द्वारपालक की मूर्तियों से इलेक्ट्रोप्लेटिंग के बहाने अवैध रूप से सोना निकाला गया था।

पुजारी से प्रायोजक बने उन्नीकृष्णन पोट्टी को पहला आरोपी बनाया गया है। उन्होंने गोल्ड कोटिंग (स्वर्ण-लेपन कार्य) के लिए धन मुहैया कराया था। पोट्टी के सहयोगी कल्पेश को दूसरे आरोपी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने कथित तौर पर मूर्तियों के आवरण से सोना निकाला, जिससे बोर्ड को आर्थिक नुकसान हुआ।

एसआईटी सूत्रों के अनुसार, उन्नीकृष्णन पोट्टी ने सबसे पहले २०१९ में देवस्वोम अधिकारियों से द्वारपालक की मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ाने का आग्रह किया था। अक्टूबर २०२४ में, उन्होंने अधिकारियों को फिर से ईमेल किया, जिसमें दावा किया कि मूर्तियों का रंग "अत्यधिक जलवायु परिवर्तन के कारण फीका पड़ गया है" और काम दोबारा करने का अनुरोध किया।

८ सितंबर, २०२५ को, अधिकारियों ने उच्च न्यायालय के मौजूदा आदेशों और देवस्वोम नियमावली की प्रक्रियाओं के बावजूद, इस तरह के बदलावों पर रोक लगाते हुए, पुनः परत चढ़ाने का काम जारी रखा।

आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें धारा ४०३ (संपत्ति का बेईमानी से गबन), ४०६ और ४०९ (आपराधिक विश्वासघात), ४६६ और ४६७ (मूल्यवान दस्तावेजों की जालसाजी), और धारा ३४ (साझा इरादा) शामिल हैं।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ए. पद्मकुमार ने कहा कि वह जांचकर्ताओं के साथ पूरा सहयोग करने को तैयार हैं। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "अदालत को यह तय करने दीजिए कि मेरे अधीन बोर्ड ने कोई अनियमितता की है या नहीं। मैंने कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया है और हमारे बोर्ड ने सबरीमाला में कभी भी किसी नियम या रीति-रिवाज का उल्लंघन नहीं किया है।" उन्होंने यह भी कहा कि वह जांच का स्वागत करते हैं और चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए।

अब एसआईटी की निगरानी में चल रहे इस मामले से हाल के वर्षों में केरल के सबसे विवादास्पद मंदिर-संबंधी घोटालों में से एक पर स्पष्टता आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस मामले का सही निष्कर्ष निकालना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सबरीमाला सोना चोरी मामला राजनीतिक है?
यह मामला राजनीतिक तत्वों से जुड़ा हुआ हो सकता है, लेकिन इसकी जांच पूरी तरह से विधिक प्रक्रिया के अंतर्गत हो रही है।
एसआईटी द्वारा क्या कार्रवाई की गई है?
एसआईटी ने सभी आरोपियों पर मामला दर्ज किया है और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
क्या आरोपियों ने अपनी गलती स्वीकार की है?
वर्तमान में, आरोपियों ने अपनी गलती स्वीकार नहीं की है और जांच का सामना कर रहे हैं।
क्या यह मामला केरल में अन्य मंदिरों पर प्रभाव डालेगा?
यह मामला निश्चित रूप से मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रभावित करेगा।
इस मामले का क्या परिणाम हो सकता है?
इस मामले का परिणाम आगामी जांच और अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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