क्या 13 जनवरी का पंचांग माघ कृष्ण की दशमी तिथि पर शुभ मुहूर्त और राहुकाल की जानकारी देता है?
सारांश
Key Takeaways
- पंचांग का महत्व
- राहुकाल का ध्यान रखें
- हनुमान पूजा की विधि
- मंगल ग्रह की शांति के उपाय
- विशाखा नक्षत्र का प्रभाव
नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में पंचांग का अत्यधिक महत्व है। पंचांग के पाँच अंग - तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर ही विवाह, पूजा, व्रत, मुहूर्त आदि कार्य निर्धारित होते हैं। पंचांग देखकर किया गया कार्य अक्सर सफल और फलदायी होता है, जबकि बिना देखे किया गया कार्य नकारात्मक परिणाम दे सकता है।
दृक पंचांग के अनुसार 13 जनवरी को कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि शाम 3:17 बजे तक रहेगी, इसके बाद एकादशी शुरू होगी। विशाखा नक्षत्र 14 जनवरी की रात 12:06 बजे तक प्रभावी रहेगा। चंद्रमा तुला राशि में शाम 5:21 बजे तक रहेंगे, फिर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्योदय सुबह 7:15 बजे और सूर्यास्त शाम 5:45 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 3:30 बजे और चंद्रास्त दोपहर 1:10 बजे रहेगा।
किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले राहुकाल का समय अवश्य नोट करें। यह दोपहर 3:07 से 4:26 बजे तक रहेगा, इस दौरान कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। शूल योग शाम 7:05 बजे तक और करण विष्टि शाम 3:17 बजे तक रहेगा।
13 जनवरी को मंगलवार का दिन हिंदू पंचांग के अनुसार देवी भगवती और श्री राम के भक्त हनुमान के पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन मंगल ग्रह की पूजा और शांति से जीवन में साहस, ऊर्जा, सुरक्षा, और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
इस दिन पूजा की सरल विधि अपनाकर विशेष लाभ प्राप्त किया जा सकता है। सुबह स्नान के बाद पूर्व या उत्तर दिशा में बैठकर लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। हनुमान जी को लाल चंदन, लाल फूल, सिंदूर से पूजन करें, इसके बाद गुड़-चने के साथ मोदक, पान, लौंग का भोग लगाएं और दीप जलाकर प्रार्थना करें।
श्री राम भक्त को रामनाम प्रिय है, इसलिए रामनाम की माला चढ़ाएं और हनुमान चालीसा का 7 या 11 बार पाठ करें। सुंदरकांड का पाठ करें। देवी भगवती के लिए लाल चुनरी, लाल फूल और मिठाई का भोग लगाएं। माता को पान चढ़ाना लाभदायी होता है। मंगल ग्रह की शांति के लिए ओम अं अंगारकाय नमः, भौम भौमाय नम: मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि मंगलवार को इस प्रकार पूजा करने से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है, साथ ही मानसिक तनाव, शत्रु भय और आर्थिक कठिनाइयों से राहत मिलती है।